Publish Date: Thu, 23 Apr 2026 (17:37 IST)
Updated Date: Thu, 23 Apr 2026 (17:42 IST)
आजकल दुनियाभर में हर तरफ़ और हर स्तर पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की चर्चा है। ऐसे में कल्पना करें कि AI अगर एक ऐसी कार हो जिसमें स्टीयरिंग व्हील नहीं है और वो बहुत तेज़ गति से आगे जा रही है तो किस तरह के नतीजे होने की सम्भावना है। निसन्देह उसके सुरक्षित संचालन के लिए उसमें स्टीयरिंग व्हील और ब्रेक लगाए जाने की सख़्त ज़रूरत होगी।
ये स्टीयरिंग व्हील और ब्रेक होंगे विनियमन (regulation) और AI के विवेकपूर्ण प्रयोग के रूप में। बिलकुल यही कहना है नोबेल पुरस्कार विजेता और AI के अग्रणी विशेषज्ञ जियोफ़्री हिंटन का, जिन्हें इस स्वतः सीखी जाने वाली तकनीक का गॉडफ्दर यानी पितामह माना जाता है।
जियोफ़्री हिंटन ने संयुक्त राष्ट्र सामाजिक विकास अनुसन्धान संस्थान (UNRISD) द्वारा जिनीवा में सह-आयोजित 'डिजिटल विश्व सम्मेलन (DWC): सामाजिक विकास के लिए AI' में कहा है, यदि आप कभी बिना ब्रेक वाली कार लेकर बाहर निकलें, तो पहाड़ी से नीचे उतरते समय आप बड़ी मुसीबत में होंगे लेकिन अगर उसमें स्टीयरिंग व्हील भी न हो, तो आप और भी बड़ी मुसीबत में होंगे।
उन्होंने सम्मेलन में आए प्रतिनिधियों के सामने इस दलील को पेश करते हुए ज़ोर दिया कि AI में हो रही तीव्र प्रगति को, समाज की सेवा करने के लिए अधिक सावधानी से निर्देशित किया जाना होगा, न कि समाज को नुक़सान पहुंचाने दिया जा सकता है।
उनकी यह चेतावनी AI नीति निर्धारण के लिए ऐसे समय आई है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था और समाज में AI के बढ़ते एकीकरण के बीच, सरकारों और संयुक्त राष्ट्र के पैनलों ने शासन, समावेशिता और जोखिम प्रबन्धन पर चर्चा तेज़ कर दी है।
AI तक पहुंच में विशाल खाई
AI की गति चौंकाने वाली है। संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास (UNCTAD) की 'प्रौद्योगिकी और नवाचार रिपोर्ट 2025' के अनुसार, वैश्विक AI बाज़ार 2023 के 189 अरब डॉलर से बढ़कर, वर्ष 2033 तक 4.8 ट्रिलियन डॉलर होने का अनुमान है यानी एक दशक में यह जापान की अर्थव्यवस्था से भी बड़ी अर्थव्यवस्था होगी।
UNCTAD के कार्यवाहक महासचिव पैड्रो मैनुअल मोरेनो ने आगाह किया है कि AI की तेज़ रफ़्तार और बढ़ते आर्थिक दायरे के बावजूद, इसे बनाने और आकार देने की क्षमता केवल कुछ ही अर्थव्यवस्थाओं और कम्पनियों के हाथों में है। यह स्थिति वैश्विक असमानताओं को गहरा करने का जोखिम पैदा करती है।
एक प्रकाश बल्ब जिसमें एक चमकदार मस्तिष्क और एक एआई चिप है, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता और नवाचार का प्रतीक है। दुनियाभर में AI का विस्तार बहुत तेज़ी से हो रही है, इसके तकनीकी विकास और प्रयोग दोनों मामलों में। ऐसे में इसके विवेकपूर्ण प्रयोग के लिए क़ानून बनाए जाने की ज़ोरदार हिमायत हो रही है।
अन्तरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) की महासचिव डोरीन बोगडान-मार्टिन ने ध्यान दिलाया कि विकसित देशों के क्षेत्र 'Global North' में जैनरेटिव AI को अपनाने की दर, विकासशील देशों के क्षेत्र 'Global South' की तुलना में लगभग दोगुनी तेज़ी से बढ़ रही है।
यदि इस मुद्दे पर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह स्थिति, AI को आकार दे रहे देशों और उसका केवल उपभोग करने वाले देशों के बीच विशाल खाई उत्पन्न कर देगा। उन्होंने आगाह करते हुए कहा कि बुनियादी ढांचे, निवेश और क्षमता में अपर्याप्तता या अन्तर को कोई एक देश या संगठन केवल अकेले नहीं भर सकते।
चर्चा के स्पष्ट क्षेत्र
जिनेवा व कुछ अन्य स्थानों पर आयोजित इस सम्मेलन की गतिविधियां यह सुनिश्चित करने के वैश्विक प्रयास को दर्शाती हैं कि सभी देश AI से लाभान्वित हो सकें। चर्चा के दो मुख्य क्षेत्र उभरकर सामने आए हैं :
वैश्विक नीति निर्धारण : जिसमें ध्यान वैश्विक स्तर पर डिजिटल नीतियां बनाने पर है।
पारदर्शी शासन : 'सामाजिक विकास के लिए AI' सम्मेलन में पूर्वाग्रह और अपारदर्शी ऐल्गोरिदम जैसे जोखिमों को दूर करने के लिए जवाबदेह और अधिकार-आधारित शासन की आवश्यकता पर बल दिया गया।
AI शासन के किसी भी प्रस्ताव को डेटा-संचालित होना चाहिए, और यही मुख्य काम, संयुक्त राष्ट्र के 'AI पर स्वतंत्र अन्तरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पैनल' का है, जिसकी प्रथम बैठक बुधवार को, स्पेन की राजधानी मैड्रिड में हुई है।
पैनल की सह-अध्यक्ष और नोबेल शान्ति पुरस्कार विजेता मारिया रसा ने चेतावनी दी कि शक्तिशाली AI उपकरण, विमर्श युद्ध (narrative warfare) के माध्यम से लोकतांत्रिक प्रणालियों को कमज़ोर कर रहे हैं, जहां बड़े पैमाने पर झूठ फैलाया जाता है। इससे मीडिया और अदालतों जैसी संस्थाएं कमज़ोर हो रही हैं और जवाबदेही ख़त्म होने पर भ्रष्टाचार बढ़ रहा है।
एक विश्वव्यापी चर्चा
इस वैज्ञानिक पैनल की सह-अध्यक्षता मारिया रसा और कनाडा के प्रसिद्ध कम्प्यूटर वैज्ञानिक योशुआ बेंगियो कर रहे हैं। इसके निष्कर्ष जुलाई में जिनीवा में होने वाले' AI शासन पर संयुक्त राष्ट्र के वैश्विक संवाद' के लिए अहम जानकारी मुहैया कराएंगे। यह संवाद संयुक्त राष्ट्र के सभी 193 सदस्य देशों, निजी क्षेत्र, नागरिक समाज और तकनीकी जगत को एक साथ लाता है।
उभरती प्रौद्योगिकियों पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूतअमनदीप गिलने इस सन्दर्भ में कहा है, नीतिगत चर्चा, विज्ञान और साक्ष्य पर आधारित होगी, जिसमें दुनियाभर के बहु-विषयक दृष्टिकोण शामिल होंगे। संयुक्त राष्ट्र को विज्ञान और नीति के इस पहले संगम की सुविधा प्रदान करने पर गर्व है।