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कानपुर के बर्न वार्ड में हुई शादी, दर्द में भी दूल्हे ने नहीं छोड़ा दुल्हन का साथ

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Kanpur Hospital Wedding
घाटमपुर की एक घटना फिर से मिसाल बन गई है, यहां पर एक घर में शादी की तैयारी चल रही थी, दुल्हन की हल्दी रस्म में रिश्तेदार शामिल होने आयें हुए थे। अचानक से आग लग गई जिसमें 12 लोग झुलस गए, जिसमें दुल्हन भी शामिल थी। झुलसी अवस्था में मंडप की जगह दुल्हन अस्पताल के बेड पर पहुंच गई। दूल्हे के घर खबर पहुंची, शादी आगे बढ़ाने की बात रखी गई, तभी दूल्हे विकास ने आगे बढ़कर इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया और तय किया शादी 14 मई को ही होगी, मंडप की जगह अस्पताल का बेड शादी का गवाह बनेगा। अस्पताल में शादी का यह दृश्य 'विवाह' फिल्म के कथानक को हकीकत में जीवंत कर गया। 
14 मई में कानपुर के जगन्नाथ गांव में जगदीश की बेटी श्वेता और विकास की शादी तय हुई। श्वेता की शादी की तैयारियां पूरे उत्साह-उमंग के साथ चल रही थीं। घर आंगन में हल्दी का रंग चढ़ता दिखाई दे रहा था, ढोलक की थाप पर महिलाएं मंगल गीत गाकर हंसी-ठिठोली कर रही थे और बिटिया पक्ष के रिश्तेदार शादी की रौनक में डूबे हुए थे। लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर था। हल्दी रस्म के दौरान अचानक से गैस की पाइप ने आग पकड़ ली, आग के बुझाने के प्रयास में तेल से भरी कहाड़ी पलट गई और देखते ही देखते आग भड़क उठी। चारों तरफ अफरा-तफरी के साथ चीख-पुकार सुनाई देने लगी। कुछ ही क्षणों में खुशियों से भरी ढोलक की थाप की जगह घर दर्द से भरी गूंज सुनाई दी और माहौल बेचैनी में बदल गया।
इस हादसे में दुल्हन श्वेता समेत 12 लोग झुलस गए। गांव वालों और परिजनों ने बिना समय गंवाए सभी को अस्पताल पहुंचाया। गंभीर रूप से घायल श्वेता को कानपुर के मिशिका अस्पताल के बर्न वार्ड में भर्ती कराया गया। जिस घर में शहनाइयां बजनी थीं, वहां अब सन्नाटा और चिंता पसरी हुई थी। परिवार को लगने लगा कि शादी अब टालनी पड़ेगी। लेकिन युवा विकास ने इस कहानी ने ऐसा मोड़ दिया कि हर शख्स हतप्रभ रह गया और वहां मौजूद हर किसी की आंखें नम कर दीं।
 
जब दूल्हे विकास सिंह के घर हादसे की खबर पहुंची, तो वह तुरंत अस्पताल पहुंचा। बर्न वार्ड में दर्द से जूझ रही श्वेता को देखकर विकास की आंखें भर आईं। परिवार और रिश्तेदारों ने उसे समझाया कि श्वेता के ठीक होने के बाद शादी कर ली जाएगी, लेकिन आधुनिक सोच रखने वाले विकास ने जो कहा, उसने वहां मौजूद हर इंसान का दिल छू लिया।
 
उसने शांत लेकिन दृढ़ आवाज में कहा, “अगर मुश्किल समय में ही साथ छोड़ दूं, तो फिर इस रिश्ते और प्यार का मतलब क्या रह जाएगा? शादी सिर्फ खुशियों में साथ निभाने का नाम नहीं है।” विकास के इन शब्दों ने अस्पताल के माहौल को भावुक कर दिया। वर-वधू के इस फैसले का अस्पताल प्रबंधन ने स्वागत किया और तय हुआ कि शादी अस्पताल में ही होगी।
 
कानपुर के जाजमऊ स्थित मिशिका अस्पताल का बर्न वार्ड का दृश्य बदल गया। जहां दवाइयों की गंध और मशीनों की आवाजें थीं, वहां फूल सजाए गए। अस्पताल का कमरा एक छोटे-से मंडप में बदल गया। बेड पर लेटी श्वेता के सिर पर लाल चुनरी पहनाते हुए मंत्रों की आवाज के बीच जब विकास ने कांपते हाथों से श्वेता की मांग में सिंदूर भरा, तो वहां मौजूद दोनों के परिवार, डॉक्टर, नर्सें और स्टाफ भी इस भावुक पल के गवाह बन गए।
 
तालियों, आंसुओं और दुआओं के बीच यह शादी सिर्फ एक रस्म नहीं रही, बल्कि इंसानियत की मिसाल बन गई।  जिसने लोगों को रिश्तों का अहसास दिलाया कि विवाह दो लोगों के बीच भरोसे, समर्पण और प्रेम का नाम है, जो मुश्किल वक्त में भी हाथ नहीं छोड़ता। Edited by : Sudhir Sharma

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