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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद बोले नोटिस-नोटिस न खेलें, बयानवीर न बनें, मेरे साथ अपराध हुआ है

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हिमा अग्रवाल

, गुरुवार, 22 जनवरी 2026 (21:27 IST)
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन के बीच स्नान को लेकर उपजा विवाद फिलहाल थमता हुआ नहीं दिखाई दे रहा है। 18 जनवरी को हुए घटनाक्रम के बाद मेला प्रशासन द्वारा स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को भेजे गए नोटिस से वे बेहद नाराज बताए जा रहे हैं। उनका कहना है कि यह नोटिस न केवल अपमानजनक है, बल्कि वर्षों पुरानी परंपराओं की भी अनदेखी करता है। इसलिए नोटिस-नोटिस न खेलें, सरकार अपमान करने वालों पर ठोस कार्रवाई करें।
 
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे कोई नए व्यक्ति नहीं हैं जो पहली बार माघ मेले में आए हों। वे पिछले लगभग 40 वर्षों से माघ मेले में आ रहे हैं और पहले प्रशासन स्वयं उन्हें शिविर की जगह और व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई थी और आज उन्हें वापस लेने का नोटिस भेज रहें है, अगर वापस लेना ही था तो दिया क्यों? उन्होंने कहा कि वह आज शिविर में नही बैठे है फुटपाथ पर है, वापस लेना है तो ले लें। यदि प्रशासन का मन हो तो वे शिविर को उखाड़कर फेंक दें, उन्हें इसकी कोई चिंता नहीं है।
 
उन्होंने सरकार के रवैये पर भी कड़ी नाराजगी जाहिर की। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि मुख्यमंत्री सार्वजनिक मंचों से असली और नकली सनातन की बात करते हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि जो लोग सनातन परंपरा का निर्वाह कर रहे हैं, उन्हें ही प्रताड़ित किया जा रहा है। 12 साल.पहले योगी आदित्यनाथ गोरक्षा की बात करके कुर्सी पर बैठे, लेकिन गोहत्या बंद नही हुई, दूसरी तरफ हम गोरक्षक की लड़ाई लड़ रहें है, जनता को पता है कि असली सनातनी कौन है। उन्होंने कहा कि वे कोई सुख-सुविधाओं का भोग नहीं कर रहे, जबकि सत्ता में बैठे लोग राजगद्दी संभाले हुए हैं। ऐसे में बयान वीर बनने के बजाय सरकार को यह देखना चाहिए कि वास्तव में अपराध क्या हुआ है और दोषी कौन है।
 
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने यह भी साफ कर दिया कि इस मामले में केवल कुछ पुलिसकर्मियों को निलंबित कर देने से वे संतुष्ट नहीं होंगे। उनका कहना है कि यह मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही का नहीं, बल्कि उनके सम्मान और अधिकारों से जुड़ा हुआ है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच हो और जो भी दोषी हों, उनके खिलाफ ठोस कार्रवाई की जाए।
 
फिलहाल इस पूरे विवाद ने मेला प्रशासन और सरकार की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं, और आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है। Edited by : Sudhir Sharma 

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