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योग का वैश्विक केंद्र बनेगी देवभूमि, 38वें अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव में बोले सीएम धामी

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38th International Yoga Festival
38th International Yoga Festival: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ऋषिकेश स्थित परमार्थ निकेतन में आयोजित 38वें अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड को विश्व की योग राजधानी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है और इसके लिए 'योग नीति 2025' लागू की गई है।

योग महोत्सव की मुख्य बातें

महोत्सव को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि योग भारत की पवित्र भूमि से उदित वह दिव्य चेतना है, जिसने आज पूरे विश्व को स्वस्थ, संतुलित और सकारात्मक जीवन जीने की प्रेरणा दी है। आज विश्व के करोड़ों लोग योग के माध्यम से शारीरिक सुदृढ़ता, मानसिक स्थिरता और आध्यात्मिक संतुलन प्राप्त कर रहे हैं। देवभूमि उत्तराखंड सदियों से योग और अध्यात्म की तपोभूमि रही है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए हमारी सरकार नई योग नीति के माध्यम से योग को जन-जन तक पहुंचाने और इसे वैश्विक स्तर पर और अधिक सशक्त पहचान दिलाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
 
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से आज दुनिया के 180 से अधिक देशों में योग का अभ्यास किया जा रहा है। उन्होंने परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती और साध्वी भगवती सरस्वती की उपस्थिति में योग के महत्व पर प्रकाश डाला। इस महोत्सव में देश-विदेश के प्रतिष्ठित योगाचार्य, प्रशिक्षक और पर्यटक हिस्सा ले रहे हैं।

बजट में बड़े प्रावधान और सरकारी योजनाएं

मुख्यमंत्री ने राज्य में आयुष और योग के विस्तार के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाओं की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि  गढ़वाल और कुमाऊं मंडल में एक-एक 'स्पिरिचुअल इकोनॉमिक जोन' स्थापित किया जाएगा। इसके लिए इस वित्तीय वर्ष के बजट में 10 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
 
उन्होंने कहा कि योग एवं ध्यान केंद्र विकसित करने के लिए 20 लाख रुपए तक की सब्सिडी और शोध कार्यों के लिए 10 लाख रुपए तक के अनुदान की व्यवस्था की गई है। प्रदेश में पांच नए योग हब स्थापित किए जा रहे हैं। प्रदेश में 300 से अधिक आयुष्मान आरोग्य केंद्र संचालित हैं। साथ ही, प्रत्येक जनपद में 50 एवं 10 बेड वाले आयुष चिकित्सालयों की स्थापना की जा रही है।

चिकित्सा और परामर्श पर जोर

महोत्सव के दौरान हठ योग, राज योग, कर्म योग और भक्ति योग के साथ-साथ ध्यान, प्राणायाम और प्राकृतिक चिकित्सा से जुड़े सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि ई-संजीवनी पोर्टल के माध्यम से विशेषज्ञों द्वारा आयुष परामर्श भी प्रदान किया जा रहा है। सीएम ने कहा कि उत्तराखंड की नैसर्गिक सुंदरता और शुद्ध वातावरण योग साधना के लिए विश्व में सबसे अनुकूल है।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala 
 

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