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राहुल गांधी ने क्‍यों एक खबर की क्‍लिप शेयर कर कहा इसे ध्‍यान से पढ़ो, क्‍या है CBSE और OSM टेंडर से कनेक्‍शन?

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Rahul Gandhi
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपने एक्‍स अकाउंट पर एक अंग्रेजी अखबार की क्‍लिप शेयर कर CBSE में हुए टेंडर पर सवाल उठाए हैं। उन्‍होंने खबर शेयर कर कहा कि इसे ध्‍यान से पढ़ें।

राहुल ने क्‍या कहा एक्‍स पर : खबर के साथ राहुल गांधी ने जो टेक्‍स्‍ट शेयर किया है, उसमें उन्‍होंने कैप्‍शन में लिखा है कि CBSE ने OSM टेंडर के लिए तीन बार बोलियां मंगाईं। पहली बार कोई बोली नहीं आई। दूसरी बार कोई योग्य बोली लगाने वाला नहीं मिला। और आखिर में तकनीकी पैमानों को तब तक नीचे किया गया, जब तक कि COEMPT उन्हें पूरा न कर ले।
गलतियों पर लगने वाली पैनल्‍टी क्‍यों हटाई : स्कैनिंग रिज़ॉल्यूशन कम कर दिया गया। रोबोटिक स्कैनर की ज़रूरत खत्म कर दी गई। CMMI सर्टिफिकेशन का लेवल 5 से घटाकर लेवल 3 कर दिया गया। आंसर शीट में गलतियों पर लगने वाली पेनल्टी हटा दी गईं। TCS, जो भारत की सबसे बड़ी IT सर्विस कंपनी है, वह तीसरे राउंड में भी योग्य पाई गई। TCS हार गई। COEMPT- एक ऐसी कंपनी जिसका नाकामियों का रिकॉर्ड शानदार रहा है- जीत गई। आज CBSE के छात्र किस बात की शिकायत कर रहे हैं? खराब तरीके से स्कैन की गई आंसर शीट की। गायब पन्नों की। एक खराब इवैल्यूएशन पोर्टल की।

क्‍यों जल्‍दबाजी में किया लागू : शिक्षकों ने CBSE को चेतावनी दी थी कि OSM सिस्टम को पूरे देश में लागू करने से पहले, आगे की तैयारी के लिए कम से कम एक या दो साल की ज़रूरत है, फिर भी इसे जल्दबाजी में लागू कर दिया गया। मैं फिर पूछता हूं- कौन चाहता था कि COEMPT जीते? किसने पैमानों को धीरे-धीरे तब तक नीचे किया, जब तक कि यह कंपनी उन्हें पूरा न कर ले?

अयोग्‍य कंपनी के हाथों सौंप दिया बच्‍चों का भविष्‍य : प्रधान जी और CBSE कहते हैं कि "सही प्रक्रिया का पालन किया गया।" यह कोई जवाब नहीं है, यह कोई जवाबदेही नहीं है। सवाल यह है कि क्या यह कॉन्ट्रैक्ट ईमानदारी से उस सबसे अच्छी कंपनी को दिया गया था, जो यह काम सही तरीके से कर सकती थी। 18.5 लाख बच्चों का भविष्य एक ऐसी कंपनी के हाथों में सौंप दिया गया, जो नियमों में ढील दिए जाने के बाद ही योग्य हो पाई।

BJP के उन मंत्रियों से जो सवाल पूछने के लिए मुझ पर हमला कर रहे हैं- मैंने पहले दिन से ही एक स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग की है। इस जांच का दायरा CBSE से बढ़ाकर COEMPT को दिए गए हर कॉन्ट्रैक्ट तक किया जाए। हमारे युवा सच जानने के हकदार हैं।

चुप्‍पी सबकुछ बता रही है : और मोदी जी, CBSE की इस नाकामी पर आपकी चुप्पी और शिक्षा मंत्री के खिलाफ कोई कार्रवाई न करना, देश को यह बताता है कि आपको असल में किस बात की परवाह है - लाखों छात्रों के भविष्य की नहीं, बल्कि सिर्फ अपनी सरकार के बचे रहने की।
Edited By: Naveen R Rangiyal

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