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India-US Trade Deal : Donald Trump को भारत के आगे क्यों झुकना पड़ा, क्या है टैरिफ घटाने की वजह, रूस ने कहा- नहीं मिला कोई मैसेज

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वेबदुनिया न्यूज डेस्क

नई दिल्ली , मंगलवार, 3 फ़रवरी 2026 (23:50 IST)
India-US Trade Deal : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय उत्पादों पर लगने वाले कुल टैरिफ को 50% से घटाकर 18% करने का ऐलान किया है। भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से जिस ट्रेड डील का इंतजार था। सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने उसकी घोषणा कर दी। ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका ने भारत पर टैरिफ 50% से घटाकर 18% कर दिया है। ट्रम्प ने अप्रैल में 25% रेसिप्रोकल टैरिफ (जैसे को तैसा) लगाया था और रूस से तेल खरीदने के कारण अगस्त में 25% पेनल्टी का ऐलान किया था। इससे भारत पर कुल टैरिफ 50% हो गया था। भारत पर सिर्फ टैरिफ 18% ही लगेगा। अमेरिका रूसी तेल खरीदने के कारण लगा 25% टैरिफ हटा देगा। बस सवाल है कि वह कौनसी वजह रही जिसके कारण डोनाल्ड ट्रंप को भारत के आगे झुकना पड़ा। 
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डील की बड़ी शर्त 

इस डील की सबसे बड़ी शर्त यह है कि भारत अब रूस से तेल खरीदना बंद करेगा। ट्रंप ने स्पष्ट कहा कि पीएम मोदी इस बात पर सहमत हुए हैं कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए अब अमेरिका और संभावित रूप से वेनेजुएला जैसे देशों पर निर्भर रहेगा। इसके बदले में अमेरिका ने भारत पर लगाया गया 25% का अतिरिक्त 'पेनल्टी टैरिफ' हटा दिया है, जो रूसी तेल खरीदने के कारण लगाया गया था। ट्रंप के अनुसार भारत ने अपने यहां अमेरिकी उत्पादों पर लगने वाले टैरिफ और 'नॉन-टैरिफ' बाधाओं को जीरो तक लाने की प्रतिबद्धता जताई है।
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EU से समझौते के बाद बढ़ा दबाव

एक्सपर्ट्‍स का मानना है कि भारत ने हाल ही में यूरोपीय संघ (EU) और यूके जैसे देशों के साथ जो व्यापार समझौते (FTAs) किए हैं, उससे अमेरिका पर दबाव बढ़ा। अमेरिका को डर था कि अगर वह पीछे रहा, तो भारतीय बाजार में यूरोपीय कंपनियों का दबदबा बढ़ जाएगा।  

भारत ने क्या किया वादा

यह ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति के तहत एक बड़ी जीत मानी जा रही है, क्योंकि वे लंबे समय से भारत को 'टैरिफ किंग' कहते आए हैं। इससे ट्रंप को एक बड़ा व्यापारिक सौदा और रूस के खिलाफ कूटनीतिक जीत मिली, वहीं भारत को अपने निर्यातकों के लिए दुनिया का सबसे बड़ा बाजार फिर से सुलभ हो गया। भारत ने अमेरिका से 500 अरब डॉलर (लगभग 42 लाख करोड़ रुपए) मूल्य के सामान खरीदने का वादा किया है।
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क्या कहा डोनाल्ड ट्रंप 

डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि आज सुबह भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात करना मेरे लिए सम्मान की बात थी। हमने रूस-यूक्रेन युद्ध सहित कई मुद्दों पर चर्चा की। PM मोदी ने रूस से तेल की खरीद बंद करने पर सहमति जताई। भारत अब अमेरिका से ज्यादा तेल खरीदेगा। इसके अलावा वेनेजुएला से तेल खरीदने की संभावना पर भी बात हुई। इससे यूक्रेन में चल रहा युद्ध खत्म करने में मदद मिलेगी, जहां हर हफ्ते हजारों लोगों की जान जा रही है।प्रधानमंत्री मोदी की दोस्ती, सम्मान और उनके अनुरोध पर, हमने अमेरिका और भारत के बीच तुरंत एक ट्रेड डील पर सहमति बनाई है।
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इसके तहत अमेरिका भारत पर लगाया जाने वाला रेसिप्रोकल टैरिफ 25% से घटाकर 18% करेगा। भारत भी अमेरिका के खिलाफ अपने टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को घटाकर शून्य करने की दिशा में आगे बढ़ेगा। PM मोदी ने 'बाय अमेरिकन' को लेकर भी बड़ी प्रतिबद्धता जताई है। इसके तहत भारत अमेरिका से 500 अरब डॉलर से ज्यादा के ऊर्जा, तकनीक, कृषि, कोयला और अन्य उत्पाद खरीदेगा। मुझे पूरा भरोसा है कि भारत और अमेरिका के रिश्ते आगे और भी मजबूत होंगे।
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रूस ने कहा- हमें भारत से कोई मैसेज नहीं मिला 

इस रूस ने कहा कि उसे भारत से तेल खरीद रोकने का कोई संदेश नहीं मिला। क्रेमलिन ने दावा किया है कि उसे भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद रोकने को लेकर नई दिल्ली से कोई आधिकारिक सूचना या संदेश प्राप्त नहीं हुआ है। यह बयान ऐसे समय आया है,जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रूसी तेल की खरीद बंद करने और अमेरिका और संभवतः वेनेजुएला से अधिक तेल खरीदने पर सहमत हो गए हैं। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि हमें इस विषय पर भारत की ओर से अब तक कोई बयान या आधिकारिक सूचना नहीं मिली है।
 
रूसी मीडिया रिपोर्टों अनुसार  पेस्कोव ने यह भी दोहराया कि रूस भारत के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों को सभी संभावित क्षेत्रों में आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। रूस के ऊर्जा मंत्रालय ने भी कहा है कि उन्हें भारतीय रिफाइनरों से अनुबंध रद्द करने के संबंध में कोई सूचना नहीं मिली है।
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फिलहाल आयात जारी रहेगा

मीडिया खबरों के मुताबिक अमेरिका के साथ समझौते पर बनी सहमति के तहत भारत, रूस से कच्चे तेल की खरीद सीमित करेगा। इसके बदले व्यापार शुल्क कम किया जाएगा। सूत्रों ने यह जानकारी दी। उन्होंने यह भी बताया कि नायरा एनर्जी जैसी रिफाइनरियां, जिनके पास कोई दूसरा वैकल्पिक स्रोत नहीं है, फिलहाल आयात जारी रखेंगी। Edited by : Sudhir Sharma

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