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विकास के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनने की ओर अग्रसर उत्तर प्रदेश

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Uttar Pradesh: Moving Towards Becoming a Leading State in Field of Development
- पर्यावरणीय संरक्षण, स्वच्छ ऊर्जा और संतुलित विकास को केंद्र में रखते हुए तैयार की गई विकसित यूपी की कार्ययोजना
- सीएम योगी आदित्यनाथ के सतत विकास के विजन को साकार करेगा विकसित यूपी का रोडमैप
- स्वच्छ एवं नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के प्रयोग को दिया जाएगा बढ़ावा
Uttar Pradesh News : उत्तर प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सतत एवं संपोषणीय विकास के विजन के अनुरूप प्रदेश के दीर्घकालिक विकास का रोडमैप ‘विकसित यूपी@2047’ तैयार किया है। इसके तहत पर्यावरणीय संरक्षण, स्वच्छ ऊर्जा और संतुलित विकास को केंद्र में रखते हुए कार्ययोजना बनाई गई है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य उत्तर प्रदेश को सतत विकास के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाना तथा राज्य में स्वच्छ एवं नवीकरणीय ऊर्जा, पारिस्थितिकी तंत्र के पुनर्जनन और जलवायु सहिष्णुता सुनिश्चित करना है।
 

स्वच्छ एवं नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के प्रयोग को दिया जाएगा बढ़ावा

‘विकसित यूपी@2047’ के विजन को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने ऊर्जा क्षेत्र में बड़े बदलाव का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके तहत उत्तर प्रदेश की कुल ऊर्जा क्षमता में गैर-जीवाश्म ईंधन के हिस्से को वर्ष 2047 तक 70 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए राज्य सरकार क्रमिक रूप से स्वच्छ एवं नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के प्रयोग को बढ़ावा देगी।
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इस क्रम में अल्पकालिक लक्ष्य वर्ष 2029-30 तक 29 प्रतिशत, 2035-36 तक 45 प्रतिशत और 2046-47 तक 70 प्रतिशत तक पहुंचाने की कार्ययोजना तैयार की गई है। इसके साथ ही स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए रूफटॉप सोलर क्षमता में भी वृद्धि की जा रही है। वहीं, बिजली वितरण में सुधार करते हुए एटी एंड सी लॉस को 8 से 10 प्रतिशत तक सीमित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
 

बुंदेलखंड, पूर्वांचल और पश्चिमी यूपी में विकसित होंगे ग्रीन हाइड्रोजन हब

रणनीतिक हस्तक्षेपों के तहत उत्तर प्रदेश में परमाणु ऊर्जा के विकास पर भी जोर दिया जा रहा है। इसके अंतर्गत राज्य में संभावित स्थलों की पहचान कर औद्योगिक क्लस्टरों में स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स में निवेश आकर्षित किया जाएगा।

इसके अलावा बुंदेलखंड, पूर्वांचल और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ग्रीन हाइड्रोजन हब विकसित किए जाएंगे, जिससे उर्वरक, रिफाइनिंग और भारी उद्योगों को स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध हो सके। इस क्रम में योगी सरकार ने पिछले 9 वर्षों में कई उल्लेखनीय प्रयास किए हैं, जिनमें सौर ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन, बायो-एनर्जी और इलेक्ट्रिक व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी नीतियां लागू करना प्रमुख है। साथ ही अयोध्या को देश की पहली सोलर सिटी के रूप में विकसित किया गया है, जिसके प्रयोगों को अन्य शहरों में भी क्रमिक रूप से लागू किया जाएगा।

आपदा प्रबंधन के सुदृढ़ीकरण के लिए बनेगा रियल-टाइम डैशबोर्ड

पर्यावरण संतुलन एवं जल संरक्षण के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। इसके तहत ‘नमामि गंगे’ कार्यक्रम के अंतर्गत गंगा व राज्य की अन्य नदियों के पुनर्जीवन पर कार्य तेज किया गया है। इसमें सीवेज और औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण, नदी एवं भूजल प्रबंधन तथा पुनर्चक्रित जल के उपयोग को बढ़ावा देना शामिल है।

साथ ही आपदा प्रबंधन तंत्र को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से बहु-आपदा जोखिम डेटा प्लेटफॉर्म विकसित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत बाढ़, सूखा, हीटवेव, वायु गुणवत्ता और फसल जोखिम से जुड़े आंकड़ों को एकीकृत किया जाएगा।

जीआईएस और रिमोट सेंसिंग तकनीक के माध्यम से जिला स्तर पर जोखिम का आकलन कर नुकसान को कम करने के लिए प्रभावी तंत्र विकसित किया जाएगा। इस क्रम में योगी सरकार रियल-टाइम डैशबोर्ड विकसित करेगी, जिसे आईएमडी, एनडीएमए और यूएन-स्पाइडर जैसी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से भी जोड़ा जाएगा।

स्टेट एक्शन ऑन क्लाइमेट चेंज 2.0 को किया गया लागू

वैश्विक जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को संतुलित करने के उद्देश्य से स्टेट एक्शन ऑन क्लाइमेट चेंज (यूपी एसएपीसीसी 2.0) को लागू किया गया है, जो जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

साथ ही वर्ल्ड बैंक समर्थित क्लीन एयर मैनेजमेंट प्रोग्राम के तहत राज्य में पीएम 2.5 के स्तर को कम करने के लिए 10 वर्षीय रोडमैप भी तैयार किया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल एवं दूरदर्शी नेतृत्व में तैयार किया गया यह रोडमैप उत्तर प्रदेश में न केवल पर्यावरणीय संतुलन को मजबूत करेगा, बल्कि वर्ष 2047 तक राज्य को सतत एवं संतुलित विकास के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
Edited By : Chetan Gour

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