सूडान के दारफ़ूर क्षेत्र में एक के बाद एक कई नगरों में सामूहिक हत्याओं, बलात्कार, जातीय आधार पर लोगों को निशाना बनाए जाने समेत ऐसे अनेक अत्याचारों को संगठित ढंग से अंजाम दिया गया, जिन्हें युद्ध अपराध और मानवता के विरुद्ध अपराध की श्रेणी में रखा जा सकता है। अन्तरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) की उप अभियोजक नज़हत शमीम ख़ान ने सोमवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक बैठक में यह जानकारी दी है।
ICC उप अभियोजक ने सदस्य देशों को बताया कि सूडान के प्रतिद्वंद्वी सैन्यबलों के बीच जारी युद्ध के बीच दारफ़ूर क्षेत्र में स्थिति और भी भयावह हो गई है, जहां आम नागरिकों को सामूहिक यातनाओं का सामना करना पड़ रहा है। जो तस्वीर उभर रही है, वह भयावह है : संगठित, व्यापक और सामूहिक अपराध, जिनमें सामूहिक हत्याएं भी शामिल हैं…अत्याचारों को नियंत्रण स्थापित करने के एक औज़ार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
अप्रैल 2023 से ही सूडान युद्ध की आग में झुलस रहा है, जब अतीत में एक दूसरे के सहयोगी रहे सूडानी सशस्त्र बलों (SAF) और त्वरित समर्थन बल (RSF) गुटों के बीच लड़ाई भड़क उठी थी। देश पर नियंत्रण हासिल करने के लिए शुरू हुआ यह हिंसक टकराव अब पूरे देश में फैल चुका है।
इस युद्ध से सबसे अधिक तबाही सूडान के दारफ़ूर क्षेत्र में हुई है, जहां वही जातीय तनाव फिर से भड़क उठे हैं, जो इससे पहले 2000 के दशक की शुरुआत में जनसंहार के आरोपों की वजह बने थे।
एक योजनाबद्ध मुहिम
उप अभियोजक नज़हत शमीम ख़ान ने बताया कि उत्तर दारफ़ूर की राजधानी अल-फ़शर पर अर्द्धसैनिक बल, RSF के क़ब्ज़े के बाद वहां एक योजनाबद्ध मुहिम को छेड़ा गया, जिसमें गैर-अरब समुदायों को विशेष रूप से निशाना बनाया गया। इन अपराधों में बलात्कार, मनमाने तरीके़ से हिरासत, हत्याओं और सामूहिक क़ब्रें बनाए जाने समेत अन्य अपराध किए गए, जिन्हें अंजाम देने वाले लोगों ने अक्सर उन्हें कैमरे में फिल्माया और जश्न भी मनाया।
नज़हत ख़ान के अनुसार, वीडियो, ऑडियो और सैटेलाइट साक्ष्यों के आधार पर इस निष्कर्ष पर पहुंचा गया है कि अल-फ़शर में युद्ध अपराध और मानवता के विरुद्ध अपराधों को अंजाम दिया गया। पिछले वर्ष अक्टूबर के दौरान जब RSF ने 1.5 साल की घेराबन्दी के बाद अल फ़शर पर अपना क़ब्ज़ा किया था।
ICC की वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वीडियो फुटेज में वैसे ही तौर-तरीक़े नज़र आए हैं, जिन्हें दारफ़ूर में पहले हुए अत्याचारों के दौरान देखा गया गया था। इनमें गैर-अरब जनजातियों के नागरिकों को हिरासत में रखना, उनके साथ दुर्व्यवहार और जान से मार देने समेत अन्य अपराध हैं।
उन्होंने बताया कि RSF के सदस्यों ने सीधे तौर पर की गई इन हत्याओं का जश्न मनाया और फिर शवों के साथ अपमानजनक बर्ताव भी किया गया।
जातीयता से प्रेरित हिंसा
अभियोजन कार्यालय, सूडान के अल जिनीना में हुए अपराधों की जांच भी आगे बढ़ा रहा है, जहां गवाहों ने विस्थापन शिविरों पर हुए हमलों, लूटपाट, लिंग-आधारित हिंसा और बच्चों के ख़िलाफ़ अपराधों की घटनाओं के बारे में जानकारी दी है। साल 2023 में अल जिनीना में युद्ध की सबसे भीषण हिंसा देखी गई, जब RSF के लड़ाकों और उनके सहयोगी विद्रोही गुटों ने मसलित समुदाय के विरुद्ध संहार को अंजाम दिया। इसकी वजह से लाखों लोगों ने भागकर पड़ोसी देश चाड में शरण ली थी।
संयुक्त राष्ट्र अधिकारियों और मानवाधिकार जांचकर्ताओं ने इस हिंसा को जातीयता से प्रेरित बताया और मानवता के विरुद्ध संभावित अपराधों की चेतावनी दी। नज़हत शमीम ख़ान ने कहा कि गवाही और साक्ष्यों से अब संकेत मिलता है कि अल जिनीना में जैसी हिंसक घटनाओं पर जानकारी जुटाई गई थी, वही तौर-तरीक़े बाद में अल फ़शर में भी दोहराए गए।
उन्होंने चेतावनी दी, दारफ़ूर में एक के बाद एक कई नगरों में ये अपराध लगातार दोहराए गए हैं। यह तब तक जारी रहेगा जब तक इस हिंसक टकराव और उसे भड़काने वाली दंडहीनता के भाव को रोका नहीं जाता। उप अभियोजक नज़हत शमीम ख़ान ने कहा कि बलात्कार सहित लैंगिक हिंसा को युद्ध के एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि लिंग-आधारित अपराधों की जांच ICC के लिए प्राथमिकता है। उन्होंने माना कि सांस्कृतिक और सुरक्षा सम्बन्धी बाधाओं के कारण, पीड़ित अक्सर अपने साथ हुए दुर्व्यवहार की जानकारी नहीं दे पाते हैं और ऐसे मामलों में लैंगिक रूप से संवेदनशील और पीड़ित-केन्द्रित जांच की आवश्यकता है।
सूडान के दारफूर के तविला में एक विशाल शरणार्थी शिविर, जहां लगभग 89,000 विस्थापित लोग एल फाशर से भाग गए हैं। संयुक्त राष्ट्र और गैर सरकारी संगठन भोजन, पानी, स्वास्थ्य देखभाल और मनोसामाजिक सहायता सहित सहायता प्रदान करते हैं। कई विस्थापित महिलाएं हैं जिन्होंने यौन हिंसा का अनुभव किया है।
कार्रवाई अनिवार्य है
सोमवार की बैठक में मुख्य रूप से RSF द्वारा अंजाम दिए गए अपराधों पर ही ध्यान केन्द्रित किया गया, मगर उप अभियोजक ने बताया कि अन्तरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय द्वारा सूडान में सशस्त्र बलों, SAF द्वारा किए गए अपराधों के आरोपों पर भी जानकारी जुटाई जा रही है। उन्होंने कहा कि सभी युद्धरत पक्ष, अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के तहत आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए बाध्य हैं।
नज़हत शमीम खान ने ध्यान दिलाया कि पिछले वर्ष अक्टूबर में जंजावीड़ मिलिशिया के नेता अली मुहम्मद अली अब्द-अल-रहमान का दोष साबित हुआ था, जो कि जवाबदेही की दिशा में एक ऐतिहासिक क़दम है। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि जिस स्तर पर अत्याचारों को अंजाम दिया जा रहा है, वैसी तेज़ी से प्रगति नहीं हो रही है।
उन्होंने सूडानी अधिकारियों से सख़्त कार्रवाई करने की भी अपील की, विशेष रूप से उन संदिग्ध व्यक्तियों के विरुद्ध जिन्हें न्यायालय लम्बे समय से तलाश रहा है। इनमें सूडान के पूर्व राष्ट्रपति उमर अल बशीर, पूर्व गृहमंत्री अहमद हारुन और पूर्व रक्षामंत्री अब्देल रहीम मुहम्मद हुसैन शामिल हैं।
उन्होंने कहा, अब कार्रवाई करना अनिवार्य है। साथ ही यह चेतावनी भी दी कि अगर सबसे वरिष्ठ स्तर पर गिरफ़्तारी नहीं हुई तो दारफ़ूर के पीड़ितों के लिए न्याय खोखला ही रहेगा।