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अनंत सिंह को दुलारचंद यादव मर्डर केस में मिली जमानत, MLA की संन्यासी से बाहुबली बनने की कहानी

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anant singh
मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह को गुरुवार को पटना हाईकोर्ट से जमानत मिल गई। वे दुलारचंद यादव मर्डर केस में पटना के बेऊर जेल में बंद थे। 4 माह पहले ही उन्हें पुलिस ने गिरफ्तार किया था। मोकामा विधायक अनंत सिंह जमानत मिलने के बाद जल्द ही जेल से बाहर आ सकते हैं। अनंतसिंह ने अभी हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव के दौरान जेल से आकर वोट दिया था।

विधानसभा चुनाव से पहले हुई थी हत्या

गौरतलब है कि दुलारचंद यादव की हत्या 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान हुई थी। इसके बाद अनंत सिंह इस मामले में आरोपी बनाए गए थे। जेल में रहते हुए उन्हें चुनाव में जीत मिली थी. उनसे पहले उनकी पत्नी नीलम देवी मोकामा से विधायक थीं।

कौन थे दुलारचंद यादव

बाढ़ में रहने वाले दुलारचंद यादव का जन्म मोकामा के तारतर गांव में हुआ था। इसी गांव में उनकी हत्या हुई। 90 के दशक में वो राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के संपर्क में आए और मोकामा विधानसभा से चुनाव भी लड़ा था। हालांकि इस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। वे बाहुबली अनंतसिंह के भी करीबी रहे हैं लेकिन 2025 चुनाव में पीयूष प्रियदर्शी का समर्थन कर रहे थे। बताया जा रहा है कि इसी वजह से अनंतसिंह उनसे नाराज चल रहे थे।
 
जब पीयूष प्रियदर्शी की गाड़ियों का काफिल अनंत सिंह के काफिले के पास गुजरा तो अनंत सिंह के लोगों ने एकाएक हमला कर दिया। दुलारचंद यादव को पहले लाठियों से पीटा गया और फिर गोली मारकर हत्या कर दी गई।

संन्यासी से कैसे बिहार का बाहुबली बना अनंत सिंह

चुनावी रण में बाहुबल के सहारे सियासत का ‘अनंत’ सफर जारी रखने वाले अनंत सिंह पर कुल 38 केस दर्ज है। नब्बे के दशक में अनंत सिंह का परिवार भले ही बिहार में अपराध की दुनिया के साथ चुनावी राजनीति में तेजी से आगे बढ़ रहा हो लेकिन चार भाईयों में सबसे छोटा अनंत सिंह इन सबसे दूर वैराग्य लेकर पटना से कोसों दूर हरिद्धार में साधु बन ईश्वर की आरधना में लीन हो गया था।
 
लेकिन कहते है न कि होइहि सोइ जो राम रचि राखा..अनंत सिंह के जीवन पर उक्त लाइन एकदम सटीक बैठती है। सियासी अदावत में अनंत सिंह के बड़े भाई बिरंची सिंह की दिनदहाड़े हत्या कर दी जाती है। भाई की हत्या की खबर सुनकर अनंत सिंह का खून खौल उठता है और भाई के हत्यारों को मौत के घाट उतारने के लिए वह वापस बिहार लौटता है और अपने भाई की हत्या का बदला ले लेता है।
 
भाई के हत्यारे को मौत के घाट उतारने के साथ ही अनंत सिंह ने अपराध की दुनिया का बेताज बदशाह बढ़ने की ओर अपने कदम बढ़ा दिए और वह देखते ही देखते बिहार की राजनीति में भूमिहारों का सबसे बड़ा चेहरा बन बैठा।

राजनीति में अनंत सिंह की एंट्री

अपराध की दुनिया में अनंत सिंह का बढ़ता कद अब बिहार के सबसे बड़े बाहुबली नेता सूरजभान को खटकने लगा था। सूरजभान उस बाहुबली नेता का नाम था जिसने साल 2000 के विधानसभा चुनाव में अनंत सिंह के भाई दिलीप सिंह को मोकामा सीट से मात दी थी। विधायक बनने के बाद 2004 में सूरजभान बलिया सीट से सांसद बन गया। सूरजभान के सांसद बनने के बाद अब अनंत सिंह पर पुलिसिया प्रेशर बढ़ने लगा। 2004 में बिहार एसटीएफ ने अनंत सिंह के घर को घेर कर उसका एनकाउंटर करने की कोशिश की लेकिन अनंत सिंह बच निकला। 
 
अनंत सिंह अब तक इस बात को अच्छी तरह जान चुका था कि सूरजभान से मुकाबला करने के लिए उसको राजनीति के मैदान में उतरना ही पड़ेगा जिसके बाद वह साल 2005 के चुनाव में पहली बार मोकामा सीट से नीतीश की पार्टी जेडीयू के टिकट पर चुनावी मैदान में उतरा और अपराधी से माननीय विधायक जी बन गया। 
edited by : Nrapendra Gutpa 

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