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इंदौर बन रहा क्राइम केपिटल, एक साल में 60 हत्‍याएं, कमिश्‍नरी के बाद भी क्‍यों साफ नहीं हो रही अपराध की गंदगी?

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वेबदुनिया न्यूज डेस्क

सफाई में हर साल अव्‍वल रहने वाले इंदौर में अपराधों और अपराधियों की सफाई नहीं हो पा रही है। यहां लगातार क्राइम का ग्राफ बढ़ता जा रहा है। साल 2025 में इंदौर में 60 से ज्‍यादा हत्‍याएं हो चुकी हैं। इस लिहाज से देखा जाए तो हर महीने करीब 6 हत्‍याएं इंदौर शहर में हो रही हैं।

बता दें कि हत्‍याओं का यह आंकड़ा पिछले साल यानी 2024 से ज्‍यादा है। पिछले 52 हत्याएं हुई थीं। सिर्फ दिवाली की रात ही 3 हत्‍याएं हो गई थी। चिंता की बात तो यह है कि यह तो सिर्फ हत्‍याओं के आंकडें हैं, इनके अलावा जो शहर में आए दिन लूट, सायबर फ्रॉड, दुष्‍कर्म, चोरी और चाकूबाजी आदि अपराध घटते हैं, वो अलग है।

साल : हत्‍याएं  
2022 : 72
2023 : 51  
2024 : 61 (12 महीने में)
2025 : 60 (10 महीने में)
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पहले 10 महीनों में ही 60 हत्‍याएं : बता दें कि शहर में पुलिस कमिश्नरी लागू होने के बाद भी हत्याएं और अन्‍य अपराध कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं। इस साल के पहले 10 महीनों में 60 से अधिक हत्याएं हो चुकी हैं। पिछले साल दस माह में 52 हत्याएं हुई थीं, जबकि इस बार दस माह में 57 हत्याएं हुई हैं, जो गत वर्ष से पांच ज्‍यादा है। इसके अलावा अब तक शहर में साढ़े दस माह में 60 से अधिक हत्याएं हो चुकी हैं, जो बता रहा है कि हत्या की घटनाएं रोकने में पुलिस असफल रही है। इस साल की हत्याओं में जहां जिलाबदर की हत्या हुई, वहीं कई बदमाशों ने भी हत्या को अंजाम दिया है। वहीं कुछ नाबालिग भी हत्या में पकड़े गए हैं।

दिवाली की रात 3 हत्‍याएं : पुलिस ने त्योहारों के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए सौ से अधिक बदमाशों को जिलाबदर किया था। वहीं पांच सौ से अधिक को बाउंडओवर किया था, लेकिन इसके बावजूद दिवाली की रात शहर में आजादनगर में जिलाबदर बदमाश राजा सोनकर की हत्या, द्वारकापुरी में महेश की गोली मारकर हत्या और एमआईजी में क्षितिज खोमने की हत्या हुई थी। वहीं छोटी दिवाली के दिन भी एमआईजी में एक युवक की हत्या हुई थी। वहीं शहर में लगातार हत्या के मामले सामने आ रहे हैं। कल रात फिर खजराना में एक मजदूर की हत्या हो गई।

कमिश्‍नरी में घटने की बजाए बढ़ रहे अपराध : इंदौर-भोपाल में 2021 में लागू हुआ था कमिश्‍नर सिस्‍टम प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (CM Shivraj singh chouhan) ने 21 नवंबर 2021 को भोपाल और इंदौर में कमिश्नर प्रणाली लागू करने की घोषणा की थी। इसके बाद 9 दिसंबर 2021 को भोपाल और इंदौर में कमिश्नर प्रणाली लागू की गई थी। कमिश्‍नरी लागू होने के बाद दोनों शहरों में पूरी पुलिस अमले में बदलाव किया गया था। मकसद यह था कि कमिश्‍नरी प्रणाली लागू होने के बाद इंदौर और भोपाल में क्राइम के ग्राफ को नीचे लाया जा सके। लेकिन यह सिस्‍टम लागू होने के बाद अपराध घटने की बजाए बढ रहे हैं।
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क्‍या कहते हैं शहर के प्रबुद्ध नागरिक?
अभिभाषक
, गांधीवादी कार्यकर्ता और लेखक अनिल त्रिवेदी ने वेबदुनिया को बताया कि इंदौर में अपराध का स्‍तर बढ़ा है। लेकिन जिस तरह से हम इस शहर को बड़ा कर रहे हैं और जिस दिशा में ले जा रहे हैं, उससे लोगों का जीवन तो आसान हुआ है, लेकिन बड़ा शहर वो होता है, जिसे कोई तंत्र ठीक नहीं कर सकता। बड़े शहर आमतौर पर अराजक ही होते हैं। बड़े शहरों में हमें 24 घंटे संघर्ष करना होता है। हम भी अपने शहर को दिल्‍ली-मुंबई की तरफ ले जा रहे हैं। तो ऐसे में अब सवाल यह है कि हम कैसे जीना चाहते हैं और किस तरह के शहर में रहना चाहते हैं। दरअसल, जो सिस्‍टम है, उसकी संवेदनशीलता कम हो गई है, जब तक उन्‍हें कहा नहीं जाता तब तक कोई कार्रवाई नहीं होती। ऐसा नहीं है कि गांवों में हत्‍याएं नहीं होती, कोई अपराध नहीं होता। लेकिन मेरा कहना यह है कि शहरों में सिस्‍टम छोटा और प्रभावशाली होना चाहिए। सवाल यह है कि विकास की जो अवधारणा हमने चुनी है, उसमें हत्‍याएं क्‍यों हो रही हैं, एक्‍सीडेंट क्‍यों हो रहे हैं। हम ऐसे तंत्र और अराजक शहर को क्‍यों बढ़ावा दे रहे हैं। इस बारे में हमें बोलना पड़ेगा और सवाल भी करना पड़ेगा।

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