संयुक्त राष्ट्र सहायता समन्वय कार्यालय (OCHA) ने आगाह किया है कि ग़ाज़ा में मानवीय सहायता में देरी हो रही है, क्योंकि राहत सामग्री को अकसर व्यावसायिक सामान की तुलना में कम प्राथमिकता दी जाती है। वहीं सर्दियों के तूफ़ानों नेविस्थापित परिवारों की पहले से ही कठिन जीवन परिस्थितियों को और भी गम्भीर बना दिया है।
OCHA की प्रवक्ता ओल्गा चेरेवको ने सोमवार को बताया कि यूएन और साझीदार संगठनों के निरन्तर प्रयासों के बावजूद, ग़ाज़ा में उनकी राहत सामग्री पहुंचाने की क्षमता से कहीं तेज़ी से लोगों की ज़रूरतें बढ़ रही हैं।
उन्होंने ग़ाज़ा पट्टी में सीमित मात्रा में राहत सामग्री के प्रवेश और उन वस्तुओं की लम्बित सूची की ओर भी ध्यान दिलाया, जिन्हें इसराइली अधिकारियों ने अभी तक रोक रखा है। इनमें भारी मशीनरी, उपकरण और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचों की मरम्मत के लिए आवश्यक उपकरण शामिल हैं।
आपात राहत को प्राथमिकता
ग़ाज़ा में हाल के सप्ताहों में लगातार आए तूफ़ानों के कारण अनेक क्षेत्रों में बाढ़ आई है। इसके मद्देनज़र मानवीय संगठनों ने आपात शीतकालीन राहत को प्राथमिकता दी है। वर्तमान में लगभग 13 लाख लोग आश्रय सहायता के लिए ज़रूरतमन्द हैं।
ओल्गा चेरेवको ने कहा, जब तूफ़ान आए, तो अनेक लोगों का सब कुछ खो गया…जो कुछ भी उनके पास था, वह सब बह गया। पिछले कुछ दिनों में राहत टीम ने हज़ारों तम्बू, तिरपाल और बिस्तर सम्बन्धित सामग्रियां वितरित की हैं, जिससे लगभग 4 हज़ार 800 परिवारों को सहायता मिली है। साथ ही प्रभावित लोगों को खाद्य सहायता भी मुहैया कराई गई है।
स्वास्थ्य के लिए गम्भीर ख़तरा
स्थानीय प्रशासन ने अनेक बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों को असुरक्षित बताया है, जिससे सैकड़ों परिवारों ने स्वेच्छा से अपने घर से दूर शरण ली है। इस दौरान, यूएन और साझीदार संगठन, लोगों की बुनियादी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए कार्यरत हैं। सर्दियों की कठिन परिस्थितियां स्वास्थ्य के लिए गम्भीर ख़तरे उत्पन्न कर रही हैं, विशेषकर शिशुओं के लिए।
ओल्गा चेरेवको ने चेतावनी दी, हाइपोथर्मिया का जोखिम बढ़ गया है और शिशु सबसे अधिक ख़तरे में हैं। संयुक्त राष्ट्र और उसके साझीदार संगठन, बच्चों के लिए गर्माहट बनाए रखने के उपायों सहित, देखभाल करने वालों के बीच जागरूकता बढ़ा रहे हैं।
आश्रय के अलावा, मानवीय प्रयासों में खाद्य सहायता, पोषण जांच, स्वास्थ्य सेवाएं और शिक्षा केन्द्रों की फिर शुरुआत भी शामिल है। हाल के दिनों में 13 अतिरिक्त अस्थाई शिक्षा केन्द्र खोले गए हैं, जिससे लगभग 5 हज़ार बच्चों को शिक्षा तक पहुंच मिली है।
प्रवक्ता ओल्गा चेरेवको ने बताया कि सीमा चौकियों के अनियमित खुलने और लदान समय, आवश्यक वस्तुओं पर प्रतिबन्ध व पंजीकरण की शर्तें, गै़र-सरकारी संगठनों के लिए ग़ाज़ा में राहत सामग्री पहुंचाना और भी कठिन बना रही हैं।