External Affairs Minister S Jaishankar: भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा कि कूटनीति (Diplomacy) केवल पश्चिमी देशों का विषय नहीं है, बल्कि यह तो हमारी रगों में बसी संस्कृति का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण और हनुमान जी सबसे महान डिप्लोमैट थे। जयशंकर ने कहा कि यदि हम अपनी संस्कृति के इन महान उदाहरणों को दुनिया के सामने पेश नहीं करते, तो यह हमारी समृद्ध विरासत के साथ अन्याय होगा।
हम अपनी जड़ों में झांकें : सिम्बायोसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी, पुणे के दीक्षांत समारोह में जयशंकर ने आधुनिक कूटनीति को समझाने के लिए महाभारत और रामायण का सहारा लिया। विदेश मंत्री ने कहा कि जब हम शक्ति, संघर्ष और रणनीति की बात करते हैं, तो हमें अपनी जड़ों की ओर देखना चाहिए। भगवान कृष्ण को उन्हें 'महाभारत का महान डिप्लोमैट' बताते हुए जयशंकर ने कहा कि उन्होंने बिना शस्त्र उठाए पूरे युद्ध की रणनीति बदल दी।
इसी तरह जयशंकर ने हनुमान जी को 'रामायण काल का महान डिप्लोमैट' करार देते हुए बताया कि कैसे उन्होंने श्रीलंका जाकर न केवल जानकारी जुटाई, बल्कि माता सीता का मनोबल बढ़ाकर और रावण की लंका को जलाकर अपना मिशन पूरा किया। उन्होंने तर्क दिया कि यदि हम अपनी संस्कृति के इन महान उदाहरणों को दुनिया के सामने पेश नहीं करते, तो यह हमारी समृद्ध विरासत के साथ अन्याय होगा।
पड़ोसी देशों पर क्या बोले जयशंकर : जयशंकर ने याद दिलाया कि संकट चाहे कोरोना का हो (वैक्सीन मैत्री) या श्रीलंका में हाल ही में आया भीषण चक्रवात दीत्वा, भारत हमेशा सबसे पहले मदद लेकर पहुंचता है। यूक्रेन युद्ध जैसे संकट में भी भारत ने दुनिया के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई। पड़ोसी देशों के साथ भारत के उतार-चढ़ाव वाले रिश्तों पर जयशंकर ने कहा कि हमारे पड़ोसी देशों (श्रीलंका, बांग्लादेश आदि) में भारत कोई बाहरी देश नहीं, बल्कि वहां की घरेलू राजनीति का एक बड़ा मुद्दा होता है। यही कारण है कि वहां कभी भारत की तारीफ होती है, तो कभी कड़ी आलोचना।
डॉ. एस जयशंकर ने एक्स पर पोस्ट कर कहा- छात्रों से खासकर पिछले दशक में, एक चुनौतीपूर्ण अंतरराष्ट्रीय माहौल के बीच भारत की लगातार तरक्की के बारे में बात की। उन्हें आत्मविश्वास के साथ ग्लोबल वर्कप्लेस में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया, क्योंकि भारत दुनिया में एक बड़ी भूमिका निभा रहा है। 40 से ज्यादा देशों के सभी ग्रेजुएट छात्रों को उनके भविष्य के प्रयासों के लिए शुभकामनाएं दीं।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala