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बकरीद से पहले शुभेंदु सरकार के नोटिफिकेशन पर रोक लगाने से कलकत्ता हाईकोर्ट का इनकार, जानिए कोर्ट ने क्या कहा

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Calcutta High Court
कलकत्ता हाईकोर्ट ने गुरुवार को सार्वजनिक स्थानों पर पशु वध पर लगे प्रतिबंध को बरकरार रखते हुए पश्चिम बंगाल सरकार के उस आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। इसमें ईद-उल-अजहा से पहले पशु वध को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए गए थे।
जस्टिस सुजॉय पॉल और जस्टिस पार्थ सारथी सेन की खंडपीठ ने सार्वजनिक स्थानों पर गाय और भैंसों के वध पर सख्त रोक लगाने का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि खुले सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी पशु का वध पूरी तरह प्रतिबंधित है।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि गाय और भैंस सहित किसी भी पशु का खुले सार्वजनिक स्थान पर वध पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके अलावा, गाय की कुर्बानी ईद-उल-अजहा त्योहार का अनिवार्य हिस्सा नहीं है और न ही इस्लाम में इसे धार्मिक आवश्यकता माना गया है। अदालत ने इस दौरान सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले ‘मो. हनीफ कुरैशी बनाम बिहार राज्य’ का भी उल्लेख किया।
 
 यह मामला उस समय सामने आया जब तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा समेत कई याचिकाकर्ताओं ने पश्चिम बंगाल सरकार की हालिया अधिसूचना को हाईकोर्ट में चुनौती दी। याचिकाकर्ताओं ने पश्चिम बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम, 1950 की धारा 12 के तहत धार्मिक अनुष्ठानों के लिए छूट की मांग की थी। अदालत ने कहा कि राज्य सरकार को 1950 के कानून की धारा 12 के तहत मांगी गई छूट पर निर्णय लेना चाहिए।
दरअसल, 13 मई को पश्चिम बंगाल सरकार ने एक अधिसूचना जारी कर बिना 'फिटनेस सर्टिफिकेट' के पशु वध पर रोक लगाने के निर्देश दिए थे। सरकार ने चेतावनी दी थी कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
 
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया था कि खुले सार्वजनिक स्थानों पर पशु वध पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में कई याचिकाएं दायर की गई थीं, जिनमें पश्चिम बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम, 1950 के तहत जारी दिशा-निर्देशों को चुनौती दी गई थी। Edited by : Sudhir Sharma

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