यूपी में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुडा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसे लेकर लगातार बहस और बयानबाजी जारी है। लेकिन अब जो खबर सामने आई है वो चौंकाने वाली है। दरअसल बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने सोमवार को इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने यूजीसी बिल और शंकराचार्य के साथ हुई घटना के विरोध में यह कदम उठाया है।
बता दें कि इस संबंध में सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री की एक तस्वीर सोमवार को सोशल मीडिया पर सामने आई है, जिसमें वह पोस्टर लेकर खड़े दिखाई दे रहे हैं। पोस्टर में लिखा है कि हैशटैग यूजीसी रोल बैक..., काला कानून वापस लो। शंकराचार्य और संतों को यह अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान। बता दें कि अलंकार अग्निहोत्री 2016 बैच के पीसीएस ऑफिसर हैं।
यूजीसी की नई गाइडलाइन को रॉलेट एक्ट 1919 की संज्ञा देते हुए सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने कहा है कि यूजीसी की नई गाइडलाइन सामान्य वर्ग के छात्रों का शोषण करने वाली है। उन्होंने लिखा है कि इस गजेटियर में पैरा 2, 5, 6 और 7 सवर्णों के ख़िलाफ़ है। इनसे ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, कायस्थ और भूमिहार जैसी जातियों के बच्चों के प्रति विषमताओं और षड्यंत्र करने का मौक़ा मिलेगा। बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट के इस्तीफे के एक पैरा को पढ़कर ये अंदेशा मिलता है कि इस्तीफे के बाद वो राजनीति में कदम रखने वाले हैं। उन्होंने एक पैरा में लिखा है कि अब समय आ गया है कि ब्राह्मण और अन्य सवर्ण वर्ग का प्रतिनिधित्व करने के लिए वैकल्पिक राजनीतिक व्यवस्था का निर्माण करने का। उन्होंने लिखा है कि सामान्य वर्ग की बात करने वाला कोई नहीं बचा है।
फ़िलहाल सिटी मजिस्ट्रेट के इस्तीफ़े को लेकर विपक्षी दलों को बीजेपी पर निशाना साधने का एक बड़ा मौक़ा मिल गया है। यूपी में ब्राह्मण राजनीति को लेकर बीते दो महीनों से बवाल मचा हुआ है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के मुद्दे को ब्राह्मण विरोधी बताने की कोशिश के बीच अब यूजीसी को सवर्णों के ख़िलाफ़ बताकर माहौल बनाया जा रहा है। इस बीच सिटी मजिस्ट्रेट के इस्तीफे ने विपक्ष को सरकार पर हमला बोलने का बड़ा मौक़ा दे दिया है। देखना होगा बीजेपी अब आगे किस रणनीति पर आगे बढ़ती है।
क्या लिखा है इस्तीफे में : अलंकार अग्निहोत्री ने अपने इस्तीफा में उत्तर प्रदेश सिविल सेवा वर्ष 2019 बैच का अपने को राजपत्रित अधिकारी बताया है। साथ ही उन्होंने अपनी शिक्षा दीक्षा बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में होने का जिक्र किया है। उन्होंने सीधे राज्यपाल को संबोधित करते हुए कहा है कि प्रयागराज में माघ मेले में मौनी अमावस्या के स्नान के दौरान ज्योतिष पीठ ज्योर्तिमठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानन्द एवं उनके शिष्य, बटुक, ब्राह्मणों से स्थानीय प्रशासन ने मारपीट की। वृद्ध आचार्यों को मारते हुए बटुक ब्राह्मण को जमीन पर गिराकर एवं उसकी शिखा को पकड़कर घसीटकर पीटा गया और उसकी मर्यादा का हनन किया गया, चूंकि चोटी/शिखा ब्राह्मण, साधु संतों का धार्मिक एवं सांस्कृतिक प्रतीक है और मैं (अलंकार अग्निहोत्री) स्वयं ब्राह्मण वर्ण से हूं।
Edited By: Navin Rangiyal