Publish Date: Wed, 08 Apr 2026 (14:41 IST)
Updated Date: Wed, 08 Apr 2026 (14:58 IST)
भारतीय कैलेंडर मुख्य रूप से सौर और चंद्र पद्धतियों पर आधारित है। मेष संक्रांति (सूर्य का मेष राशि में प्रवेश) भारतीय सौर नववर्ष का प्रतीक है, जो 2026 में 14 अप्रैल को मनाया जाएगा। कुछ राज्य मेष संक्रांति के अगले दिन को नववर्ष का पहला दिन मानते हैं। इसलिए 15 अप्रैल को उनके यहां नववर्ष का स्वागत होगा। भारत के 8 राज्यों में मेष संक्रांति से नया वर्ष प्रारंभ होता है।
प्रमुख क्षेत्रीय सौर नववर्ष इस प्रकार हैं:-
1. पंजाब और हरियाणा (बैसाखी): यह सिख नववर्ष और खालसा पंथ के स्थापना दिवस के रूप में मनाया जाता है।
2. पश्चिम बंगाल (पोइला बैशाख): इसे 'नोबोबर्षो' कहते हैं, जिसकी नींव राजा शोशंगको ने रखी थी।
3. तमिलनाडु (पुथंडु): यह तमिल कैलेंडर के 'चिथिरई' महीने की पहली तारीख से शुरू होता है।
4. केरल (विषु/कोल्लवर्षम्): यह पारंपरिक मलयालम सौर कैलेंडर है। यहाँ आधिकारिक नववर्ष 'चिंगम' (अगस्त) से भी मनाया जाता है।
5. ओडिशा (पना संक्रांति): इसे 'महाविषुव संक्रांति' भी कहते हैं, जो सूर्य की विषुव रेखा पर स्थिति को दर्शाता है।
6. असम (बोहाग बिहू): असमिया कैलेंडर 'भास्कराब्द' पूरी तरह सौर गणना पर आधारित है।
7. उत्तराखंड (बिखोती): यहाँ का पंचांग सौर गणना पर आधारित है और मेष संक्रांति वर्ष का पहला दिन है।
8. मिथिला, बिहार (जुड़ शीतल): इसमें बुजुर्ग छोटों पर जल छिड़ककर सुख-शांति का आशीर्वाद देते हैं।
संक्षेप में: उत्तर भारत में विक्रम संवत (चंद्र आधारित) और दक्षिण भारत में शक संवत (सौर आधारित) अधिक प्रचलित हैं। सौर नववर्ष के नाम अलग हैं, लेकिन ये सभी मेष संक्रांति के समय ही मनाए जाते हैं।