Publish Date: Mon, 06 Apr 2026 (19:15 IST)
Updated Date: Mon, 06 Apr 2026 (19:20 IST)
मदुरै की एक अदालत ने चर्चित साथानकुलम कस्टोडियल डेथ केस में (Sathankulam custodial deaths case) में बड़ा फैसला सुनाते हुए दोषी ठहराए गए 9 पुलिसकर्मियों को मौत की सजा सुनाई है। कोर्ट ने कहा कि, यह मामला 'दुर्लभतम से दुर्लभ' (rarest of rare) श्रेणी में आता है। साथानकुलम केस ने पूरे देश में व्यापक आक्रोश पैदा किया था और यह मामला पुलिस हिरासत में हिंसा और जवाबदेही को लेकर बड़ी बहस का केंद्र बना।
अब सजा सुनाए जाने के बाद यह मामला न्यायिक प्रक्रिया के अंतिम चरण में पहुंच गया है। फैसला सुनाते हुए न्यायाधीश मुथुकुमारन ने कहा कि यदि यही अपराध आम नागरिक करते तो सामान्य सजा दी जा सकती थी, लेकिन यहां खुद पुलिसकर्मियों ने ही कानून तोड़ा है, इसलिए सख्त सजा जरूरी है। अदालत ने माना कि यह मामला साफ तौर पर कस्टोडियल हिंसा का उदाहरण है।
क्या था पूरा मामला
कोरोनाकाल में लॉकडाउन के तमिलनाडु के मदुरै में जयराज और उनके बेटे को दुकान देर तक खोलने के आरोप में पुलिस ने हिरासत में लिया था। दोनों को 19 जून 2020 को कथित तौर पर COVID-19 लॉकडाउन नियमों के उल्लंघन के आरोप में हिरासत में लिया गया था। आरोप है कि थाने में दोनों को पूरी रात बेरहमी से पीटा गया और गंभीर यातनाएं दी गईं। हालत बिगड़ने के बावजूद उन्हें इलाज नहीं मिला और बाद में दोनों की मौत हो गई। कुछ दिनों बाद उनकी मौत Kovilpatti Government Hospital में हो गई। बाद की जांच में पुष्टि हुई कि उन्हें हिरासत में गंभीर यातनाएं दी गई थीं।
यातना और मौत के मामले में दोषी
मदुरै की प्रथम अतिरिक्त जिला एवं सत्र अदालत ने एक सप्ताह पहले ही सभी नौ आरोपियों को हिरासत में यातना और मौत के मामले में दोषी करार दिया था। जांच में सामने आया कि पिता-पुत्र को पुलिस हिरासत में बेरहमी से पीटा गया था। इंस्पेक्टर एस. श्रीधर को हमले के लिए उकसाने का दोषी पाया गया, जबकि अन्य पुलिसकर्मियों पर हिंसा में शामिल होने और सबूत छिपाने के आरोप साबित हुए। सभी आरोपियों पर हत्या, गंभीर चोट पहुंचाने, झूठे साक्ष्य तैयार करने और फर्जी केस दर्ज करने जैसे आरोप साबित हुए हैं। मामले के एक आरोपी, स्पेशल सब-इंस्पेक्टर पॉलदुरई की ट्रायल के दौरान COVID-19 संक्रमण से मौत हो गई थी।
CBI जांच में सामने आए अहम सबूत
इस मामले की जांच सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) ने की थी। जांच में फोरेंसिक रिपोर्ट, मेडिकल साक्ष्य और गवाहों के बयान के आधार पर यह साबित हुआ कि पुलिस स्टेशन के अंदर लगातार और बेरहमी से मारपीट की गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और खून के निशान अहम सबूत बने। Edited by : Sudhir Sharma
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