United Nations General Assembly Anniversary : 'शक्तिशाली ताक़तें वैश्विक सहयोग को कमज़ोर करने के लिए तत्पर हैं', यह चेतावनी है यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश की, जिन्होंने यूएन महासभा की 80वीं वर्षगांठ मनाने के लिए लन्दन में एक कार्यक्रम में ये भी कहा है कि मानवता तब सबसे अधिक मज़बूत होती है, जब हम सभी एकजुट होते हैं। यह कार्यक्रम शनिवार को लन्दन के मैथोडिस्ट सैंट्रल हॉल में आयोजित किया गया। यह वही जगह है जहां यूएन महासभा का प्रथम सत्र 10 जनवरी 1946 को आयोजित किया गया था।
यूएन प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने इस समारोह में शिरकत करने के लिए आए प्रतिनिधियों का आहवान किया कि उन्हें बदलाव के लिए साहसिक होना होगा। इतना साहस जुटाना होगा जितना कि 80 वर्ष पहले इस सभागार में आए लोगों ने एक बेहतर दुनिया के निर्माण का सपना देखने के लिए जुटाया था।
शनिवार को इस कार्यक्रम का आयोजन संयुक्त राष्ट्र एसोसिएशन- यूके ने किया जिसमें दुनियाभर से आए लगभग 1,000 प्रतिनिधियों ने शिरकत की। इसी कार्यक्रम में यूएन महासभा ऐनालेना बेयरबॉक, अन्तरिक्ष के लिए यूएन चैम्पियन प्रोफ़ैसर ब्रायन कॉक्स और यूएन शरणार्थी एजेंसी– UNHCR की सदभावना दूत माया ग़ज़ल भी मौजूद रहे। इसी समारोह में यूएन सुरक्षा परिषद की पहली बैठक की 80वीं वर्षगांठ भी मनाई गई, जो पास में ही स्थित चर्च हाउस में 17 जनवरी 1946 को आयोजित हुई थी।
संयुक्त राष्ट्र के बुनियादी चिन्ह
यूएन प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने इस कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए इस स्थल के सांकेतिक महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि प्रथम यूएन महासभा का आयोजन दूसरे विश्व युद्ध का अन्त होने के चार महीने के बाद इन्हीं दीवारों के भीतर हुआ था। उस समय लन्दन भारी बमबारी से त्रस्त था, जहां हज़ारों लोग मारे जा चुके थे। ये आंकड़े इस बात की शक्तिशाली याद दिलाते हैं कि संयुक्त राष्ट्र क्यों वजूद में आया?
यूएन महासचिव ने कहा, प्रतिनिधियों को इस हॉल में पहुंचने के लिए एक ऐसे शहर से गुज़रकर आना पड़ा जो युद्ध से त्रस्त हो चुका था। बकिंघम पैलेस, वैस्टमिन्सटर ऐबी और हाउस ऑफ़ कॉमन्स, जर्मन सेनाओं की बमबारी में ध्वस्त हो चुके थे और उन बमों के गिरने के साथ ही, भयभीत नागरिक सुरक्षा की ख़ातिर इस मैथोडिस्ट सैंट्रल हॉल के तहख़ाने में पनाह ले रहे थे, जो कि लन्दन में आसमान से होने वाले हमलों से बचाने वाला एक प्रमुख आश्रय स्थल था।
उन हमलों के दौरान लगभग 2000 लोग सुरक्षा की ख़ातिर इस हॉल में एकत्र हुए थे और उसके बाद दुनिया के कुछ देश 1946 में इस हॉल में इकट्ठा हुए थे, मक़सद था– आने वाली पीढ़ियों को युद्ध के अभिशाप से बचाने के लिए। एंतोनियो गुटेरेश ने कहा, कई तरह से ये हॉल उस चीज़ का भौतिक प्रतिनिधित्व करता है, जिसे संयुक्त राष्ट्र कहा जाता है : एक ऐसा स्थान जिसमें लोग अपना विश्वास समाहित करते हैं– शान्ति की ख़ातिर, सुरक्षा के लिए, एक बेहतर जीवन की आस में।
1926 की दुनिया, 1946 की दुनिया नहीं
यूएन प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने ध्यान दिलाया कि प्रथम यूएन महासभा के सत्र के 80 साल बाद इसकी सदस्यता 51 से बढ़कर 193 देशों तक पहुंच गई है। यूएन महासभा देशों के परिवार की संसद है। यह हर एक आवाज़ को बुलन्द करने के लिए एक मंच है, सहमति बनाने के लिए स्थान और सहयोग की एक मशाल।
ग़ौरतलब है कि यूएन महासभा, इस विश्व संगठन का एक ऐसा निकाय है जहां सभी देशों को समानता के साथ बोलने का अधिकार है और यह संयुक्त राष्ट्र की एक नीति-निर्माता व देशों की प्रतिनिधिक संस्था है। यूएन महासचिव ने पिछले एक दशक का झरोखा पेश करते हुए कहा कि ग़ाज़ा, यूक्रेन और सूडान में युद्ध बहुत पीड़ादायक और कल्पना से भी कहीं अधिक क्रूर रहे हैं, कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने जैसे एक रात बीतने के साथ ही ज़िद्दी रूप धारण कर लिया है और महामारी ने राष्ट्रवाद की अग्नियों में ईंधन झोंका, जिसने विकास और जलवायु कार्रवाई पर प्रगति को ठप कर दिया।
एंतोनियो गुटेरश ने ज़ोर देते हुए बताया कि वर्ष 2025 अन्तरराष्ट्रीय सहयोग और यूएन मूल्यों के लिए एक विशालकाय चुनौतीपूर्ण वर्ष साबित हुआ है। सहायता में कटौती की गई। विषमताओं का दायरा बढ़ा। जलवायु आपदा में बढ़ोतरी हुई। अन्तरराष्ट्रीय क़ानून की धज्जियां उड़ाई गईं। सिविल सोसायटी पर दम सघन हुआ। दंडमुक्ति के साथ पत्रकारों की हत्याएं की गईं और संयुक्त राष्ट्र के कर्मचारियों को बार-बार धमकियां दी गईं, उन्हें ख़तरे में डाला गया या उनकी हत्याएं की गईं, ड्यूटी को अंजाम देते समय।
संयुक्त राष्ट्र ने बताया कि वर्ष 2025 में दुनियाभर में सैन्य व्यय 2.7 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जो कि ब्रिटेन के मौजूदा सहायता बजट से 200 गुना अधिक है यानी ब्रिटेन की पूरी अर्थव्यवस्था के लगभग 70 प्रतिशत के समान। जीवाश्म ईंधन से लाभों में बढ़ोतरी जारी रही, जबकि पृथ्वी पर तापमान वृद्धि के रिकॉर्ड टूट रहे हैं और साइबर स्थान में, ऐल्गोरिदम ने झूठी जानकारियों को फ़ायदा पहुंचाया है, नफ़रतों को ईंधन दिया है और सर्वसत्तावादियों को नियंत्रण के शक्तिशाली उपकरण दिए हैं।
एक बेहतर दुनिया की ख़ातिर
यूएन महासचिव ने भविष्य पर नज़र टिकाते हुए, एक ऐसी अन्तरराष्ट्रीय व्यवस्था के लिए पुकार लगाई जिसमें आधुनिक दुनिया की झलक मिले, जिसमें अन्तरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणालियों और सुरक्षा परिषद में सुधार शामिल हों। उन्होंने कहा, ऐसे में जबकि शक्ति के वैश्विक केन्द्र अपनी स्थितियां बदल रहे हैं, हमारे पास एक ऐसा भविष्य बनाने की सम्भावना मौजूद है, जो या तो अधिक न्यायसंगत हो, या फिर अधिक अस्थिर।
यूएन महासचिव ने लन्दन में प्रतिनिधियों को याद दिलाया कि संयुक्त राष्ट्र ने जब अपने दरवाज़े पहली बार खोले थे, तो उसके बहुत से कर्मचारी युद्ध के ज़ख़्मों से घायल थे, किसी का कोई अंग नहीं था, किसी को कोई गहरा घाव था, किसी के शरीर पर आग से जलने के निशान थे।
उन्होंने कहा, एक भ्रम लगातार फैलाया जा रहा है और आजकल तो हर दिन बहुत अधिक शोर के साथ कि शान्ति कोई नादान गतिविधि है। ये कि वास्तविक राजनीतिक केवल, आत्म-हित और शक्ति की राजनीति है। मगर संयुक्त राष्ट्र के संस्थापक वास्तविकता से अनजान नहीं थे बल्कि इसके उलट उन्होंने युद्ध देखा था और वो जानते थे : शान्ति, न्याय और समानता सभी के लिए सर्वाधिक साहसिक, सर्वाधिक यथार्थवादी और सर्वाधिक अनिवार्य क्रियाकलाप है।