Publish Date: Mon, 30 Mar 2026 (21:10 IST)
Updated Date: Wed, 01 Apr 2026 (21:12 IST)
शास्त्री नगर, जयपुर स्थित 'अखिल भारतवर्षीय खंडेलवाल वैश्य महासभा भवन' में समाज के आराध्य संत सुंदरदास जी महाराज की 430वीं जयंती धूमधाम से मनाई गई। इस अवसर पर महासभा भवन में स्थापित संत सुंदरदास जी - बलरामदास जी मंदिर को फूल-मालाओं से विशेष रूप से सजाया गया और भव्य आरती की गई।
कार्यक्रम में महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री रमेश चंद्र गुप्ता 'तूंगावाला', मुख्य कार्यकारी अध्यक्ष श्री संजीव कुमार कट्टा, आजीवन संरक्षक श्री गोविंद जी धामाणी, श्री लल्लू राम जी मोदी, श्री हनुमान सहाय जी ओढ, श्री कृष्ण मोहन जी खंडेलवाल व श्री सुरेश जी कूलवाल विशेष रूप से उपस्थित रहे। साथ ही पत्रिका प्रभारी श्री राम स्वरूप ताम्बी, सह-प्रभारी श्री रामबाबू गुप्ता, प्रधान संपादक श्री राम निरंजन खुटेंटा, राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं मीडिया प्रभारी प्रोफेसर रमेश कुमार रावत (गंगटोक) सहित कई समितियों के संयोजक एवं कार्यकारिणी सदस्य भी मौजूद थे।
संगोष्ठी के दौरान समाज बंधुओं ने संत सुंदरदास जी (विक्रम संवत 1653-1746) को भक्तिकाल का महान संत कवि बताते हुए कहा कि उनकी प्रकांड विद्वता के कारण उन्हें 'हिंदी साहित्य का शंकराचार्य' कहा जाता है। वक्ताओं ने उनके ज्ञान और भक्ति के समन्वय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अन्य निर्गुण संतों की तुलना में वे अत्यधिक शिक्षित थे। उन्होंने संस्कृत, दर्शन और व्याकरण का गहन अध्ययन किया था, जिसका प्रभाव उनकी कालजयी रचना 'सुंदरविलास' में स्पष्ट झलकता है।