Publish Date: Fri, 22 May 2026 (12:33 IST)
Updated Date: Fri, 22 May 2026 (12:58 IST)
लखनऊ में राज कंस के किले पर नमाज पर बवाल मचा हुआ है। पासी समाज का दावा है कि ये महाराजा राजपासी राजा कंस का किला था। इसके अंदर स्थित शिव मंदिर में पूजा अर्चना हुआ करती थी। आज यहां नमाज पढ़ी जा रही है। पासी समाज के नेता सूरज पासवान ने सीएम योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर किले में फिर पूजा शुरू कराने की मांग की है।
दावा किया जा रहा है कि कांसमंडी के किले और उसके अंदर बने शिव मंदिर को मुस्लिमों ने कब्जा कर लिया है। हर शुक्रवार को मुस्लिम समाज के लोग किले में नमाज पढ़ने आते हैं। किले के अंदर नई कब्र बना दी गई हैं और बाहर उर्दू में शिलापट लगा दिया गया है।
क्या कहते हैं मुस्लिम?
मुस्लिम समाज के लोगों का का कहना है कि सरकारी दस्तावेज में यह स्थान मकबरा और मस्जिद है। मौलाना सूफियान ने दावा किया हैं कि आजकल यह ट्रेंड बन गया है कि मस्जिद को मंदिर बनाना। पहले संभल, फिर भोजशाला और अब मलिहाबाद में इस प्रकार के दावे किए जा रहे हैं।
कौन है राजा कंस पासी
महाराजा कंस पासी अवध क्षेत्र का प्रतापी राजपासी राजा था। उन्होंने इस क्षेत्र पर वर्ष 980 से वर्ष 1031 तक राज किया था। उनका साम्राज्य लखनऊ के मलिहाबाद, काकोरी से लेकर उन्नाव, संडीला और हरदोई तक फैला हुआ था। उन्होंने विदेशी आक्रामणकारियों से लोहा लिया था।
लखनऊ गजेटियर के अनुसार, 11वीं शताब्दी के अंतिम दौर में काकोरी और आसपास का क्षेत्र राजा कंसा के प्रभाव में था। जब सालार मसूद गाजी दिल्ली से अवध क्षेत्र में बढ़ा, तो राजा कंस ने उसका सामना किया। कांसमंडी और काकोरी क्षेत्र को सालार मसूद और स्थानीय राजाओं के संघर्ष का प्रमुख केंद्र माना गया है। कांसमंडी के आसपास सालार मसूद के दो सेनापति सैय्यद हातिम और खातिम को राजपासी राजा कंस ने मौत के घाट उतार दिया था।
edited by : Nrapendra Gupta
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