Hanuman Chalisa

Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia

कानपुर में हाई-वोल्टेज ड्रामा, ITBP के हथियारबंद कमांडोज ने कमिश्नरेट घेरा, मां का कटा हाथ लेकर न्याय मांगने पहुंचा था जवान

Advertiesment
Kanpur Police Commissionerate
Kanpur Police Commissionerate: यूपी के कानपुर में शनिवार 23 मई को उस समय बेहद तनावपूर्ण और अभूतपूर्व स्थिति बन गई, जब भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के 40 से 50 हथियारबंद जवानों और अधिकारियों ने अचानक कानपुर पुलिस कमिश्नरेट कार्यालय का घेराव कर दिया। एक घंटे तक पूरा कमिश्नरेट परिसर सैन्य छावनी में तब्दील नजर आया और यूपी पुलिस के हाथ-पांव फूल गए। यह पूरा मामला आईटीबीपी के एक जवान की मां के साथ हुई कथित मेडिकल लापरवाही और उस पर कानपुर पुलिस व स्वास्थ्य विभाग की ढिलाई से जुड़ा हुआ है।

क्यों भड़का ITBP जवानों का गुस्सा?

मूल रूप से फतेहपुर के अलीमऊ गांव के रहने वाले विकास सिंह ITBP में कॉन्स्टेबल के पद पर तैनात हैं और वर्तमान में महाराजपुर आईटीबीपी कैंप में पोस्टेड हैं। विकास की 56 वर्षीय मां निर्मला देवी को सांस और पेट दर्द की तकलीफ थी। उन्हें टाटमिल स्थित कृष्णा हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। आरोप है कि इलाज के दौरान डॉक्टरों ने गलत इंजेक्शन लगा दिया, जिससे महिला का हाथ काला पड़ गया और इन्फेक्शन पूरी तरह फैल गया। मां की जान बचाने के लिए डॉक्टरों को उनका दाहिना हाथ काटना पड़ा।
 
इससे पहले, पीड़ित जवान विकास इंसाफ के लिए अपनी मां का कटा हुआ हाथ एक थर्माकोल के बॉक्स में रखकर पुलिस कमिश्नर दफ्तर पहुंच गया था, जिसे देख अधिकारी भी दंग रह गए। जवान का आरोप है कि वह पिछले कई दिनों से थानों और पुलिस अधिकारियों के चक्कर काट रहा था, लेकिन रसूखदार अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई या एफआईआर दर्ज नहीं की जा रही थी।

कमिश्नरेट घेरे जाने की सच्चाई

शनिवार को जब जवान की शिकायत पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो आईटीबीपी के अधिकारी और भारी संख्या में हथियारबंद कमांडोज गाड़ियों में भरकर सीधे पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंच गए। परिसर में अचानक इतनी बड़ी संख्या में केंद्रीय बल के जवानों को देख 'कमिश्नरेट पर कब्जे और घेराव' की अफवाह फैल गई। हालांकि, बाद में आईटीबीपी के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह कोई कब्जा नहीं था, बल्कि वे अपने साथी जवान को न्याय दिलाने और पुलिस के सामने अपनी बात मजबूती से रखने आए थे।

कमिश्नर ने दिए दोबारा जांच के आदेश

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस आयुक्त (CP) रघुबीर लाल और अपर पुलिस आयुक्त (लॉ एंड ऑर्डर) विपिन ताडा ने तुरंत आईटीबीपी के कमांडेंट और अधिकारियों के साथ करीब एक घंटे तक उच्च स्तरीय बैठक की। इस मामले में मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) की टीम ने जो शुरुआती जांच रिपोर्ट सौंपी थी, उसमें अस्पताल की लापरवाही को स्पष्ट नहीं किया गया था और कथित तौर पर अस्पताल को बचाने की कोशिश की गई थी। पुलिस कमिश्नर ने उस लचर रिपोर्ट को खारिज कर दिया।
 
अपर पुलिस आयुक्त विपिन ताडा ने बताया कि पीड़ित जवान जिन बिंदुओं पर असंतुष्ट था, उन्हें शामिल करते हुए सीएमओ को दोबारा (पुनः) जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि जांच रिपोर्ट आते ही दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त धाराओं में एफआईआर दर्ज कर जेल भेजा जाएगा। इस आश्वासन के बाद आईटीबीपी के जवान वहां से रवाना हुए। इस  बीच, यह भी खबर है कि न्याय न मिलने पर पीड़ित परिवार अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मुलाकात करने की तैयारी में है।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala 
 

Share this Story:

Follow Webdunia Hindi

अगला लेख

सीधी में 3 बच्चों की मौत: सीएम डॉ. यादव ने जताया दुख, मृतकों के परिजनों को दी 6-6 लाख रुपये की आर्थिक सहायता