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युद्ध और अस्थिरता से जूझ रहे देशों में बढ़ रही मातृ मृत्यु दर, WHO ने जारी की रिपोर्ट

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Maternal mortality rates are rising in war torn countries
United Nations News : दुनियाभर में जितनी मातृत्व मौतें होती हैं, उनमें से दो तिहाई मौतें, युद्ध और अस्थिरता से जूझ रहे देशों में होती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और साझीदार संगठनों की एक रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, युद्धग्रस्त देशों में रहने वाली महिलाओं के लिए प्रत्येक गर्भावस्था के दौरान मातृ कारणों से मृत्यु का जोखिम स्थिर देशों की महिलाओं की तुलना में लगभग 5 गुना अधिक है।
 
रिपोर्ट में बताया गया है कि केवल वर्ष 2023 में ही नाज़ुक हालात वाले और युद्धग्रस्त क्षेत्रों में क़रीब 1 लाख 60 हज़ार महिलाओं की मौत ऐसे कारणों से हुई, जिनका इलाज किया जा सकता था। यह संख्या विश्वभर में होने वाली मातृ मौतों का लगभग 60 प्रतिशत है।

गहरा असमान जोखिम

नई तकनीकी जानकारी में यह विश्लेषण किया गया है कि कुछ देशों में गर्भवती महिलाओं की प्रसव के दौरान मृत्यु की आशंका क्यों अधिक होती है? रिपोर्ट के मुताबिक़, संकट और युद्ध की स्थितियां ऐसे हालात उत्पन्न करती हैं, जहां स्वास्थ्य प्रणालियां लगातार जीवनरक्षक मातृ सेवाएं उपलब्ध कराने में विफल हो जाती हैं।
यह तकनीकी जानकारी विश्व स्वास्थ्य संगठन और एक अन्तर-एजेंसी समूह ने तैयार की है, जिसमें संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP), संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA), संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) और विश्व बैंक (World Bank) शामिल हैं।
 
रिपोर्ट में कहा गया है कि लैंगिक भेदभाव, जातीय पहचान, उम्र और प्रवासन की स्थिति जैसे कारक मिलकर, युद्ध और अस्थिरता से प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाली गर्भवती महिलाओं व लड़कियों के लिए जोखिम को और बढ़ा देते हैं। जोखिम में यह असमानता बेहद गम्भीर है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2023 में किसी युद्ध प्रभावित देश या क्षेत्र में रहने वाली 15 वर्षीय लड़की के लिए जीवनकाल में मातृ कारणों से मृत्यु का जोखिम 51 में 1 का था।
वहीं संस्थागत और सामाजिक रूप से अस्थिर देशों में यह जोखिम 79 में 1 का, जबकि अपेक्षाकृत स्थिर देशों में रहने वाली 15 वर्षीय लड़की के लिए यह जोखिम 593 में 1 पाया गया।
 

वैश्विक प्रगति थमी

नई रिपोर्ट के अनुसार, देशों में मातृ मृत्यु अनुपात के नवीनतम आंकड़ों को इस आधार पर वर्गीकृत किया गया है कि कोई देश युद्धग्रस्त है या सामाजिक-संस्थागत रूप से अस्थिर। रिपोर्ट बताती है कि युद्ध प्रभावित देशों में प्रति एक लाख जीवित जन्मों पर औसतन 504 मातृ मौतें दर्ज की गईं।
 
वहीं संस्थागत और सामाजिक रूप से अस्थिर माने जाने वाले देशों में यह आंकड़ा 368 दर्ज किया गया है। इसके विपरीत इन दोनों श्रेणियों से बाहर के देशों में मातृ मृत्यु अनुपात बेहद कम यानी 99 प्रति एक लाख जीवित जन्म पाया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि ये निष्कर्ष वर्ष 2000 से 2023 के बीच जारी मातृ मृत्यु के पिछले आकलनों को और गहराई देते हैं, जिनसे यह स्पष्ट हुआ था कि मातृ स्वास्थ्य के क्षेत्र में वैश्विक प्रगति रुक गई है।
साथ ही, कम आय वाले तथा संकट-प्रभावित देशों में मातृ मृत्यु दर अब भी बेहद ऊंची बनी हुई है। यही स्थिति इस अतिरिक्त विश्लेषण की मुख्य वजह बनी।
 

नवाचार से मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को सहारा

नई रिपोर्ट के अनुसार, अस्थिरता और संकट के बीच भी नवाचारी उपायों के ज़रिए मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को बनाए रखा जा सकता है। 
 
अनेक देशों में स्थानीय समुदाय, स्वास्थ्यकर्मी और अस्पताल, सांस्कृतिक ज़रूरतों के अनुसार सेवाएं ढाल रहे हैं। साथ ही, बाधित हुई सेवाओं को फिर से शुरू कर रहे हैं और सुरक्षा ख़तरों के बावजूद उपचार व्यवस्था को पुनर्गठित कर रहे हैं, ताकि देखभाल की निरन्तरता बनी रहे।
 

कुछ प्रमुख उदाहरण इस प्रकार हैं 

कोलंबिया– पारंपरिक दाइयों को प्रशिक्षित करके स्थानीय भरोसेमंद नेटवर्क को मज़बूत किया गया, जिससे दुर्गम और असुरक्षित इलाक़ों में भी समय पर मातृ देखभाल सम्भव हो सकी।
 
इथियोपिया– बाधित सेवाओं को सचल चिकित्सा टीमों, नवीनीकृत स्वास्थ्य केन्द्रों और अतिरिक्त दाइयों के ज़रिये फिर से बहाल किया गया।
 
हेती–  विस्थापित महिलाओं तक निःशुल्क या कम लागत पर ऑपरेशन और भरोसेमंद बिजली आपूर्ति से, जीवनरक्षक सेवाएं पहुंचाई गईं।
 
म्यांमार, पापुआ न्यू गिनी और यूक्रेन– जटिल संकट और युद्ध की परिस्थितियों में भी आवश्यक मातृ सेवाओं की सुरक्षा, सुरक्षित प्रसव पद्धतियों और मरीजों को सुरक्षित स्वास्थ्य केन्द्रों तक पहुंचाने पर बल दिया गया।

रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि स्वास्थ्य प्रणाली पर अत्यधिक दबाव के बावजूद सही रणनीति और स्थानीय स्तर पर किए गए प्रयास मातृ स्वास्थ्य की रक्षा कर सकते हैं।

मज़बूत स्वास्थ्य प्रणाली की ज़रूरत

नई तकनीकी जानकारी के अनुसार, यूएन स्वास्थ्य संगठन और उसके साझीदारों को मातृ मृत्यु अनुपात के आंकड़ों को देशों की अस्थिरता श्रेणी से जोड़ने के बाद यह पहचानने में अधिक सटीकता मिली है कि किन देशों में स्वास्थ्य प्रणाली को मज़बूत करने की सबसे तात्कालिक आवश्यकता है।
 
रिपोर्ट में संकट के समय मातृ स्वास्थ्य सेवाएं बनाए रखने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं में निवेश, दुर्गम व युद्धग्रस्त क्षेत्रों में मज़बूत डेटा संग्रह व्यवस्था और आपदाओं के अनुरूप ढल सकने वाली लचीली स्वास्थ्य प्रणालियों के विकास पर ज़ोर दिया गया है।

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