विद्युत सखी बनीं राजश्री, लिख रहीं बदलाव की नई कहानी
स्वयं सहायता समूह की ताकत, राजश्री शुक्ला ने बिजली बिल सेवा से जीता पूरे गांव का विश्वास
Publish Date: Fri, 27 Mar 2026 (11:30 IST)
Updated Date: Fri, 27 Mar 2026 (12:01 IST)
Rajshree Shukla Vidyut Sakhi: बाराबंकी की राजश्री शुक्ला आज उस बदलाव की मिसाल हैं, जो सरकारी योजनाओं और व्यक्तिगत मेहनत के संगम से संभव हुआ है। कभी सीमित संसाधनों के साथ जीवनयापन करने वाली राजश्री आज 'विद्युत सखी' के रूप में अलग पहचान बना चुकी हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा शुरू की गई इस पहल ने उन्हें न सिर्फ रोजगार दिया, बल्कि उन्हें अपने जिले में एक नई पहचान भी दी है। घर-घर जाकर बिजली बिल संग्रह करने का उनका काम आज हजारों लोगों के लिए सुविधा और भरोसे का प्रतीक बन चुका है।
घर-घर सेवा, गांव को मिली सुविधा
राजश्री का काम केवल बिल संग्रह तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण जीवन में एक बड़ी सुविधा लेकर आया है। उनके प्रयासों से गांव के लोगों को लंबी कतारों में खड़े होने से राहत मिली है और समय पर बिल जमा होने से बिजली विभाग के राजस्व संग्रह में भी सुधार हुआ है। अब तक वे 81,000 से अधिक बिजली बिल की राशि एकत्र कर चुकीं हैं। उनकी मेहनत का परिणाम है कि उन्होंने अभी तक कुल 18 करोड़ रुपए से अधिक की राशि का बिल जमा कराया है। आज उनकी वार्षिक आय 10 लाख रुपए से अधिक है, जो यह दर्शाती है कि सही अवसर मिलने पर ग्रामीण महिलाएं भी आर्थिक रूप से सशक्त बन कर अपने पैरों पर खड़ी हो सकतीं हैं।
राधा स्वयं सहायता समूह से मिली सफलता
राजश्री राधा स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं और उन्होंने वर्ष 2021 में मात्र 30,000 रुपए की बैंक सहायता से इस काम की शुरुआत की थी। शुरुआत में यह सफर आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने गांव-गांव जाकर जागरूकता शिविर लगाए, लोगों को डिजिटल भुगतान, बिल सेवाओं और सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी दी। कुछ समय बाद ही उनकी मासिक आय 80 हजार रुपये से अधिक हो चुकी है। उनकी ईमानदारी और मेहनत ने धीरे-धीरे लोगों का विश्वास जीत लिया। आज स्थिति यह है कि गांव की महिलाएं खुद उन्हें फोन कर बिल भुगतान में सहायता मांगती हैं। यह विश्वास ही उनकी सबसे बड़ी पूंजी बन गया है।
एक महिला से हजारों तक पहुंचा आत्मनिर्भरता का संदेश
राजश्री शुक्ला की इस उपलब्धि को राज्य स्तर पर भी सराहा गया है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित कार्यक्रम में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने उन्हें सम्मानित किया। उनकी सफलता न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह पूरे समाज के लिए एक प्रेरणा है। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि महिलाएं भी हर क्षेत्र में आगे बढ़कर न केवल खुद को, बल्कि समाज को भी सशक्त बना सकती हैं।
9 नवंबर 2024 को आयोजित “आकांक्षा हाट” कार्यक्रम के अवसर पर उत्तर प्रदेश की 5 मेधावी महिलाओं को सम्मानित किया गया, जिनमें विद्युत सखी राजश्री शुक्ला भी शामिल थीं। इसके अलावा उन्हें 15 अगस्त 2023 और 26 जनवरी 2024 और 15 अगस्त 2025 के बीच मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा प्रशस्तिपत्र देकर सम्मानित किया जा चूका है। उनकी उपलब्धियों के चलते उन्हें 15 अगस्त 2024 को दिल्ली के लाल किले पर प्रधानमंत्री की ओर से आमंत्रित किया गया, जहां वे ध्वजारोहण समारोह की साक्षी बनीं। इसके साथ ही 14 अगस्त 2024 को ग्रामीण विकास मंत्रालय में आयोजित बैठक एवं भोज कार्यक्रम में भी उन्हें विशेष रूप से आमंत्रित किया गया।
योगी सरकार की पहल विद्युत सखी से बदलता उत्तर प्रदेश
आज उत्तर प्रदेश में विद्युत सखियां सक्रिय रूप से अच्छा काम कर रही हैं, जिन्होंने पिछले कुछ वर्षों में हजारों करोड़ रुपये के बिजली बिल संग्रह कर राज्य की व्यवस्था को मजबूत किया है। यह पहल केवल एक योजना नहीं, बल्कि महिला सशक्तीकरण, डिजिटल सशक्तीकरण और ग्रामीण विकास का एक सशक्त मॉडल बन चुकी है। राजश्री शुक्ला जैसी महिलाएं इस बात का प्रमाण हैं कि जब सरकार की योजनाएं सही दिशा में लागू होती हैं और लोग उन्हें अपनाते हैं, तो बदलाव सिर्फ संभव नहीं, बल्कि स्थायी हो जाता है।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala
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