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Chaturthi Vrat 2026: चतुर्थी का व्रत रखने से क्या होगा फायदा, जानिए महत्व

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WD Feature Desk

, मंगलवार, 3 फ़रवरी 2026 (12:05 IST)
Benefits of Chaturthi Vrat: चतुर्थी व्रत, विशेष रूप से भगवान गणेश से जुड़ा हुआ एक महत्वपूर्ण हिंदू व्रत है। यह व्रत खास तौर पर गणेश चतुर्थी, संकष्टी चतुर्थी, और विनायक चतुर्थी के दिन मनाया जाता है, जिसमें भक्त भगवान गणेश की पूजा करके उनके आशीर्वाद की प्राप्ति करते हैं। चतुर्थी व्रत का पालन करने से जीवन में सुख-शांति, समृद्धि, और मानसिक शांति प्राप्त होती है। इस वर्ष संकष्टी चतुर्थी व्रत 5 फरवरी 2025, दिन गुरुवार को रखा जा रहा है...ALSO READ: बृहस्पति का इस वर्ष 2026 में 3 राशियों में होगा गोचर, किस राशि को क्या मिलेगा, कौन होगा परेशान
 
  1. चतुर्थी व्रत का महत्व
  2. चतुर्थी व्रत रखने के फायदे
  3. बाधाओं से मुक्ति
  4. सुख-समृद्धि और सफलता
  5. मानसिक शांति और आत्मबल
  6. पापों का क्षय और पुण्य लाभ
  7. कैसे करें चतुर्थी का व्रत (संक्षेप में)
  8. चतुर्थी व्रत-FAQS
 

आइए सरल भाषा में जानते हैं इसके फायदे और महत्व...

 

चतुर्थी व्रत का महत्व

चतुर्थी तिथि भगवान गणेश की प्रिय तिथि मानी जाती है। चतुर्थी व्रत भगवान गणेश की पूजा के लिए एक प्रमुख अवसर है। गणेश को ज्ञान, सिद्धि, और समृद्धि का देवता माना जाता है। इस दिन उनकी पूजा से पापों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन व्रत रखने से विघ्नहर्ता गणेश की कृपा प्राप्त होती है। चतुर्थी व्रत एक अत्यंत महत्वपूर्ण व्रत है जो न केवल आध्यात्मिक लाभ देता है, बल्कि जीवन को भी सकारात्मक दिशा में बदलने में मदद करता है।
 

चतुर्थी व्रत रखने के 5 फायदे

 

1. बुद्धि और एकाग्रता में वृद्धि

 
मान्यता है कि गणेश जी बुद्धि के देवता हैं। यह व्रत रखने से पढ़ाई और काम में फोकस बढ़ता है तथा निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होती है। 
 

2. बाधाओं से मुक्ति

 
इस व्रत से जीवन में आ रही रुकावटें दूर होती हैं तथा नए काम की शुरुआत के लिए यह व्रत शुभ माना जाता है।
 

3. सुख-समृद्धि और सफलता

 
चतुर्थी व्रत से आर्थिक परेशानियों में कमी आती है और धन, करियर तथा व्यापार में उन्नति के योग बनते हैं।
 

4. मानसिक शांति और आत्मबल

 
चतुर्थी उपवास से मन और इंद्रियों पर नियंत्रण आता है, तनाव, चिंता और नकारात्मक सोच कम होती है। 
 

5. पापों का क्षय और पुण्य लाभ

 
शास्त्रों के अनुसार यह व्रत पापों के नाश में सहायक है, विशेष रूप से संकष्टी चतुर्थी संकटों से मुक्ति दिलाने वाली मानी जाती है। 
 

कैसे करें चतुर्थी का व्रत (संक्षेप में)

 
सुबह स्नान कर गणेश जी की पूजा करें। 'ॐ गं गणपतये नमः' मंत्र का जाप करें। दिन भर उपवास या फलाहार रखें। यदि आपने संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा हैं तो चतुर्थी की शाम को चंद्र दर्शन के बाद व्रत खोलें। 
 

चतुर्थी व्रत-FAQS

 
1. चतुर्थी व्रत कब रखा जाता है?
उत्तर: चतुर्थी व्रत हर महीने की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है, लेकिन संकष्टी चतुर्थी और विनायक चतुर्थी विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। संकष्टी चतुर्थी आमतौर पर रविवार या मंगलवार को होती है, जबकि विनायक चतुर्थी को गणेश जी की पूजा के रूप में मनाया जाता है। गणेश चतुर्थी विशेष रूप से बड़े धूमधाम से मनाई जाती है।
 
2. चतुर्थी व्रत किसके लिए किया जाता है?
उत्तर: चतुर्थी व्रत भगवान श्रीगणेश की पूजा के लिए किया जाता है। यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए है जो विघ्नों को दूर करना चाहते हैं, बुद्धि और विवेक में वृद्धि चाहते हैं, या फिर समृद्धि और सुख की प्राप्ति चाहते हैं।
 
3. क्या चतुर्थी व्रत में कोई विशेष पूजा सामग्री की आवश्यकता होती है?
उत्तर: चतुर्थी व्रत के लिए गणेश जी की मूर्ति या चित्र, पानी, पत्तियां, फूल, लड्डू या मोदक, दीपक और धूप की आवश्यकता होती है। कुमकुम और चंदन से भी पूजा की जाती है।
 
4. चतुर्थी व्रत के दौरान चंद्र दर्शन क्यों जरूरी है?
उत्तर: संकष्टी चतुर्थी में विशेष रूप से चंद्र दर्शन का महत्व है। उपवास समाप्त करने से पहले चंद्रमा को देखना और उसे अर्घ्य देना शुभ माना जाता है। यह व्रत को पूर्ण करने का सही तरीका होता है और माना जाता है कि इस समय गणेश जी का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
 
अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: संकटों का अंत और सुखों का आरंभ: क्यों खास है चतुर्थी का उपवास?

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