Controversy over Tantya Mama's statue : मध्य प्रदेश के खरगोन में जननायक टंट्या मामा की प्रतिमा को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। बिस्टान नाका, जो अब मूर्ति लगने के बाद टंट्या मामा चौक के नाम से जाना जाता है, पर स्थापित टंट्या मामा की प्रतिमा मार्बल या धातु की होने के बजाय फाइबर की निकली। यहां कागजों में धातु या संगमरमर की मूर्ति दिखाकर मौके पर सस्ती फाइबर की प्रतिमा स्थापित कर दी गई।
हैरानी की बात यह रही कि करीब 10 लाख रुपए के टेंडर के बावजूद मात्र कुछ हजार रुपए की फाइबर मूर्ति तिराहे पर लगा दी गई और उसका लोकार्पण भी विधायक और कलेक्टर द्वारा कर दिया गया। हालांकि लोकार्पण के बाद शिकायतें सामने आईं कि प्रतिमा निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है।
मामला उजागर होते ही यह साफ हो गया कि प्रतिमा स्थापना में गंभीर लापरवाही और भ्रष्टाचार हुआ है। जांच में खुलासा होने के बाद जिला कलेक्टर ने सख्त कदम उठाते हुए मूर्ति को बदलने और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई के निर्देश दिए। नगरपालिका ने तत्काल ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट कर दिया है और अब दोबारा टेंडर जारी कर धातु की प्रतिमा लगाने का फैसला लिया गया है।
वहीं विपक्ष ने इसे जननायक टंट्या मामा का अपमान बताते हुए अधिकारियों और इंजीनियरों पर भी सख्त कार्रवाई की मांग की है। यह मामला न सिर्फ सरकारी कामों में पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है, बल्कि जनभावनाओं से जुड़े मामलों में जिम्मेदारी तय करने की जरूरत भी दिखाता है।
गौरतलब है कि दिसंबर 2022 में मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री ने बिस्टान नाका चौराहे का नाम टंट्या मामा भील के नाम पर करने और वहां उनकी प्रतिमा स्थापित करने की घोषणा की थी। इसी क्रम में 15 नवंबर 2025 को जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर नगर पालिका खरगोन द्वारा पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत मूर्ति का लोकार्पण किया गया था।
Edited By : Chetan Gour