Festival Posters

Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia

दक्षिण सूडान एक ख़तरनाक पड़ाव पर, आम नागरिक भुगत रहे टकराव का ख़ामियाज़ा

Advertiesment
Sudan at dangerous juncture as violent conflict escalates
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने दक्षिण सूडान में सरकार और विपक्ष के बीच 2018 में हुए शान्ति समझौते की रक्षा करने का आग्रह किया है, ताकि मानवीय आपात स्थिति से जूझ रहे देश में स्थिति को और अधिक बिखरने से रोका जा सके। दक्षिण सूडान में बढ़ते हिंसक टकराव और राजनीतिक तनाव से स्थाई शान्ति के प्रयासों के लिए ख़तरा उपज रहा है।  
 
यूएन मानवाधिकार परिषद में शुक्रवार को दक्षिण सूडान में हालात पर चर्चा पर हुई, जहां बढ़ते हिंसक टकराव और राजनीतिक तनाव से स्थाई शान्ति के प्रयासों के लिए ख़तरा उपज रहा है। मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने अपने सम्बोधन में कहा कि बदले की भावना से उठाए गए क़दमों से पूर्ण स्तर पर गृहयुद्ध भड़कने का ख़तरा है।
उन्होंने दक्षिण सूडान में मानवाधिकारों की स्थिति को एक ऐसा संकट क़रार दिया, जिसे दुनिया ने भुला दिया है। हम एक ख़तरनाक पड़ाव पर हैं, जहां बढ़ती हिंसा के साथ दक्षिण सूडान की राजनीतिक दिशा पर अनिश्चितता गहरा रही है, और शान्ति समझौते पर भीषण दबाव है।
 

आम नागरिकों पर हमले

दिसम्बर 2025 से अब तक सरकारी सैन्यबलों और विरोधी गुटों, दोनों पक्षों की ओर से देश के सात प्रान्तों में रिहायशी इलाक़ों में हमले किए गए हैं। इनमें जोंगलेई प्रान्त भी हैं, जहां 2.8 लाख लोग अपने घर से भागने के लिए मजबूर हुए हैं।
 
उच्चायुक्त कार्यालय ने इस वर्ष जनवरी में 189 आम नागरिकों के मारे जाने के मामलों में जानकारी जुटाई है और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं। उससे पिछले महीने की तुलना में मानवाधिकार हनन व दुर्व्यवहार के मामलों में 45 प्रतिशत का उछाल दर्ज किया गया है।
मानवाधिकार मामलों के प्रमुख ने कहा कि हवाई बमबारी, सुनियोजित हत्याओं, अपहरण और हिंसक टकराव सम्बन्धी यौन हिंसा समेत ताबड़तोड़ हमलों का ख़ामियाज़ा आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है। वोल्कर टर्क ने क्षोभ जताया कि जोंगलेई समेत अन्य प्रान्तों में सैन्य अनुशासन दरक चुका है और सैन्यबलों द्वारा आम नागरिकों की सुरक्षा के प्रति पूर्ण बेपरवाही दर्शाई जा रही है।
 
OHCHR के अनुसार, वर्ष 2025 में 5,100 लोग हताहत हुए थे, जो कि 2024 की तुलना में 40 प्रतिशत की वृद्धि है। मृतकों में 2 संयुक्त राष्ट्र कर्मचारी भी हैं।
 

अस्थिरता से ग्रस्त

विश्व के सबसे युवा देश दक्षिण सूडान ने वर्ष 2011 में सूडान से स्वाधीनता हासिल की थी, मगर उसके बाद से ही यह देश, टकराव और अस्थिरता से जूझता रहा है। वर्ष 2013 में राष्ट्रपति सल्वा कीर के वफ़ादार सैन्यबलों और पूर्व उप राष्ट्रपति रिएक मचार के समर्थकों के बीच गृहयुद्ध भड़क उठा था। 
कई वर्षों तक जातीय हिंसा, सामूहिक अत्याचार और मानवीय संकट जारी रहने के बाद 2018 में नाज़ुक हालात में एक शान्ति समझौते पर सहमति हुई। इस समझौते के बाद फ़रवरी 2020 में एक संक्रमणकालीन सरकार का गठन किया गया था, लेकिन उसके बाद से ही चुनाव स्थगित होते रहे हैं और सरकार और विरोधी पक्षों के बीच टकराव भड़का है।
 
बीते दिनों में हवाई बमबारी, भड़काऊ बयानबाज़ी की वजह से स्थिति से वैसी ही स्थिति फिर पनपने की आशंका है, जैसा कि वर्ष 2013 और 2016 में देखा गया था।
 

हेट स्पीच, मानवीय संकट

मानवाधिकार मामलों के प्रमुख ने बताया कि जातीय समूहों व समुदायों को निशाना बनाकर नफ़रतभरे संदेशों (हेट स्पीच) को फैलाया जा रहा है। 
 
उन्होंने यूएन मिशन (UNMISS) द्वारा सत्यापित एक ऑडियो रिकॉर्डिंग का उल्लेख किया, जिसमें एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने अपने सुरक्षाकर्मियों को आदेश दिया कि किसी को भी न छोड़ा जाए, आम नागरिकों के घरों, मवेशियों व संपत्तियों को बर्बाद कर दिया जाए।
फ़िलहाल देश में लाखों लोग मानवीय सहायता पर निर्भर हैं। सूडान में धधक रहे युद्ध की वजह से बड़ी संख्या में शरणार्थी और दक्षिण सूडान के लोग वापस लौटे हैं, जिससे मानवीय सहायता आवश्यकताओं में उछाल आया है।
 

सूडान से भागकर आए 13 लाख लोग

यूएन प्रवासन एजेंसी (IOM) ने बताया है कि दक्षिण सूडान के 13 लाख से अधिक नागरिक सूडान में लड़ाई से जान बचाने के लिए अपने देश लौटे हैं। परिचालन मामलों के लिए उप निदेशक उगोची डेनियल्स ने राजधानी जूबा से बताया कि दक्षिण सूडान, विश्वभर में विस्थापन से सर्वाधिक प्रभावित देशों में है, हालांकि, वैश्विक मीडिया में उसे इतनी प्रमुखता नहीं दी जाती है।
 
उन्होंने वीडियो लिन्क के ज़रिए जिनीवा में बताया कि देश में 1 करोड लोगों को मानवीय सहायता की आवश्यकता है और 23 लाख लोग दक्षिण सूडान की सीमाओं के भीतर ही विस्थापित होने के लिए मजबूर हैं। पिछले 2 महीनों में ही, 2.5 लाख लोग विस्थापित होने के लिए मजबूर हुए हैं और इसके बावजूद यह स्थिति अंतरराष्ट्रीय पटल पर उतनी गंभीरता से नज़र नहीं आती है।

Share this Story:

Follow Webdunia Hindi

अगला लेख

महिला दिवस से पहले सरकारी विद्यालयों में शौचालयों का हो निर्माण, योगी सरकार ने 42 जनपदों में जारी किए आदेश