2029 लोकसभा चुनाव से पहले लागू हो सकता है महिला आरक्षण कानून, बजट सत्र में संशोधन बिल लाने की तैयारी में सरकार
महिला आरक्षण कानून लागू होने के बाद बढ़ जाएगी 273 लोकसभा सीट!
Publish Date: Tue, 24 Mar 2026 (10:20 IST)
Updated Date: Tue, 24 Mar 2026 (10:36 IST)
2029 के लोकसभा चुनाव में महिला आरक्षण को लागू करने के लिए मोदी सरकार संसद के बजट सत्र में नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण कानून) में बदलाव करने के तैयारी में है। इसको लेकर संसद के बजट सत्र में सरकार दो अहम विधेयक लाने की तैयारी में है। 2 अप्रैल को खत्म हो रहे संसद के बजट सत्र में सरकार नारी शक्ति वंदन एक्ट में बदलाव के लिए संविधान संशोधन विधेयक लाने के साथ परिसीमन एक्ट में संशोधन का विधयेक लाने जा रही है। इन दोनों विधयकों को लाने का उद्देश्य महिला आरक्षण को जनगणना और परिसीमन से पहले लागू करना है।
गौरतलब है कि महिला आरक्षण कानून पहले ही संसद से पारित हो चुका है, लेकिन इसके लागू होने की शर्त नई जनगणना और परिसीमन से जुड़ी हुई थी। मौजूदा महिला आरक्षण कानून में संसद तथा राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी सीटें सन 2034 से आरक्षित करने की बात कही गई है। अब सरकार 2029 के लोकसभा चुनाव में महिला आरक्षण को लागू करने के लिए इसमें अहम बदलाव करने की तैयारी में है। अगर संसद में मौजूदा बजट सत्र में यह दोनों अहम विधयेक पास हो जाते है तो अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव में महिला आरक्षण कानून लागू हो सकता है।
बढ़ जाएगी लोकसभा में सीटों की संख्या-महिला आरक्षण लागू करने के लिए लोकसभा में सीटों की संख्या बढ़ाने की तैयारी है। इसको लिए लोकसभा की वर्तमान सीटें 543 से बढ़ाकर 816 की जा सकती है, जिसमें 33 फीसदी यानि 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जा सकती है। महिला आरक्षण की नई व्यवस्था को 2011 की जनगणना के आधार पर लागू करने की योजना पर विचार चल रहा है। नए प्रवाधान में बड़े राज्यों में 33 प्रतिशत आरक्षण के हिसाब से लोकसभा सीटें बढ़ाई जाएंगी।
राज्यों की विधानसभाओं में महिला आरक्षण कानून को लागू करने की प्रक्रिया भी केंद्र के समान ही होगी। प्रत्येक राज्य की विधानसभा में कुल सीटों की 33 फीसदी यानि एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। इसमें एससी और एसी वर्ग की महिलाओं के लिए भी उसी कोटे के भीतर आरक्षण का प्रावधान है यानी एससी और एसटी के लिए आरक्षित सीटों में से भी एक-तिहाई सीटें उस वर्ग की महिलाओं के लिए होंगी।
गौरतलब है कि 2002 में 84वें संविधान संशोधन के कारण लोकसभाऔर विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ाने पर 2026 तक रोक लगी हुई है और इस रोक को संविधान संशोधन के ज़रिए ही हटाया जा सकता है, इसलिए सरकार महिला आरक्षण लागू करने और लोकसभा और विधानसभाओं में सीटों की संख्या बढ़ाने के प्रस्ताव, दोनों पर काम कर रही है।
हाल में हुए राज्यसभा चुनाव के बाद सरकार को राज्यसभा में स्पष्ट बहुमत हासिल हो चुका है। ऐसे में सरकार को महिला आरक्षण से संबंधित प्रस्तावित इन दोनों अहम बिलों को पास करने में कोई बडी मुश्किल नहीं आने वाली है।
सरकार के ओर से केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और संसदीय कार्यमंत्री किरिण रिजिजू महिला आरक्षण कानून को लेकर विपक्षी दलों के चर्चा कर आम सहमति बनाने की कोशिश कर रहे है।