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ग़ाज़ा में भीषण सर्दी से एक और बच्चे की मौत, पश्चिमी तट पर विस्थापन में तेज़ी

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, गुरुवार, 22 जनवरी 2026 (18:33 IST)
ग़ाज़ा पट्टी में कठोर सर्दी के मौसम के बीच एक और बच्ची की अत्यधिक ठंड यानी हाइपोथर्मिया से मौत हो गई है।संयुक्त राष्ट्र ने बुधवार को स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों के हवाले से यह जानकारी दी है। गाज़ा सिटी में 3 महीने की एक बच्ची की मंगलवार सुबह ठंड लगने की वजह से मौत हो गई। संयुक्त राष्ट्र के उप प्रवक्ता फरहान हक़ ने न्यूयॉर्क में बताया कि इस सर्द मौसम के दौरान, मृतकों की कुल संख्या अब 9 पहुंच गई है। 
 
संयुक्त राष्ट्र के सहायता समन्वय कार्यालय OCHA ने, इन कठिन परिस्थितियों से जूझ रहे लोगों के लिए एक बार फिर आपात समाधान की मांग की है। इसमें बैटरी, सौर पैनल और अन्य ऊर्जा स्रोतों की आपूर्ति शामिल है, जो तापन व्यवस्था के लिए सामुदायिक हीटिंग केन्द्र स्थापित करने के लिए आवश्यक हैं।
 

खाद्य सहायता

उप प्रवक्ता फरहान हक़ ने जानकारी दी कि ग़ाज़ा पट्टी में, युद्ध विराम के 3 महीने से अधिक समय बीतने और मानवीय सहायता पर लगातार प्रतिबन्धों के बावजूद लाखों लोगों को खाद्य सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। जानकारी के अनुसार, इस वर्ष की शुरुआत से अब तक 50 वितरण केन्द्रों के माध्यम से, 8.6 लाख से अधिक लोगों को खाद्य पैकेज वितरित किए जा चुके हैं। फ़रहान हक़ ने बताया, हम हर दिन ज़रूरतमन्दों को लगभग 16 लाख गर्म भोजन भी उपलब्ध कराते रहे हैं।
 

बाल टीकाकरण 

ग़ाज़ा में स्वास्थ्य क्षेत्र में काम कर रहे संयुक्त राष्ट्र के साझीदार संगठनों ने रविवार को 10 दिवसीय नियमित टीकाकरण अभियान शुरू किया है, जिसके पहले दो दिनों में 3 साल से कम उम्र के 3 हज़ार बच्चों का टीकाकरण किया गया है। इस अभियान का उद्देश्य नन्ही ज़िन्दगियों को वैक्सीन से रोकी जा सकने वाली बीमारियों से सुरक्षित करना है।
 
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की मदद से सोमवार को चिकित्सा कारणों से 21 मरीज़ और उनके तिमारदारों को ग़ाज़ा से बाहर जॉर्डन ले जाने की व्यवस्था की गई। हालांकि अभी भी 18 हज़ार से अधिक मरीज़ ऐसी चिकित्सा सेवा की प्रतीक्षा में हैं, जो ग़ाज़ा में उपलब्ध नहीं है। इनमें 4 हज़ार बच्चे शामिल हैं।
WHO ने यूएन सदस्य देशों से इन मरीज़ों को स्वीकार करने और पश्चिमी तट और पूर्वी येरुशलम के लिए मेडिकल निकासी मार्ग को दोबारा खोलने का आग्रह किया है।
 

विस्थापन में वृद्धि

उधर क़ाबिज़ पश्चिमी तट से मिली नवीनतम जानकारी के अनुसार, पिछले वर्ष दिसम्बर में 14 फिलिस्तीनियों की मौत हुई और 231 लोग घायल हुए। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस दौरान इसराइली बस्तियों के लोगों ने 132 हमले किए, जिनसे आम लोगों को चोटें आईं या सम्पत्ति को नुक़सान पहुंचा। इसी अवधि में 246 फिलिस्तीनियों को उनके घरों से विस्थापित होना पड़ा।
 
रिपोर्ट में 7 इसराइली नागरिकों के घायल होने की भी पुष्टि की गई, हालांकि किसी की मौत की ख़बर नहीं है। OCHA ने 2025 में रिकॉर्ड स्तर पर हुए विस्थापन और इसराइली बस्तियों के निवासियों द्वारा किए गए हमलों की घटनाओं को भी रिपोर्ट में दर्ज किया है, जिससे क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता के प्रति गम्भीर चिन्ता है।
बच्चों सहित विस्थापित फिलिस्तीनियों का एक समूह गाजा के समुद्र तट पर अस्थायी तम्बूओं के पास एक दलदल मार्ग पर चलता है, जिसके पास एक गधा है
 

हमलों से भारी क्षति

पिछले वर्ष पश्चिमी तट में 240 फिलिस्तीनियों की मौत हुई, जिनमें 55 बच्चे थे। इनमें से अधिकांश लोग इसराइली बलों के हाथों मारे गए, जबकि 9 मौतें इसराइली बस्तियों के हमलावरों की वजह से हुईं। पिछले वर्ष 3,982 फिलिस्तीनी नागरिक घायल हुए, जिनमें लगभग 700 बच्चे थे। इनमें से 37 हज़ार से अधिक लोग विस्थापित हुए।
 
इसी अवधि के दौरान 17 इसराइली लोग मारे गए, जिनमें एक बच्चा और 6 सुरक्षा बल के सदस्य शामिल थे। इसके अलावा 101 इसराइली घायल हुए, जिनमें 5 बच्चे और 32 सैनिक शामिल थे।
 

घरों से बेदख़ली

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय (OHCHR) ने चेतावनी दी है कि पूर्वी येरुशलम में फिलिस्तीनियों को जबरन विस्थापित करने की गति तेज़ हो रही है और ऐतिहासिक मोहल्लों को व्यवस्थित रूप से खाली किया जा रहा है। OHCHR के क़ब्ज़े वाले फिलिस्तीनी क्षेत्रों (OPT) में कार्यालय के प्रमुख अजीत सुंघाय ने सिलवान मोहल्ले में हुई तबाही और लोगों को जबरन बाहर भेजे जाने की घटनाओं को उजागर किया।
 
रिपोर्ट में कहा गया है कि इसराइली बस्तियों का अवैध रूप से विस्तार अब तीन प्रमुख फिलिस्तीनी शहरी केन्द्रों यानी पूर्वी येरूशलम, रामल्लाह और बेथलेहम में हो रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ घरों पर इसराइली अधिकारियों ने क़ब्ज़ा कर लिया है, ताकि बस्ती परियोजनाओं के लिए जगह बनाई जा सके। इनमें एक पर्यटन पार्क भी शामिल है, जिसमें केबल कार लाइन होगी जो पश्चिमी येरुशलम को पुराने शहर से जोड़ती है।
जुलाई 2024 में अन्तरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) ने निर्णय दिया कि इसराइल द्वारा फिलिस्तीनियों की जबरन बेदख़ली और बड़े पैमाने पर उनके घरों को तोड़े जाना, चौथे जिनीवा कन्वेंशन के तहत प्रतिबन्धित है। संयुक्त राष्ट्र के मुख्य न्यायिक निकाय, ICJ ने इसराइल से क़ाबिज़ फिलिस्तीनी क्षेत्रों में अपने गैरक़ानूनी उपस्थिति को समाप्त करने का आग्रह किया है।

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