लोकल फॉर वोकल की अलख को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से उत्तरप्रदेश सरकार की पहल पर मेरठ में खादी एवं ग्रामोद्योग द्वारा भव्य खादी महोत्सव का आयोजन किया गया है। नए साल 2026 के अवसर पर यदि कोई एक ही स्थान पर देश के विभिन्न राज्यों के पारंपरिक, स्वदेशी और हस्तनिर्मित उत्पादों की खरीदारी करना चाहता है तो जीआईसी मैदान मेरठ में लगा यह महोत्सव एक बेहतरीन विकल्प बनकर उभरा है।
जिला ग्रामोद्योग विभाग द्वारा आयोजित इस महोत्सव में देश के कोने-कोने से आए उत्पादों के साथ-साथ रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम भी लोगों को खासा आकर्षित कर रहे हैं। उत्तरप्रदेश खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के इस आयोजन में सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के तहत जैविक गुड़, जड़ी-बूटियां, हर्बल और आयुर्वेदिक उत्पाद उचित दामों पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
महोत्सव में स्वयंसहायता समूहों द्वारा तैयार हस्तनिर्मित वस्तुएं अपनी लगन, कला और सृजनशीलता से हर किसी का मन मोह रही हैं, वहीं नव-उद्यमियों के नवाचार से भरपूर उत्पाद भी ग्राहकों को बरबस अपनी ओर खींच रहे हैं। कश्मीर, बंगाल, बिहार और जयपुर से आए हस्तशिल्प उत्पादों ने महोत्सव की रौनक में चार चांद लगा दिए हैं।
खास आकर्षण के रूप में कश्मीरी ड्राई फ्रूट्स की विभिन्न वैरायटी लोगों को खूब भा रही हैं। इसके अलावा खादी वस्त्र, फर्नीचर, कश्मीरी गर्म शॉल, सूट, मिट्टी से बने उत्पाद, सिल्क साड़ियां, रेडीमेड गारमेंट, कोट, ब्लेजर, सदरी, देशी घी, नमकीन, धूप-बत्तियां, गाय के गोबर से निर्मित उत्पाद, अचार, मुरब्बा, सिरका, आंवला उत्पाद, चटाइयां और अन्य स्वदेशी सामानों का विशाल बाजार सजा हुआ है।
जैविक गुड़ की अनोखी वैरायटी लोगों को हैरान भी कर रही है और लुभा भी रही है। मेवायुक्त सोंठ, अजवाइन और अदरक के गुड़ के साथ-साथ गाजर कतली से बना गुड़ खासा लोकप्रिय हो रहा है। भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप ठाकुरजी की ऊनी पोशाकें भी ट्रेंड में हैं। 26 जनवरी के नजदीक आने के कारण भक्त तिरंगे के रंगों वाली विशेष पोशाकें ऑर्डर पर तैयार करवा रहे हैं।
परिक्षेत्रीय ग्रामोद्योग अधिकारी मान्या चतुर्वेदी ने बताया कि स्वदेशी उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के साथ-साथ आगंतुकों के मनोरंजन के लिए 3 जनवरी तक विभिन्न कलाओं की प्रस्तुतियां होंगी। महोत्सव में कवि सम्मेलन, नृत्य प्रस्तुतियाँ और खादी फैशन शो विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगे। स्टेज कार्यक्रमों और मेले में प्रवेश पूरी तरह नि:शुल्क है।
महोत्सव के माध्यम से अलग-अलग जिलों की उन प्रतिभाओं को मंच दिया जा रहा है, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी और अपने दम पर सफलता हासिल की है। कुल मिलाकर मेरठ का खादी महोत्सव स्वदेशी सोच, सांस्कृतिक विविधता और आत्मनिर्भर भारत की भावना का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया है। Edited by : Sudhir Sharma