उत्तरप्रदेश में नोएडा के सेक्टर-150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त रुख अपनाते हुए नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) लोकेश एम को तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया है। इसके साथ ही पूरे मामले की गहराई से जांच के लिए 3 सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) के गठन के आदेश दिए हैं।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर गठित एसआईटी का नेतृत्व मेरठ की मंडलायुक्त करेंगी। टीम में मेरठ जोन के एडीजी और लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता को भी शामिल किया गया है। मुख्यमंत्री ने एसआईटी को निर्देश दिया है कि वह अगले 5 दिनों के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट शासन को सौंपे।
मीडिया खबरों के मुताबिक वह लगभग 2 घंटे तक पानी के बीच फंसी अपनी कार पर खड़ा रहकर सहायता का इंतजार करता रहा। इस दौरान उसकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई। पुलिस सूत्रों के अनुसार लंबे समय तक ठंडे पानी के संपर्क में रहने, अत्यधिक ठंड और मानसिक तनाव के कारण युवराज की तबीयत बिगड़ गई।
विशेषज्ञ स्तर पर भी होगी जांच
योगी सरकार द्वारा गठित की गई एसआईटी का नेतृत्व मेरठ जोन के अपर पुलिस महानिदेशक (ADG) करेंगे। टीम में मेरठ मंडल के मंडलायुक्त को भी शामिल किया गया है, ताकि प्रशासनिक और तकनीकी दोनों पहलुओं की बारीकी से जांच हो सके. इसके साथ ही लोक निर्माण विभाग (PWD) के चीफ इंजीनियर को भी एसआईटी का सदस्य बनाया गया है। इसमें यदि घटना में किसी तरह की निर्माण खामी या तकनीकी लापरवाही सामने आती है तो उसकी विशेषज्ञ स्तर पर जांच हो सके।
क्या सामने आया पोस्टमार्टम में
नोएडा में 27 वर्षीय इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत के मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद कई महत्वपूर्ण तथ्य उजागर हुए हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक युवराज की मौत दम घुटने से हुई है। इसके साथ ही रिपोर्ट में हार्ट फेलियर/कार्डियक अरेस्ट को भी मौत का कारण बताया गया है। मीडिया खबरों के मुताबिक घटना शनिवार रात की है जब नोएडा में कड़ाके की सर्दी पड़ रही थी। जिस बेसमेंट में युवराज की कार गिर गई थी, वहां पानी भरा हुआ था और वह पानी बर्फ की तरह ठंडा बताया जा रहा है। हादसे के बाद युवराज काफी देर तक ठंडे पानी में भीगा रहा। Edited by : Sudhir Sharma