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बजट 2026-27 में महिलाओं और बच्चों पर खासा फोकस, महिला सशक्तिकरण के साथ बाल बजट में भी इजाफा

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Children budget increased in the Union Budget
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए आम बजट 2026–27 में महिलाओं और बच्चों पर खासा फोकस किया गया है बजट में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण पर विशेष जोर देने  के साथ बाल बजट में भी बढ़ोत्तरी की गई है। बजट भाषण में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने MSME क्षेत्र में महिलाओं के 10 हजार करोड़ रुपए के एसएमई ग्रोथ फंड स्थापित करने की घोषणा की है। जो महिला उद्यमियों को इक्विटी सपोर्ट प्रदान करेगा। इससे छोटे और मध्यम स्तर के महिला-नेतृत्व वाले व्यवसायों को विस्तार करने में मदद मिलेगी।

इसके  साथ केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नये बजट में लखपति दीदी योजना का दायरा बढ़ाने की घोषणा की है जिसके परिणामस्वरूप अब लखपति दीदी योजना से जुड़ी महिलाएं  अपने उत्पादों को  सामुदायिक स्वामित्व वाले रिटेल आउटलेट के माध्यम से बेचने के लिए स्वतंत्र होंगी। इसका उन्हें यह फायदा होगा कि वे अपने उत्पादों का सही मूल्य प्राप्त कर अपनी सालाना आय बढ़ा सकेंगी। इन रिटेल आउटलेट्स को शी  मार्ट्स  के नाम से जाना जाएगा। इन शी मार्ट्स की विशेषता यह होगी कि इनका स्वामित्व भी लखपति दीदी योजना से लाभान्वित होने वाली महिलाओं के समूहों के पास होगा। 

पहली बार महिला उद्यमियों के लिए टर्म लोन, मेंटरशिप और कस्टमाइज्ड क्रेडिट प्रोडक्ट्स की सुविधा को भी विस्तारित किया गया है, जिससे स्टार्टअप शुरू करना और कारोबार बढ़ाना आसान होगा। बजट में महिलाओं और बालिकाओं की बचत, रोजगार और सुरक्षा पर खास ध्यान दिया गया है। 
 
केंद्रीय बजट में बाल बजट में बढ़ोत्तरी- बजट में बच्चों के लिए आवंटन में मामूली लेकिन अहम बढ़ोतरी की गई है। केंद्रीय बजट में बाल बजट की हिस्सेदारी भी 2.29 प्रतिशत से बढ़कर 2.47 प्रतिशत हो गई है। हालांकि, GDP के अनुपात में यह बढ़ोतरी 0.33 प्रतिशत से बढ़कर सिर्फ 0.34 प्रतिशत रही, जिससे बच्चों पर सार्वजनिक निवेश का कुल स्तर अब भी सीमित नजर आता है।
 
CRY–चाइल्ड राइट्स एंड यू के बजट विश्लेषण के अनुसार, 2026–27 (बजट अनुमान) में बच्चों से जुड़े कुल आवंटन बढ़कर ₹1,32,296.85 करोड़ हो गए हैं, जो 2025–26 (बजट अनुमान) में ₹1,16,132.5 करोड़ थे। इस तरह बाल बजट में ₹16,164.35 करोड़ की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि, यह बढ़ोतरी बच्चों को लेकर सरकारी प्राथमिकताओं में किसी बड़े बदलाव की बजाय सीमित और क्रमिक सुधार को ही दर्शाती है।

बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए चाइल्ड राइट्स एंड यू (CRY ) की सीईओ पूजा मारवाहा ने कहा, “बच्चों के लिए बजट में बढ़ोतरी सकारात्मक संकेत है, लेकिन भारत की बड़ी बाल आबादी और उनकी बढ़ती विकासात्मक जरूरतों को देखते हुए निवेश का स्तर अभी भी कम है। स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा में हुई क्रमिक बढ़ोतरी स्वागतयोग्य है, लेकिन समावेशी और सतत विकास के लिए बच्चों को कहीं अधिक स्पष्ट प्राथमिकता देनी होगी।”
 
स्वास्थ्य और पोषण पर फोकस- बजट में मातृ एवं बाल स्वास्थ्य से जुड़ी योजनाओं के लिए भी कुछ बढ़ोतरी की गई है। प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य, स्वास्थ्य प्रणाली सुदृढ़ीकरण, राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम और राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन के फ्लेक्सिबल पूल का बजट ₹261.15 करोड़ बढ़ाकर ₹4,591.58 करोड़ किया गया है।
 
सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 योजना के बजट में 5.19 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर इसे ₹19,635 करोड़ किया गया है। वहीं पीएम पोषण शक्ति निर्माण योजना के लिए ₹12,749.99 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वर्ष से 2 प्रतिशत अधिक है।
 
इसके अलावा, जल जीवन मिशन को वित्त वर्ष 2024–25 के बाद एक बार फिर बाल बजट में शामिल किया गया है। इसके लिए ₹6,736.36 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जो बच्चों के स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित पेयजल की अहम भूमिका को रेखांकित करता है।
 
शिक्षा में कुछ सकारात्मक संकेत-शिक्षा के क्षेत्र में भी कुछ योजनाओं को बढ़ावा मिला है। मिशन वात्सल्य के बजट में 3.33 प्रतिशत की मामूली बढ़ोतरी कर इसे ₹1,550 करोड़ किया गया है। समग्र शिक्षा अभियान के लिए ₹42,100 करोड़ का आवंटन किया गया है, जो पिछले साल से 2.06 प्रतिशत अधिक है।
 
आदिवासी बच्चों की शिक्षा को बढ़ावा देने वाले एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों के बजट में 20 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी कर इसे ₹7,200 करोड़ किया गया है। नवोदय और केंद्रीय विद्यालयों के बजट में भी इजाफा हुआ है।
 
सरकारी स्कूलों में नवाचार और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने के लिए 2026–27 में अटल टिंकरिंग लैब्स के लिए ₹3,200 करोड़ का प्रावधान किया गया है। वहीं, स्किल इंडिया कार्यक्रम को बाल बजट में शामिल करना राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप कदम माना जा रहा है।
 
छात्रवृत्ति योजनाओं में मामूली बदलाव-हालांकि, हाशिए पर रहने वाले समुदायों के बच्चों के लिए छात्रवृत्ति योजनाओं में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं दिखती। अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए प्री और पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्तियों के बजट में कोई बदलाव नहीं किया गया है। वहीं ओबीसी, ईबीसी, डीएनटी और दिव्यांग बच्चों के लिए छात्रवृत्तियों में केवल मामूली बढ़ोतरी की गई है।
 
हालांकि, अनुसूचित जनजातियों के विकास से जुड़ी पीएम वनबंधु कल्याण योजना के बजट में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की गई है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि कुल मिलाकर समानता पर आधारित योजनाओं को संतुलित प्राथमिकता नहीं मिली है।
 
बाल बजट 2026-27 कुछ सकारात्मक संकेत जरूर देता है, लेकिन यह बड़े स्तर पर बदलाव की बजाय सीमित सुधार को ही दर्शाता है। यदि भारत को समावेशी और सतत विकास के रास्ते पर आगे बढ़ना है, तो आने वाले बजटों में बच्चों को वित्तीय योजना के केंद्र में कहीं अधिक मजबूती से रखना होगा।

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