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अपनेपन की कमी से थकता दिमाग

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तनाव
- माहिया

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मशीनी बनते जीवन और अपनों से बढ़ती दूरियों ने सबसे ज्यादा मनुष्य के दिमाग को थका डाला है। यही कारण है कि वह भीड़ में भी अकेला है और हर सुविधा होने के बावजूद सुकून की तलाश में भटक रहा है। इंसान का इंसान बने रहना ही इस समस्या से निजात दिला सकता है।

मानसिक थकान कई वजहों से आपको अपनी गिरफ्त में ले सकती है। मसलन, आर्थिक तनाव, संबंधों में तनाव, कोई गंभीर बीमारी या फिर किसी तरह की कोई और नकारात्मक स्थिति। लेकिन मनोचिकित्सकों का मानना है कि मानसिक थकान की सबसे बड़ी वजह संबंधों में तनाव होती है।

मशीनी बनते जीवन और अपनों से बढ़ती दूरियों ने सबसे ज्यादा मनुष्य के दिमाग को थका डाला है। यही कारण है कि वह भीड़ में भी अकेला है और हर सुविधा होने के बावजूद सुकून की तलाश में भटक रहा है।
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संबंधों में तनाव बढ़ने की कई वजहें हैं। खासकर महानगरीय जीवन में। कोई भी अखबार उठा लीजिए, अखबारों में फोन फ्रेंडशिप और सूसी एजेंसियों के विज्ञापनों की संख्या लगातार बढ़ती हुई मिलेगी। ये बढ़ते विज्ञापन वास्तव में पारिवारिक संबंधों में तनाव की बढ़ती खाई के द्योतक हैं।

फोन फ्रेंडशिप वास्तव में आत्मीय रिश्तों में खत्म होती गर्माहट के सबूत हैं। विशेषज्ञों के अनुसार अखबारों में फोन फ्रेंडशिप के लिए बढ़ते विज्ञापन वास्तव में रिश्तों में छीजती विश्वसनीयता दर्शाते हैं। आज जबकि जीवन पहले से कहीं ज्यादा सुखी और सुविधाओं से परिपूर्ण है तो भी आदमी लगातार अकेला होता जा रहा है।

लोगों की भीड़ से नहीं, आत्मीयता से, विश्वसनीयता से और भावनात्मक सुरक्षा से। यही कारण है कि अकेलापन बढ़ता जा रहा है। इस तरह के मानसिक तनाव और संबंधों में भावनात्मक सुरक्षा का अभाव बढ़ती हुई मानसिक थकान का कारण है। मानसिक थकान को पहचानना मुश्किल नहीं है, मसलन ऐसे स्त्री-पुरुष आमतौर पर -

बात-बात पर चिड़चिड़ाते रहते हैं।

हर एक के काम में नुक्स निकालते हैं।

इनकी याददाश्त बहुत कमजोर हो जाती है।

काम में दिन-रात लगे रहते हैं लेकिन किसी काम के प्रति इनमें रुचि नहीं पैदा होती।

नशे के आदी हो जाते हैं।

महिलाओं में इस स्थिति में पुरुषों से कहीं ज्यादा नशे की लत पड़ जाती है।

ऐसे पुरुष यदि एक बार सिगरेट पीना शुरू कर दें तो फिर लगातार पीते ही चले जाते हैं, जब तक कि वे किसी वजह से डिस्टर्ब न हो जाएँ या फिर उनकी सिगरेट न खत्म हो जाए।

ऐसे मानसिक थकान के शिकार लोग अव्वल तो सुन्न-धुन्न रहते हैं, किसी से ज्यादा घुलना-मिलना पसंद नहीं करते पर एक बार बोलना शुरू कर दें तो मुश्किल से बंद होते हैं।

मानसिक थकान से पीड़ित लोग फोन पर बड़े मजे से बात करते हैं क्योंकि फोन पर वे पूरी तरह विश्वास से भरे होते हैं।

सिरदर्द इनकी एक स्थायी समस्या होती है।

ऐसे व्यक्ति की खुराक लगातार कम होने लगती है या बढ़ने लगती है।

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