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कौन हैं सतुआ बाबा? महंगी कारों के काफिले के साथ प्रयागराज माघ मेले में बने चर्चा का केंद्र

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हिमा अग्रवाल

प्रयागराज (उप्र) , शनिवार, 17 जनवरी 2026 (16:35 IST)
प्रयागराज माघ मेले में इस वर्ष साधु-संतों के वैभव और आधुनिक जीवनशैली को लेकर गहरी चर्चा और आत्ममंथन का दौर चल रहा है। करोड़ों रुपए की लग्ज़री गाड़ियों में पहुंचने वाले कुछ संत कौतूहल और सवाल दोनों का विषय बन गए हैं। इन्हीं में एक प्रमुख नाम है जगद्गुरु संतोष दास उर्फ सतुआ बाबा, जो अपने स्टाइल, हाइटेक शिविर और महंगे वाहनों के कारण लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं।

श्रद्धालुओं और आम लोगों के बीच कानाफूसी का विषय यह है कि सतुआ बाबा के काफिले में पहले लग्ज़री लैंड रोवर डिफेंडर और पोर्शे कार देखने को मिली और अब एक नई मर्सिडीज़ कार के आगमन ने मेले में आकर्षण और जिज्ञासा को और बढ़ा दिया है।

करोड़ों रुपए की इन गाड़ियों को देखकर लोग यह सोचने को मजबूर हैं कि जो संत ध्यान, तप, योग, साधना, जप और त्याग को जीवन का मूल आधार बताते हैं, उनके जीवन में भौतिक वैभव की यह झलक किस संकेत की ओर इशारा करती है? क्या आधुनिक सुविधाओं का उपयोग साधना के मार्ग में बाधा है या यह बदलते समय के साथ साधु जीवन की एक नई परिभाषा गढ़ रहा है?
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मर्सिडीज़ कार का पूजन और बाबा का पक्ष

लैंड रोवर डिफेंडर और पोर्शे के बाद जब सतुआ बाबा के काफिले में मर्सिडीज़ कार शामिल हुई, तो भक्त अचंभित रह गए। इस अवसर पर मर्सिडीज़ कार का विधि-विधान से पूजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में अनुयायी उपस्थित रहे।
 
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सतुआ बाबा ने कहा कि माघ मेला एक भारतीय परंपरा है। जिस प्रकार मेले में आने वाला हर व्यक्ति लौटते समय कुछ न कुछ लेकर जाता है, चाहे वह प्लास्टिक का गुब्बारा हो या फुटबॉल, उसी तरह मेले से कुछ न कुछ ग्रहण करना हमारी संस्कृति का हिस्सा रहा है।
 
मर्सिडीज़ कार को काफिले में शामिल किए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा, यह सनातन का काफिला है, जो निरंतर आगे बढ़ता रहता है। उन्होंने रामचरितमानस की चौपाई उद्धृत करते हुए कहा- चलत विमान कोलाहल होई, जय रघुवीर कहत सब कोई।सतुआ बाबा ने स्पष्ट किया कि सनातन की यात्रा कभी रुकती नहीं, बल्कि समय के साथ उसका विस्तार होता रहता है।
 
उन्होंने आगे कहा कि भविष्य में उनके काफिले में और भी नए वाहन शामिल हो सकते हैं- चाहे वह मोटरसाइकल हो या ई-रिक्शा। उनका कहना था कि भारत हर प्रकार की तकनीक और परिवहन के लिए पूरी तरह तैयार है। इसके माध्यम से वे यह संदेश देना चाहते हैं कि लोगों को भारत के विकास से जुड़ना चाहिए, संवाद स्थापित करना चाहिए और अनावश्यक विवादों से दूर रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत का सूर्य इतना तेजस्वी है कि वह अंधकार को स्वयं दूर कर देगा।
 

कौन हैं सतुआ बाबा

काशी के मणिकर्णिका घाट पर स्थित सतुआ बाबा का स्थाई आश्रम एक प्राचीन वैष्णव पीठ है, जिसकी स्थापना वर्ष 1803 में गुजरात निवासी संत जेठा पटेल ने की थी। संत बनने के बाद काशी आए जेठा पटेल ने इस आश्रम की नींव रखी, जिसके पीठाधीश्वर को सतुआ बाबा कहा जाता है। आश्रम में बटुकों को वैदिक शिक्षा प्रदान की जाती है।

 
वर्तमान में इस पीठ के मुखिया संतोष दास उर्फ सतुआ बाबा हैं। उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले के एक ब्राह्मण परिवार में जन्मे संतोष दास ने मात्र 11 वर्ष की आयु में गृह त्याग कर काशी का रुख किया और 19 वर्ष की उम्र में महामंडलेश्वर बने, जो अपने आप में एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड माना जाता है।
 

प्रभावशाली हस्तियों से निकटता

सतुआ बाबा न केवल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के करीबी माने जाते हैं, बल्कि देश के कई प्रमुख धार्मिक व्यक्तित्वों से भी उनके घनिष्ठ संबंध हैं। मोरारी बापू, बाबा रामदेव और जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरि से उनका सौहार्दपूर्ण समन्वय देखने को मिलता है।
 
इसका स्पष्ट उदाहरण वर्ष 2025 के महाकुंभ में देखने को मिला, जब सतुआ बाबा के जगद्गुरु बनने के अवसर पर आयोजित भव्य समारोह में देशभर से हजारों साधु-संतों ने भाग लिया। अत्यंत दिव्य और विशाल आयोजन के बीच विधिवत रूप से उन्हें जगद्गुरु की उपाधि प्रदान की गई।
 

साधना और साधनों के बीच सवाल

बाबा के हाईटेक प्रेम और आलीशान जीवनशैली को देखकर लोगों के मन में यह प्रश्न लगातार उठ रहा है कि जिसने एक क्षण में परिवार और सांसारिक बंधनों का त्याग कर दिया, उसके जीवन में महंगी गाड़ियां, ब्रांडेड चश्मे और आधुनिक वैभव का स्थान कैसे बन गया? क्या यह भी माया का ही एक रूप है या फिर साधना और साधनों के बीच संतुलन की कोई नई व्याख्या?
Edited By : Chetan Gour

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