एक ऐसे दौर में जब बहुपक्षीय प्रणाली पर न केवल दबाव बढ़ रहा है, बल्कि उस पर हमले भी हो रहे हैं, सदस्य देशों को संयुक्त राष्ट्र के पक्ष में लड़ाई लड़नी होगी। संयुक्त राष्ट्र महासभा की अध्यक्ष ऐनालेना बेयरबॉक ने बुधवार को जनरल असेम्बली के 80वें सत्र के पुनः आरम्भ होने के दौरान अपनी प्राथमिकताएं पेश करते हुए अपनी यह पुरज़ोर अपील जारी की है।
महासभा अध्यक्ष ऐनालेना बेयरबॉक ने कहा कि नया साल वेनेज़ुएला और ईरान में संकटों के साथ शुरू हुआ है। पिछले साल सितम्बर में जनरल असेम्बली के ऐतिहासिक 80वें सत्र की शुरुआत के समय की तुलना में अन्तरराष्ट्रीय समुदाय आज और भी अधिक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है।
उन्होंने विविध क्षेत्रों में संगठन के कामकाज का उल्लेख करते हुए कहा कि दुनिया को संयुक्त राष्ट्र की ज़रूरत है। इस क्रम में महासभा प्रमुख ने ग़ाज़ा में जीवनरक्षक सहायता प्रदान करने से लेकर अफ़ग़ानिस्तान में लड़कियों की शिक्षा के लिए पैरवी, सूडान में आम नागरिकों की सुरक्षा और यूक्रेन में युद्ध समाप्त करने के लिए प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के बिना दुनिया किसी भी तरह से बेहतर स्थिति में नहीं होगी, और इसके लिए लड़ाई लड़नी हर तरह से सार्थक है।
यूएन चार्टर की रक्षा
संयुक्त राष्ट्र महासभा, यूएन का मुख्य नीति-निर्माण अंग है, जिसमें सभी 193 सदस्य देश शामिल हैं और प्रत्येक को समान मताधिकार प्राप्त है। महासभा के नियमित सत्र के दौरान हर वर्ष सितम्बर से दिसम्बर के दौरान बैठकें होती हैं और इसके बाद आवश्यकता के अनुसार उन्हें बुलाया जा सकता है। पिछले वर्षों के विपरीत, महासभा अध्यक्ष ने पुनः आरम्भ हुए सत्र के दौरान आगामी बैठकों की विस्तृत सूची का ज़िक्र नहीं किया।
उन्होंने कहा कि महासभा अध्यक्ष के रूप में आज और अपने अगले 237 दिनों के कार्यकाल में मेरी मुख्य प्राथमिकता है : आप सभी के साथ मिलकर इस संस्था, इसके चार्टर और इसमें निहित सिद्धान्तों की रक्षा करना। ऐनालेना बेयरबॉक के अनुसार, अब यह बात तेज़ी से स्पष्ट होती जा रही है कि हम सभी एक ही सुर में नहीं गा रहे हैं और न ही सभी लोग संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के प्रति समान रूप से प्रतिबद्ध हैं।
वैश्विक व्यवस्था की रक्षा अहम
महासभा अध्यक्ष ने सभी क्षेत्रों के सदस्य देशों से आह्वान किया कि एकजुट होकर, संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धान्तों की रक्षा और उन्हें बढ़ावा देने के लिए एक अन्तर-क्षेत्रीय गठबन्धन का निर्माण किया जाना होगा, ताकि अन्तरराष्ट्रीय क़ानून और मानवाधिकारों पर आधारित वैश्विक व्यवस्था की रक्षा की जा सके।
इसका अर्थ है हर दिन और अधिक प्रयास करना। इसका अर्थ है साहस के साथ खड़ा होना। इसका अर्थ है अपनी प्रतिबद्धता को फिर से मज़बूत करना। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि इसका अर्थ मतभेदों को पाटने और समझौते के रास्ते की तलाश का निरन्तर प्रयास करना भी है, बशर्ते कि समझौता, तुष्टीकरण में न बदल जाए।
नए नेतृत्व का समय...
ऐनालेना बेयरबॉक की एक अन्य प्रमुख प्राथमिकता, संयुक्त राष्ट्र के अगले महासचिव के चयन से सम्बन्धित है। वर्तमान यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश का कार्यकाल इस साल दिसम्बर में समाप्त हो रहा है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ही सुरक्षा परिषद की सिफ़ारिश पर, महासचिव की नियुक्ति करती है।
इसके लिए चयन प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है। यूएन महासभा अध्यक्ष ने बताया कि उम्मीदवारों के साथ इंटरएक्टिव सम्वाद 20 अप्रैल के सप्ताह में निर्धारित किए गए हैं, जिसमें वे अपने दृष्टिकोण वक्तव्य प्रस्तुत करेंगे।
महिला उम्मीदवारों को प्रोत्साहन
यूएन महासभा अध्यक्ष ने सदस्य देशों से आग्रह किया कि वे योग्य उम्मीदवारों को समय से पहले प्रस्तुत करें ताकि वे इन सम्वादों में हिस्सा ले सकें। उन्होंने देशों को कहा कि विशेष रूप से महिला उम्मीदवारों को नामांकित कि जाने पर गम्भीरता से विचार करना होगा।
इस संस्था के लिए कठिन समय में अगले महासचिव के चयन की प्रक्रिया हमारे लिए यह स्पष्ट सन्देश देने का अवसर है कि हम कौन हैं और किन मूल्यों के लिए खड़े हैं। महासभा अध्यक्ष ऐनालेना बेयरबॉक ने कहा कि अगला महासचिव केवल इस संस्था का चेहरा और आवाज़ ही नहीं होगा, बल्कि हमारा चुनाव यह भी बताएगा कि क्या यह संगठन वास्तव में पूरी मानवता की सेवा कर रहा है, जिसमें आधे लोग महिलाएं और लड़कियां हैं।
उनके अनुसार, संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व का चयन यह तय करेगा कि हम युद्ध, जलवायु परिवर्तन और असमानता जैसी वैश्विक चुनौतियों से किस तरह से निपटते हैं। महासभा अध्यक्ष ने कहा कि हमें किसी ऐसे व्यक्ति की ज़रूरत है जो इस चुनौती को सम्भाल सके, जो भविष्य की दिशा तय कर सके और हमारे चार्टर के सिद्धान्तों की संरक्षण के लिए पूरी लगन के साथ खड़ा हो।