पितरों के समान हैं ये वृक्ष, पक्षी और पशु

यदि आप श्राद्ध नहीं कर पा रहे हैं तो तृप्त करें इन वृक्ष, पक्षी और पशुओं को।

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पीपल-

इसमें जहां विष्णु का निवास है वहीं यह वृक्ष रूप में पितृदेव है। इन्हें जल अर्पण करें।

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बरगद-

इसमें शिव का भी निवास है और पितृ का भी, इसके नीचे बैठकर श्राद्ध करने का विधान है।

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बेल-

शिवजी को अत्यंत प्रिय बेल का वृक्ष लगाया जाय तो अतृप्त आत्मा को शान्ति मिलती है।

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कौआ-

कौओं को भोजन कराना अर्थात अपने पितरों को भोजन कराना माना गया है।

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हंस-

यह एक ऐसा पक्षी है जहां देव आत्माएं आश्रय लेती हैं। पुण्य आत्माएं इस योनि में भी जन्म लेती हैं।

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गरुड़-

भगवान गरुड़ के नाम पर ही गुरुड़ पुराण है। इनकी पूजा करें। यदि क्रोंच और सारस दिखे तो उसे भोजन खिलाएं।

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कुत्ता-

कुत्ते को भैरव सेवक और यम का दूत माना जाता है। कुत्ते को रोटी देते रहने से पितरों की कृपा बनी रहती है।

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गाय-

गाय में सभी देवी और देवताओं का निवास बताया गया है। धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्व है गाय का...

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हाथी-

हाथी को पूर्वजों का प्रतीक भी माना गया है। इसके अलावा वराह, बैल और चींटियों का उल्लेख है।

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मछली-

जब श्राद्ध पक्ष में चावल के लड्डू बनाए जाते हैं तो उन्हें मछलियों के लिए जल में विसर्जित करते हैं।

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कछुआ-

हिन्दू धर्म में कछुआ बहुत ही पवित्र उभयचर जंतु है।

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नागदेव-

नागदेव की पूजा की जाती है, ये पितरों का प्रतीक माने गए हैं।

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यह जानकारी पुराणों में वर्णित मान्यताओं पर आधारित हैं।

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