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ईरान में प्रदर्शनकारियों के दमन, 'सैन्य हमलों की आशंका' पर यूएन ने जताई गहरी चिंता

यूएन सहायक महासचिव मार्था पॉबी ने बैठक में कहा, आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी

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हमें फॉलो करें UN Security Council holds emergency meeting on protests in Iran

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, शुक्रवार, 16 जनवरी 2026 (19:10 IST)
ईरान में पिछले 3 सप्ताह से जारी विरोध प्रदर्शन देशभर में एक व्यापक उथलपुथल में तब्दील हो गए हैं, जिनमें बड़ी संख्या में लोगों की मौतें हुई हैं। राजनीतिक एवं शान्तिनिर्माण मामलों के लिए यूएन सहायक महासचिव मार्था पॉबी ने गुरुवार को सुरक्षा परिषद की आपात बैठक में कहा कि प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध अत्यधिक बल प्रयोग से बचा जाना होगा और आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी। उन्होंने साथ ही ईरान पर संभावित सैन्य हमलों के संबंध में जारी सार्वजनिक वक्तव्यों पर आगाह किया कि हालात को बद से बदतर बनाने वाले ऐसे किसी भी क़दम को रोकना होगा।
 
सहायक महासचिव पॉबी ने संयुक्त राज्य अमेरिका के अनुरोध पर बुलाई गई इस बैठक को सम्बोधित करते हुए बताया कि 28 दिसम्बर 2025 को राजधानी तेहरान के ग्रैंड बाज़ार में दुकानदारों का एक समूह, ईरानी मुद्रा में आई तेज़ गिरावट, बढ़ती महंगाई के विरोध में प्रदर्शन करने के लिए एकत्र हुआ था।
ग़ौरतलब है कि ईरान एक गहरी आर्थिक मंदी के दौर से गुज़र रहा है और आम जीवन में गुज़र-बसर की परिस्थितियां निरन्तर बिगड़ती जा रही हैं। इसके बाद के दिनों में विरोध प्रदर्शन देश के अन्य शहरों में फैल गए और इन्होंने व्यापक स्तर पर सरकार-विरोधी प्रदर्शनों का रूप ले लिया। प्रदर्शनकारियों ने आर्थिक व वित्तीय कठिनाइयों से आगे बढ़कर अपनी पीड़ाओं को बयान किया।
 
प्रदर्शनकारियों ने सरकार के पतन की पुकार लगाई और आज़ादी, गरिमा व मानवाधिकारों की मांग की। कुछ प्रदर्शनकारियों ने राजशाही के समर्थन में भी नारे लगाए। सहायक महासचिव पॉबी के अनुसार, 8 जनवरी की शाम को तेहरान व अन्य बड़े शहरों में भड़के प्रदर्शनों से निपटने के लिए ईरान सरकार ने लगभग पूरी तरह से संचार व्यवस्था व इंटरनेट को ठप कर दिया, जो कि मोटे तौर पर अब भी लागू है।
यूएन की वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, विश्वविद्यालय के हॉस्टल को ख़ाली कराने का आदेश दिया गया, शहरी केन्द्रों पर अवरोध खड़े किए गए और प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध अत्यधिक बल का प्रयोग किया गया।
 
अत्यधिक बल प्रयोग पर क्षोभ
उन्होंने समाचार व मानवाधिकार समूहों के हवाले से बताया कि 8-10 जनवरी के दौरान सुरक्षाबलों की कार्रवाई में सैकड़ों, सम्भवत: हज़ारों प्रदर्शनकारी व अन्य लोग मारे गए हैं। संयुक्त राष्ट्र इन आंकड़ों की पुष्टि कर पाने में असमर्थ है।
 
मार्था पॉबी ने कहा कि ईरान में स्थिति तेज़ी से बदल रही है जो कि गहरी चिन्ता की वजह है। उन्होंने ध्यान दिलाया कि यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध सुरक्षाबलों द्वारा किए गए अत्यधिक बल प्रयोग पर गहरी चिन्ता व्यक्त की है और लोगों को हताहत होने से बचाए जाने की अहमियत को रेखांकित किया है।
महासचिव गुटेरेश ने ज़ोर देकर कहा है कि ईरान के सभी नागरिकों को अपने कष्ट शान्तिपूर्ण ढंग से बिना किसी भय के व्यक्त करने की अनुमति दी जानी होगी। अभिव्यक्ति की आज़ादी और शान्तिपूर्ण सभा करने का अधिकार अन्तरराष्ट्रीय क़ानून में निहित है और इसका पूर्ण रूप से सम्मान किया जाना होगा।
 
सैन्य हमले की आशंका पर अलार्म
सहायक महासचिव मार्था पॉबी ने कहा कि ईरान में सम्भावित सैन्य कार्रवाई के सम्बन्ध में दिए गए सार्वजनिक वक्तव्य गहरी चिन्ता की वजह हैं। उनके अनुसार, इस बाहरी पहलू के कारण पहले ही एक भड़काऊ स्थिति और अस्थिर हो सकती है। हालात को बद से बदतर होने से बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाने होंगे।
 
उन्होंने कहा कि महासचिव का मानना है कि ईरान, उसके परमाणु कार्यक्रम व वहां विरोध प्रदर्शनों समेत अन्य सभी मुद्दों को कूटनीति व संवाद के ज़रिए ही सर्वोत्तम ढंग से सुलझाया जा सकता है।
यूएन की वरिष्ठ अधिकारी ने इस संवेदनशील क्षण में सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने और ऐसे किसी भी क़दम से परहेज़ बरतने का आग्रह किया, जिससे और अधिक संख्या में लोगों की जान जाए या फिर एक वृहद क्षेत्र में टकराव भड़क उठे।

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