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काला नमक चावल, भगवान बुद्ध की धरती से विश्व बाजार तक पहुंची सदियों पुरानी विरासत

ओडीओपी से बनी सिद्धार्थनगर की वैश्विक पहचान, काला नमक चावल का उत्पादन 18 हजार हेक्टेयर तक पहुंचा, अब सिंगापुर व थाईलैंड जैसे देशों तक हो रहा है निर्यात, जिला प्रशासन को मिल चुके हैं कई पुरस्कार

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वेबदुनिया न्यूज डेस्क

सिद्धार्थनगर , बुधवार, 28 जनवरी 2026 (20:03 IST)
Kala Namak rice: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को सिद्धार्थनगर में 1000 करोड़ रुपए से ज्यादा की परियोजनाओं का शुभारंभ किया। भगवान बुद्ध की आध्यात्मिक धरती सिद्धार्थनगर आज केवल अपने धार्मिक महत्व के लिए ही नहीं, बल्कि काला नमक चावल के कारण देश दुनिया में एक नई पहचान बना रहा है। सदियों से चली आ रही यह पारंपरिक खेती अब उत्तर प्रदेश सरकार की ‘एक जनपद-एक उत्पाद’ (ओडीओपी) योजना के माध्यम से आधुनिक बाजार से जुड़कर विकास की नई कहानी लिख रही है। काला नमक चावल स्थानीय किसानों की आय बढ़ाने और जिले की अर्थव्यवस्था को सशक्त करने का भी माध्यम बन रहा है।

600 ईसा पूर्व से पिपरहवा में उगाया जा रहा विशिष्ट धान

काला नमक चावल का इतिहास लगभग 2600 साल से भी अधिक पुराना है। इसका उत्पादन 600 ईसा पूर्व से सिद्धार्थनगर के पिपरहवा क्षेत्र में होता आ रहा है। यह वही क्षेत्र है, जो भगवान बुद्ध के जीवन व उनके संदेशों से गहराई से जुड़ा है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, ज्ञान प्राप्ति के बाद जब महात्मा बुद्ध कपिलवस्तु लौटे, तब उन्होंने इस क्षेत्र के ग्रामीणों को आशीर्वाद स्वरूप काली भूसी वाले धान के दाने दिए थे। कहा जाता है कि बुद्ध ने इसकी विशिष्ट सुगंध को अपनी स्मृति से जोड़ते हुए कहा था कि यह महक सदैव उनकी याद दिलाती रहेगी। तभी से यह चावल धार्मिक आस्था व सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बन गया।

विशिष्ट सुगंध व औषधीय गुणों से बनी पहचान

काला नमक चावल अपनी विशिष्ट सुगंध व औषधीय गुणों के लिए जाना जाता है। पकने के बाद भी इसकी खुशबू लंबे समय तक बनी रहती है, जो इसे सामान्य चावल से अलग बनाती है। इसमें आयरन, जिंक व अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं, जिससे यह स्वास्थ्य के लिहाज से भी लाभकारी माना जाता है। इन्हीं गुणों के कारण इसे भगवान बुद्ध के प्रसाद के रूप में पूजा जाता है और आज यह स्वास्थ्य के प्रति जागरूक उपभोक्ताओं के बीच भी लोकप्रिय हो रहा है।

ओडीओपी योजना से बदला खेती का परिदृश्य

उत्तर प्रदेश सरकार की ओडीओपी योजना ने काला नमक चावल को नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। योजना के अंतर्गत चयन के बाद किसानों को बेहतर बीज, आधुनिक कृषि तकनीक, प्रशिक्षण, पैकेजिंग व ब्रांडिंग का सहयोग दिया गया। इससे काला नमक चावल की खेती को प्रोत्साहन मिला और इसका दायरा तेजी से बढ़ा। जहां पहले इसका उत्पादन क्षेत्र केवल 2642 हेक्टेयर तक सीमित था, वहीं आज यह बढ़कर 18,000 हेक्टेयर तक पहुंच चुका है। इस विस्तार से उत्पादन में वृद्धि हुई और किसानों की आमदनी में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला।

सिद्धार्थनगर का चावल अब विदेश तक

ओडीओपी योजना व जिला प्रशासन के निरंतर प्रयासों से काला नमक चावल अब केवल स्थानीय व राष्ट्रीय बाजार तक सीमित नहीं रहा। आज इसका निर्यात सिंगापुर व थाईलैंड जैसे देशों में किया जा रहा है। इसकी पृष्ठभूमि, सुगंध व स्वास्थ्यवर्धक गुणों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में काला नमक चावल की मांग बढ़ रही है। इससे सिद्धार्थनगर के किसानों को बेहतर मूल्य मिल रहा है और जिले की पहचान वैश्विक स्तर पर स्थापित हो रही है।

राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित हुआ जिला प्रशासन

काला नमक चावल के समग्र विकास, संरक्षण व प्रचार-प्रसार के लिए सिद्धार्थनगर जिला प्रशासन को राष्ट्रीय स्तर पर कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। इन प्रयासों के लिए जिला प्रशासन को प्रधानमंत्री पुरस्कार 2021, स्कॉच अवार्ड 2022 (गोल्ड) और राष्ट्रीय ‘वन डिस्ट्रिक्ट–वन प्रोडक्ट’ अवार्ड 2024 प्राप्त हुआ है। ये सम्मान न केवल प्रशासनिक कार्यों की सराहना हैं, बल्कि यह भी दर्शाते हैं कि पारंपरिक उत्पादों को सही दिशा देने से वे वैश्विक पहचान बना सकते हैं। कुल मिलाकर, ओडीओपी के माध्यम से काला नमक चावल आज विरासत से विकास की एक सफल कहानी बन चुका है। यह किसानों की समृद्धि, रोजगार सृजन और जिले की वैश्विक पहचान का मजबूत आधार बन रहा है।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

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