Publish Date: Thu, 04 Jun 2026 (12:19 IST)
Updated Date: Thu, 04 Jun 2026 (13:10 IST)
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रमुख डॉक्टर टैड्रॉस ऐडहेनॉम घेबरेयेसस कहा है कि कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) में इबोला के प्रकोप का सामना करने के प्रयासों में प्रगति के संकेत मिल रहे हैं, अलबत्ता परीक्षण, निगरानी और सामुदायिक विश्वास जीतने में अब भी बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं।
डॉक्टर टैड्रॉस ने डीआरसी (DRC) की यात्रा से लौटने के बाद जिनीवा में जानकारी देते हुए उम्मीद जताई कि इस बीमारी के प्रकोप को एक बड़ी बढ़त मिल गई थी और हम अब भी पीछे हैं, लेकिन डीआरसी सरकार के नेतृत्व में हम तेज़ी से बढ़त बना रहे हैं।
यह प्रकोप इबोला वायरस के एक दुर्लभ स्ट्रेन 'बुंडिबुग्यो' (Bundibugyo) के कारण फैला है, जिसका फ़िलहाल कोई इलाज मौजूद नहीं है। डॉक्टर टैड्रॉस ने डीआरसी में 60 मौतों सहित 344 मामलों की पुष्टि की है। इस प्रकोप का केन्द्र पूर्वी प्रान्त इतूरी (Ituri) है, जबकि कुछ मामले उत्तर और दक्षिण कीवू प्रान्तों में भी देखने को मिले हैं। यह संकट सशस्त्र समूहों की हिंसा और गम्भीर मानवीय ज़रूरतों के बीच गहराया हुआ है।
इसके जवाब में इतूरी की राजधानी बूनिया (Bunia) में तीन उपचार केन्द्र चलाए जा रहे हैं और पांच अन्य क्षेत्रीय शहरों में भी इकाइयां स्थापित की गई हैं। इस बीच पड़ोसी देश युगांडा में 15 पुष्ट मामले और एक मौत दर्ज की गई है। WHO के जोखिम मूल्यांकन के अनुसार, ख़तरा राष्ट्रीय स्तर पर 'बेहद गम्भीर' और क्षेत्रीय स्तर पर 'उच्च' बना हुआ है, जबकि वैश्विक जोखिम कम है।
अब तक डीआरसी में छह और युगांडा में दो लोग ठीक हो चुके हैं, जो यह साबित करता है कि शुरुआती इलाज मिलने पर इस बीमारी से बचा जा सकता है।
प्रयास तेज़
डॉक्टर टैड्रॉस ने प्रमुख चुनौतियों का ज़िक्र किया, विशेष रूप से प्रयोगशाला की क्षमता बढ़ाने और सम्पर्क की निगरानी यानी मरीज़ों के सम्पर्क में आए लोगों की पहचान में सुधार करने पर ज़ोर दिया। असुरक्षा और विस्थापन के कारण, इस समय केवल 45% लोगों के बारे में ही सटीक जानकारी जुटाई जा सकी है, लेकिन संक्रमण के प्रकोप पर क़ाबू पाने के लिए इस आंकड़े को 90% से अधिक करने की आवश्यकता है।
WHO ने देशों से पूर्ण यात्रा प्रतिबन्धों को हटाने का भी आग्रह किया, क्योंकि इससे आवश्यक सामान की आपूर्ति श्रृंखला बाधित हो रही है। इसके बजाय एजेंसी ने सीमाओं और हवाई अड्डों पर निकासी के स्तर पर जांच की सिफ़ारिश की है।
सामुदायिक विश्वास
डॉक्टर टैड्रॉस ने कहा, समुदाय का अविश्वास एक गम्भीर बाधा है। कुछ स्थानीय नेताओं का अब भी मानना है कि इबोला जैसी कोई बीमारी असल में है ही नहीं। हालांकि इसकी रोकथाम या इलाज के लिए तीन वैक्सीनों के टीके बनाने पर काम चल रहा है।
फिर भी डॉक्टर टैड्रॉस ने ज़ोर देकर कहा कि केवल विज्ञान ही काफ़ी नहीं है, इस प्रकोप को समाप्त करने की कुंजी जैव चिकित्सा नहीं है। यह नेतृत्व, ज़िम्मेदारी, साझेदारी और विश्वास है।
कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य ने अतीत में 16 बार इबोला के प्रकोपों का सामना किया है और डॉक्टर टैड्रॉस ने इस बात पर ज़ोर दिया कि सफलता का वास्तविक पैमाना इस बीमारी को भविष्य में दोबारा लौटने से रोकना और दीर्घकालिक रूप से स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं को मज़बूत करना होगा।