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उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ कैबिनेट के 10 बड़े फैसले

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Yogi Cabinet decisions
Yogi Cabinet decisions: मुख्‍यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में राज्य के विकास और कई अन्य मुद्दों पर महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। इनमें यमुना एक्सप्रेसवे मेडिकल डिवाइस पार्क में निवेश के लिए भूमि सब्सिडी, 8 शहरों के विकास के लिए राशि का आवंटन, संपत्ति की रजिस्ट्री, समाधान योजना समेत अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर फैसलों लिए गए। 

यमुना एक्सप्रेसवे मेडिकल डिवाइस पार्क 

बैठक में यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र में मेडिकल डिवाइस निर्माण इकाई स्थापित करने से जुड़े प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। इसके तहत टीआई मेडिकल्स प्रा लि को भूमि सब्सिडी प्रदान करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई है। कंपनी द्वारा गौतमबुद्ध नगर स्थित यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (यीडा) के मेडिकल डिवाइस पार्क क्षेत्र में 4.48 हेक्टेयर भूमि पर करीब 215.20 करोड़ रुपए के निवेश से चिकित्सा उपकरण निर्माण इकाई स्थापित की जाएगी। यह परियोजना उत्तर प्रदेश की एफडीआई, एफसीआई और फॉर्च्यून इंडिया-500 निवेश प्रोत्साहन नीति-2023 के तहत प्रस्तावित है। कैबिनेट के निर्णय के अनुसार कंपनी को अनुमन्य सब्सिडी के तहत 14.77 करोड़ रुपए की राशि प्रतिपूर्ति के रूप में प्रदान की जाएगी। 

नए शहरों के विकास को रफ्तार

मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण/नए शहर प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत प्रदेश के आठ शहरों के विकास के लिए 425 रुपए करोड़ की धनराशि स्वीकृत करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इस योजना का उद्देश्य तेजी से बढ़ रही शहरी आबादी को ध्यान में रखते हुए नए शहरों का सुनियोजित और सुव्यवस्थित विकास करना तथा लोगों को बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराना है। कैबिनेट के निर्णय के अनुसार बरेली, वाराणसी, उरई, चित्रकूट, बांदा, प्रतापगढ़, गाजीपुर और मऊ में नए शहरों के समग्र विकास के लिए सीड कैपिटल के रूप में यह धनराशि जारी की जाएगी।
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संपत्ति की रजिस्ट्री से पहले दस्तावेजों की जांच अनिवार्य

बैठक में संपत्ति की रजिस्ट्री प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इसके तहत रजिस्ट्री से पहले खतौनी और स्वामित्व से जुड़े दस्तावेजों का परीक्षण अनिवार्य किया जाएगा, ताकि फर्जी और विवादित जमीन की रजिस्ट्री को रोका जा सके। निर्णय की जानकारी देते हुए स्टाम्प एवं पंजीयन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविन्द्र जायसवाल ने बताया कि वर्तमान समय में कई मामलों में यह देखा गया है कि संपत्ति के वास्तविक स्वामी के अलावा अन्य व्यक्ति द्वारा संपत्ति का विक्रय कर दिया जाता है। ऐसे मामलों के कारण बाद में विवाद उत्पन्न होते हैं और लोगों को लंबे समय तक मुकदमेबाजी और अन्य परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
 
प्रस्तावित संशोधन के तहत अधिनियम में धारा 22 और धारा 35 के बाद नई धारा 22-A, 22-B और 35-A जोड़ी जाएंगी। धारा 22-A के तहत कुछ श्रेणियों के दस्तावेजों के पंजीकरण पर रोक लगाई जा सकेगी। धारा 22-B के तहत पंजीकरण से पहले अचल संपत्ति की पहचान सुनिश्चित करने के प्रावधान किए गए हैं। वहीं धारा 35-A(1) के अनुसार यदि धारा 17(1) के अंतर्गत आने वाली अचल संपत्ति के पंजीकरण के लिए प्रस्तुत लिखतों के साथ स्वामित्व, अधिकार, पहचान, विधिपूर्ण कब्जा या अंतरण से संबंधित आवश्यक दस्तावेज संलग्न नहीं होंगे, जिन्हें राज्य सरकार राजपत्र में अधिसूचना के माध्यम से निर्धारित करेगी, तो पंजीकरण अधिकारी उस दस्तावेज को पंजीकृत करने से इनकार कर सकेगा।

एकमुश्त समाधान योजना 2026 को मंजूरी

विकास प्राधिकरणों, आवास एवं विकास परिषद तथा विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरणों की संपत्तियों के डिफॉल्टरों के लिए एकमुश्त समाधान योजना (ओटीएस) 2026 लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। इस योजना का उद्देश्य लंबे समय से बकाया धनराशि की वसूली करना और डिफॉल्टर आवंटियों को राहत देना है। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि विकास प्राधिकरणों और संबंधित संस्थाओं में संपत्तियों से जुड़े कुल 18,982 डिफॉल्टर प्रकरण हैं, जिनमें करीब 11,848.21 करोड़ रुपये की धनराशि बकाया है। इसी तरह मानचित्र स्वीकृति से जुड़े 545 डिफॉल्टर मामलों में लगभग 1,482.10 करोड़ रुपये की राशि लंबित है। इन बकाया रकम की वसूली के लिए ओटीएस योजना लाई जा रही है।

सरकारी कर्मचारियों के आचरण नियमों में बदलाव

उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारियों की आचरण नियमावली, 1956 के नियम-21 एवं नियम 24 में संशोधन प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। इस बदलाव का उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों के निवेश और संपत्ति से जुड़े मामलों में अधिक पारदर्शिता लाना है। इन संशोधनों से सरकारी कर्मचारियों की वित्तीय गतिविधियों में पारदर्शिता बढ़ेगी और जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी। संशोधन के तहत नियम-21 में यह व्यवस्था की जा रही है कि यदि कोई सरकारी कर्मचारी एक कैलेंडर वर्ष में अपने मूल वेतन के छह महीने से अधिक की राशि स्टॉक, शेयर या अन्य निवेश में लगाता है, तो उसे इसकी सूचना अपने समुचित प्राधिकारी को देनी होगी। इसी तरह नियम-24 में भी बदलाव किया गया है। अब यदि कोई कर्मचारी दो महीने के मूल वेतन से अधिक मूल्य की कोई चल संपत्ति खरीदता है, तो उसे इसकी जानकारी संबंधित प्राधिकारी को देनी होगी। पहले यह सीमा एक महीने के मूल वेतन के बराबर थी।

लखवार और रेणुकाजी बांध परियोजना

उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में निर्माणाधीन दो महत्वपूर्ण जल परियोजनाओं में उत्तर प्रदेश की वित्तीय हिस्सेदारी को मंजूरी दी गई। कैबिनेट ने लखवार मल्टीपरपज प्रोजेक्ट और रेणुकाजी डैम प्रोजेक्ट के लिए राज्य के हिस्से की धनराशि खर्च करने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की। कैबिनेट ने उत्तराखंड के देहरादून और टिहरी गढ़वाल जिले के लोहारी गांव के पास यमुना नदी पर निर्माणाधीन लखवार बहुउद्देशीय परियोजना में उत्तर प्रदेश के हिस्से के रूप में 356.07 करोड़ रुपये खर्च करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। 
 
इसी तरह हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में गिरी नदी पर निर्माणाधीन रेणुकाजी बांध परियोजना में भी उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी के रूप में 361.04 करोड़ रुपए खर्च करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इस परियोजना की कुल लागत 6946.99 करोड़ रुपए (प्राइस लेवल 2018) है, जबकि जल घटक की लागत 6647.46 करोड़ रुपए है। इन दोनों परियोजनाओं के पूरा होने के बाद उत्तर प्रदेश को कुल 3.721 बीसीएम (31.05 प्रतिशत) जल प्राप्त होगा। इस अतिरिक्त जल का उपयोग पूर्वी यमुना नहर प्रणाली और आगरा नहर प्रणाली के माध्यम से सिंचाई के लिए किया जाएगा। 

भिक्षावृत्ति प्रतिषेध अधिनियम में संशोधन

उत्तर प्रदेश भिक्षावृत्ति प्रतिषेध अधिनियम में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के 7 मई 2025 के आदेश के अनुपालन में लिया गया है। प्रस्तावित संशोधन के तहत अधिनियम की धारा 21 से कुष्ठ रोग से संबंधित प्रावधानों को हटाया जा रहा है। साथ ही इन प्रावधानों को मेंटल हेल्थकेयर एक्ट 2017 के अनुरूप बनाया जाएगा, ताकि कानून आधुनिक स्वास्थ्य और मानवाधिकार मानकों के अनुरूप हो सके। कैबिनेट की मंजूरी के बाद प्रस्तावित उत्तर प्रदेश भिक्षावृत्ति प्रतिषेध (संशोधन) विधेयक, 2026 को आगे की प्रक्रिया के लिए राज्य विधानमंडल में प्रस्तुत किया जाएगा।

शिक्षकों को भी मिलेगी कैशलेस चिकित्सा सुविधा

बैठक में उच्च शिक्षा विभाग से संबंधित एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। प्रस्ताव के तहत शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा प्रदान करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में जानकारी देते हुए प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शिक्षकों और शिक्षा क्षेत्र के प्रति अत्यंत संवेदनशील हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने 5 सितम्बर 2025 (शिक्षक दिवस) के अवसर पर उच्च शिक्षा के शिक्षकों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा प्रदान करने की घोषणा की थी। उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में कार्यरत नियमित एवं स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों के शिक्षकों, स्ववित्तपोषित मान्यता प्राप्त महाविद्यालयों के शिक्षकों तथा राज्य विश्वविद्यालयों में कार्यरत नियमित एवं स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों के शिक्षकों को इस योजना के अंतर्गत लाया जाएगा। इस योजना के अंतर्गत प्रति शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारी  2479.70 रुपए का प्रीमियम व्यय होगा। 

सिखों के आनंद विवाह रजिस्ट्रेशन के लिए नई नियमावली

बैठक में सिख समुदाय के विवाह पंजीकरण को आसान बनाने के लिए उत्तर प्रदेश आनंद विवाह रजिस्ट्रीकरण नियमावली, 2026 को प्रख्यापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। सिख धर्म में प्रचलित 'आनंद कारज' विवाह के पंजीकरण को सुगम बनाने के लिए यह नियमावली लागू की जा रही है। यह व्यवस्था आनंद मैरिज एक्ट, 1909 (संशोधित 2012) की धारा-6 के तहत राज्य सरकार को प्राप्त अधिकारों के आधार पर बनाई गई है। साथ ही यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट में दायर रिट याचिका अमनजोत सिंह चड्ढा बनाम भारत संघ व अन्य में 4 सितम्बर 2025 को दिए गए निर्देशों के अनुपालन में लिया गया है।
 
नई नियमावली के तहत आनंद विवाह के पंजीकरण के लिए तहसील स्तर पर उप जिलाधिकारी (एसडीएम) को रजिस्ट्रार, जनपद स्तर पर जिलाधिकारी को जिला रजिस्ट्रार, मंडल स्तर पर मंडलायुक्त को मंडलीय रजिस्ट्रार तथा राज्य मुख्यालय पर निदेशक, अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ को मुख्य रजिस्ट्रार नामित किया जाएगा। नियमावली के अनुसार विवाह के पक्षकार या उनके रिश्तेदार विवाह संपन्न होने की तिथि से तीन महीने के भीतर निर्धारित प्रारूप में 1500 रुपये के न्यायालय शुल्क स्टाम्प के साथ विवाह पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकेंगे। निर्धारित समय के बाद भी आवेदन देने की व्यवस्था होगी, लेकिन इसके लिए नियमानुसार विलंब शुल्क देना होगा।

कानपुर में गंगा नदी पर नए सेतु निर्माण

कानपुर में ट्रांसगंगा सिटी को शहर से जोड़ने के लिए गंगा नदी पर नया सेतु बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। यह कार्य अटल इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के तहत कराया जाएगा। इस परियोजना के अंतर्गत गंगा नदी पर चार लेन का उच्च स्तरीय सेतु और उससे जुड़े पहुंच मार्ग का निर्माण किया जाना है। 
 
इस परियोजना की कुल स्वीकृत लागत लगभग 753.13 करोड़ रुपए है। इसमें से 460 करोड़ रुपए की धनराशि अटल इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के तहत दी जाएगी, जबकि शेष राशि संबंधित प्राधिकरण अपने संसाधनों से खर्च करेगा। इस परियोजना से कानपुर क्षेत्र में औद्योगिक विकास और यातायात व्यवस्था को बड़ा लाभ मिलेगा।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

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