नए नियम में MP के 4 शहरों में बाहर हो जाएंगे सैकड़ों अस्पताल, कहां इलाज कराएंगे आयुष्मान योजना के लाखों मरीज?
इंदौर में 10 अस्पतालों के पास भी नहीं NABH certificate, आज से लागू नया नियम, अस्पतालों की होगी जांच
Publish Date: Wed, 01 Apr 2026 (13:27 IST)
Updated Date: Wed, 01 Apr 2026 (13:39 IST)
एक अप्रैल से मध्यप्रदेश के अस्पतालों के लिए NABH certificate का नया नियम लागू होने जा रहा है। इस नए नियम का मतलब है कि जिन अस्पतालों के पास यह सर्टिफिकेट होगा, वही अस्पताल आयुष्मान योजना के तहत कार्ड धारक मरीजों का इलाज कर पाएंगे, जिन अस्पतालों के पास यह सर्टिफिकेट नहीं है, वो योजना से बाहर हो जाएंगे। पहले ही आयुष्मान कार्ड धारक मरीजों को अस्पतालों में कई तरह की मुसीबतों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में हजारों- लाखों आयुष्मान कार्ड धारक मरीज परेशान होंगे।
स्वास्थ्य विभाग के जानकारों ने वेबदुनिया को बताया कि नए नियम सिर्फ निजी अस्पतालों के लिए लाया गया है, ऐसे में मध्यप्रदेश के इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर के 80 प्रतिशत अस्पताल बाहर हो जाएंगे। वहीं, इंदौर में तो 10-12 अस्पतालों के पास भी NABH certificate नहीं है, ऐसे में लाखों मरीज कहां जाएंगे और कहां अपना इलाज कराएंगे, यह सवाल बना हुआ है।
बता दें कि आयुष्मान योजना के तहत ज्यादातर गरीब तबके और वंचित वर्ग के मरीज अपना इलाज कराते हैं। इन मरीजों में कई ऐसे लोग हैं जो आदिवासी इलाकों से आते हैं। इनमें पूरा निमाड़ क्षेत्र शामिल है। यहां से कई गरीब और आदिवासी महिलाएं और बच्चे इस योजनाओं का लाभ लेते हैं।
क्या है नया नियम : बता दें कि प्राइवेट अस्पतालों में इलाज की गुणवत्ता सुधारने के लिए NABH (National Accreditation Board for Hospitals & Healthcare Providers) सर्टिफिकेशन अनिवार्य किया जा रहा है। आयुष्मान भारत योजना के तहत फुल NABH वाले अस्पतालों को सीधा इंपैनलमेंट मिलेगा। 1 अप्रैल 2026 से, भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, और जबलपुर में बिना किसी NABH प्रमाण पत्र वाले अस्पताल आयुष्मान योजना के अंतर्गत इलाज नहीं कर पाएंगे। एंट्री लेवल NABH छोटे अस्पतालों के लिए शर्त है कि उन्हें दो साल के भीतर अपना स्टेटस अपग्रेड करना होगा, नहीं तो उनकी संबद्धता खत्म कर दी जाएगी। जबकि ऐसे अस्पताल जिनके पास कोई भी NABH सर्टिफिकेशन नहीं है, वे आयुष्मान योजना में इलाज नहीं कर पाएंगे।
4 शहरों 395 आयुष्मान अस्पताल : बता दें कि मध्यप्रदेश के 4 शहरों भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, और जबलपुर में यह नियम लागू किया जा रहा है। इन चारों शहरों में कुल 395 आयुष्मान अस्पताल हैं। इनमें से भी 212 अस्पताल ऐसे हैं जो एंट्री लेवल पर हैं। जबकि सिर्फ 59 के पास NABH सर्टिफिकेट है। ऐसे में बाकी अस्पतालों को नए नियम के मुताबिक अपग्रेड करना होगा, तभी वे मरीजों का इलाज कर पाएंगे, अन्यथा नहीं।
प्रदेश के 80 प्रतिशत अस्पताल हो जाएंगे बाहर : स्वास्थ्य विशेषज्ञों के साथ चर्चा में सामने आया कि नए नियम से पूरे प्रदेश में करीब 80 प्रतिशत अस्पताल बाहर हो जाएंगे, जिसका सीधा असर आयुष्मान कार्ड धारक मरीजों पर होगा। ऐसे में सवाल है कि कम से कम तब तक जब तक बाकी अस्पताल अपग्रेड नहीं हो जाते, प्रदेश के लाखों मरीज अपना इलाज कराने कहां जाएंगे। जिनके पास यह सर्टिफिकेट है उनके पास ओवर क्राउडिंग हो जाएगी।
इंदौर में क्या स्थिति : जबकि इंदौर की बात करें तो यहां डॉक्टरों के मुताबिक 10 या 12 अस्पताल भी शहर में ऐसे नहीं हैं, जिनके पास NABH certificate हो। सिर्फ कुछ बड़े अस्पतालों के पास NABH certificate है। ऐसे में उन पर दबाव बढेगा और ज्यादा मरीजों की संख्या पहुंचने की वजह से वे उन्हें कैसे संभालेंगे और क्या व्यवस्थाएं करेंगे यह सवाल बना हुआ है।
बड़े अस्पतालों को फायदा पहुंचाने की साजिश : स्वास्थ्य विशेषज्ञों और कुछ निजी अस्पताल संचालकों ने अपना नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर बताया कि यह सीधे- सीधे प्रदेश के बड़े अस्पतालों को फायदा पहुंचाने के लिए लाया गया नियम है। उन्होंने बताया कि जब अस्पतालों और नर्सिंग होम को स्थानीय विभागीय स्तर पर मान्यता मिली हुई है तो फिर इस नए नियम का क्या औचित्य है। उनका तर्क है कि अगर उनके लिए NABH certificate लेना अनिवार्य करना था तो फिर उन्हें स्थानीय स्तर पर मान्यता क्यों दी गई।
कोर्ट जा सकते हैं अस्पताल संचालक : स्वास्थ्य विभाग में दबी जुबान चर्चा है कि ज्यादातर अस्पताल और नर्सिंग होम संचालक इन नए नियम से नाराज हैं। वे इसे बड़े अस्पतालों को फायदा पहुंचाने की साजिश बता रहे हैं। कहा जा रहा है बगैर NABH certificate के संचालित हो रहे अस्पतालों के संचालक नियम के खिलाफ कोर्ट जा सकते हैं।
क्या कहते है स्वास्थ्य अधिकारी : इंदौर स्वास्थ्य विभाग के
सीएमएचओ डॉ माधव प्रसाद हसानी ने
वेबदुनिया को बताया कि शासन अस्पतालों के जो निर्धारित मापदंड हैं वो सुनिश्चित करना चाहता है— और उसी तारतम्य में यह नए नियम का फैसला लिया गया होगा। ऐसा मेरा मानना है।
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सिर्फ प्राइवेट अस्पतालों को लेना होगा NABH certificate
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मध्यप्रदेश के 80 प्रतिशत अस्पताल हो जाएंगे नियम से बाहर
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इंदौर में सिर्फ 10-12 अस्पतालों के पास भी नहीं NABH certificate
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इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर में आज से लागू नियम
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जिन बड़े अस्पतालों के पास NABH certificate वहीं होगा आयुष्मान इलाज
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नए नियम के बाद अस्पतालों में मरीजों की होगी ओवर क्राउडिंग
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लाखों आयुष्मान कार्ड धारक मरीज हो सकते हैं परेशान
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ज्यादातर छोटे अस्पतालों के पास नहीं है NABH certificate
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कोर्ट जा सकते हैं छोटे निजी अस्पतालों के संचालक