भारतीय जनता पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष पद पर नितिन नबीन की नियुक्त कर मोदी-शाह की जोड़ी ने एक बार फिर सियासी पंडितों कौ चौंका दिया है। भाजपा अध्यक्ष पद की दौड़ में शामिल तमाम दिग्गजों को एक किनारे करते हुए पार्टी संसदीय बोर्ड ने जिस तरह से 45 साल के नितिन नबीन को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया उससे साफ है कि संघ और भाजपा अब तीसरी पीढ़ी के नेताओं के हाथों में पार्टी की कमान देने के लिए आगे बढ़ चुकी है। नए कार्यकारी अध्यक्ष के एलान से 48 घंटे पहले अंडमान में संघ प्रमुख मोहन भागवत और गृहमंत्री अमित शाह का एक साथ होना इस बात का साफ संदेश है कि नितिन नबीन के नाम पर संघ की सहमति ली गई।
नितिन नबीन का जन्म उसी साल हुआ था जिस साल भाजपा का गठन यानी साल 1980। ऐसे में नितिन नबीन की नियुक्ति यह संदेश साफ है कि पार्टी में जेनरेशन नेक्स्ट का दौर अब शुरू हो चुका है। भाजपा और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ अब 2047 को ध्यान में रखते हुए अपनी रणनीति तैयार कर रही है। यहीं कारण है कि मध्यप्रदेश में डॉ मोहन यादव, हरियाणा में नायाब सिंह सैनी, राजस्थान में भजनलाल शर्मा और छत्तीसगढ़ में विष्णु देव साय जैसे चेहरों को मुख्यमंत्री बनाकर भाजपा अब नेक्स्ट जेनरेशन की ओर आगे बढ़ चुकी है।
सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश-नीतिन नबीन की नियुक्ति से भाजपा ने जातिगत और सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश की है। नितिन नवीन कायस्थ समाज से आते हैं और भाजपा जिसे नब्बे के दशक में बनियों की पार्टी कहा जाता है उसके कार्यकारी अध्यक्ष की कमान नितिन नबीन सिन्हा के हाथों में होना, एक नहीं कई संकते है। दरअसल बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों में जब 90 के दशक में जातिवाद अपने चरम पर था, तब भाजपा को अगड़ी जातियों की पार्टी के तौर पर देखा जाता था और इस कालखंड में अगड़ी जातियां भाजपा से खूब जुड़ी और इन्हें पार्टी के कोर वोट बैंकं के तौर पर देखा गया।
नितिन नबीन सिन्हा उस बिहार से आते है जहां पर कायस्थ समाज की आबादी एक प्रतिशत से भी कम हो, लेकिन पार्टी ने अब उन्हें राजनीति के राष्ट्रीय फलक पर लाकर बड़ी जिम्मेदारी सौंपं दी है। जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ओबीसी वर्ग से आते है तब कायस्थ समाज से आने वाले नितिन नबीन सिन्हा को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर पार्टी ने जातिगत और सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश की है।
नेक्सट जेनरेशन को प्रतिनिधित्व-वर्तमान में पटना की बाकीपुर विधानसभा सीट से पांचवीं बार के विधायक और नीतीश सरकार में कैबिनेट मंत्री नितिन नबीन ने पिता के निधन के बाद 2006 के उपचुनाव से अपनी सियासी पारी का आगाज किया था। अगर देखा जाए तो नितिन नबीन का राजनीतिक सफर पूरी तरह भाजपा के भीतर ही विकसित हुआ है। उनके पिता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा की गिनती पार्टी के दिग्गज नेताओं के तौर पर होती थी। पिता के निधन के बाद उन्होंने पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट से राजनीति की कमान संभाली और वर्ष 2006 से लगातार पांच बार वहां से जीत दर्ज की।
भाजपा संगठन में नितिन नबीन को अनुशासित संगठनकर्ता, मजबूत रणनीतिकार और जमीनी स्तर से जुड़े नेता के रूप में जाना जाता है। नितिन नबीन ने अपनी राजनीति की शुरुआत भाजपा युवा मोर्चा से की, जहां राष्ट्रीय महामंत्री से लेकर बिहार प्रदेश अध्यक्ष और मध्यप्रदेश प्रभारी तक की जिम्मेदारियां निभाईं। यही संगठनात्मक अनुभव आगे चलकर उन्हें राज्य प्रभारी और फिर राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारियों तक ले गया।
2023 के विधानसभा चुनाव में छत्तीसगढ़ में प्रभारी के रूप में उनकी भूमिका को सराहा गया और राज्य मे तमाम दावों के बावजूद भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस का सफाया करने में नितिन नबीन ने प्रमुख भूमिका निभाई। छत्तीसगढ़ में बूथ स्तर का प्रबंधन, संगठन विस्तार और चुनावी तालमेल पर उनके फोकस का नतीजा निर्णायक जीत के रूप में सामने आया। 2006 से लगातार विधायक और एक भी चुनाव ना हारने के पीछे उनकी कड़ी मेहनत, जनता से कनेक्ट, साफ सुथरी छवि और भाजपा युवा मोर्चा से लेकर अब तक की जो संगठन क्षमता है जो उनकी व्यक्तिगत कमाई है। बिहार सरकार में वो मंत्री तो हैं ही साथ ही छत्तीसगढ़ में प्रभारी के तौर पर संगठन में भी उनकी प्रतिभा सबके सामने है और अब तो बीजेपी बंगाल विजय की तरफ कदम बढ़ा रही है ऐसे में पड़ोसी राज्य के एक कर्मठ युवा को कार्यकारी अध्यक्ष की कमान कोई चौंकाने वाला फैसला नहीं लगता है बल्कि एक सोची समझी रणनीति के तहत उठाया गया कदम है।