Hanuman Chalisa

Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia

महाशिवरात्रि पर भांग क्यों पी जाती है? जानिए धार्मिक कारण और नशा उतारने के आसान उपाय

Advertiesment
चित्र में शिवलिंग और पूजा करते भक्त
Mahashivratri and Bhang: महाशिवरात्रि और भांग का संबंध गहरा भी है और दिलचस्प भी। अक्सर लोग इसे केवल मौज-मस्ती से जोड़कर देखते हैं, लेकिन इसके पीछे धार्मिक, पौराणिक और वैज्ञानिक कारण छिपे हैं। शिवजी को भांग अर्पित करने और भांग पीने का प्रचलन प्राचीनकाल से ही चला आ रहा है। यहाँ प्रमुख कारण दिए गए हैं कि महाशिवरात्रि पर भांग का सेवन क्यों किया जाता है और कैसे उतारे भांग का नशा।

1. हलाहल विष का प्रभाव कम करना

पौराणिक कथा के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान जब 'हलाहल' नामक भयंकर विष निकला, तो ब्रह्मांड को बचाने के लिए भगवान शिव ने उसे अपने कंठ में धारण कर लिया। विष की तीव्रता से शिव का शरीर अत्यधिक गर्म होने लगा। मान्यताओं के अनुसार, भांग, धतूरा और बेलपत्र जैसी औषधियों में शीतलता (Cooling properties) होती है, जिनका उपयोग शिव के शरीर की गर्मी और विष के प्रभाव को शांत करने के लिए किया गया था। देवताओं ने इसका लेप बनाकर उनके शरीर पर लगाया था।
 

2. शिव के 'आनंद' स्वरूप का प्रतीक

भगवान शिव को 'औघड़' और 'विरागी' माना गया है। वे संसार के मोह-माया से दूर गहरे ध्यान (Meditation) में रहते हैं। भांग को एक ऐसी औषधि माना जाता है जो एकाग्रता बढ़ाने और मन को बाहरी दुनिया से काटकर अंतर्मन से जोड़ने में मदद करती है। भक्त इसे शिव के इसी दिव्य आनंद (Ecstasy) के प्रसाद के रूप में लेते हैं, लेकिन यहां यह स्पष्‍ट करना है कि शिवजी भांग नहीं पीते थे। 
 

3. आयुर्वेद और औषधि का महत्व

प्राचीन काल में भांग को एक महत्वपूर्ण जड़ी-बूटी माना जाता था। महाशिवरात्रि फाल्गुन मास में आती है, जब मौसम बदल रहा होता है। आयुर्वेद के अनुसार, सीमित मात्रा में भांग का सेवन पाचन में सुधार और शरीर की थकान दूर करने में सहायक होता था। इसे 'विजया' भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है दुखों और रोगों पर विजय पाने वाली।
 

4. सामाजिक वर्जनाओं का त्याग

शिव को 'पशुपतिनाथ' कहा जाता है, जो समाज द्वारा त्यागी गई चीजों (जैसे श्मशान की भस्म, सांप, धतूरा और नशीली बूटियां) को भी स्वीकार करते हैं। महाशिवरात्रि पर भांग का सेवन यह संदेश देता है कि ईश्वर की नजर में कुछ भी 'अछूत' या 'बुरा' नहीं है, यदि वह पवित्र मन से अर्पित किया जाए।
 

एक जरूरी स्पष्टीकरण (Peer Advice)

यद्यपि भांग का धार्मिक महत्व है, लेकिन इसे लेकर एक बड़ी गलतफहमी भी है। भगवान शिव कभी भी भांग नहीं पीते थे। उन पर भांग का लेप इसलिए लगाया जाता है ताकि उनके शरीर की गर्मी शांत की जा सके। भगवान शिव 'नीलकंठ' हैं जिन्होंने विष पिया था, लेकिन वे 'योगेश्वर' भी हैं जिनका अपने इंद्रियों पर पूर्ण नियंत्रण है।
 
मर्यादा: शिवरात्रि पर भांग को 'प्रसाद' के रूप में बहुत ही सीमित मात्रा में लेना चाहिए।
नशा बनाम भक्ति: अत्यधिक नशा करके हुड़दंग करना भक्ति नहीं, बल्कि शिव के अनुशासन के विरुद्ध है। भांग का उद्देश्य मन को शांत और एकाग्र करना है, न कि सुध-बुध खो देना।
 

भांग का नशा उतारने के 5 आसान उपाय

1. खटाई का सेवन: नींबू पानी (बिना चीनी/नमक), छाछ, दही या इमली का पना पिलाएं। खटास नशे को काटने में सबसे कारगर है।
2. गुनगुना सरसों तेल: यदि व्यक्ति बेहोशी की हालत में हो, तो हल्का गुनगुना सरसों का तेल 1-2 बूंद कानों में डालने से राहत मिलती है।
3. शुद्ध देसी घी: देसी घी की अधिक मात्रा का सेवन करने से भी भांग का असर कम होने लगता है।
4. अरहर की कच्ची दाल: अरहर की कच्ची दाल को पीसकर पानी के साथ पिलाने से नशे की तीव्रता कम होती है।
5. चने और संतरा: भुने हुए चने खिलाएं या संतरे का सेवन कराएं। बार-बार सादा नींबू पानी पिलाना भी फायदेमंद है।
6. ध्यान रखें: भांग का नशा होने पर व्यक्ति को भारी भोजन या मीठी चीजों से दूर रखें, क्योंकि इससे नशा और बढ़ सकता है।

अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

Share this Story:

Follow Webdunia Hindi

अगला लेख

Weekly Numerology Horoscope 2026: साप्ताहिक अंक ज्योतिष, जानें 16 से 22 फरवरी का राशिफल और विशेष प्रभाव