rashifal-2026

Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia

2025 में चांदी की चाल ने चौंकाया, मात्र 9 माह में तय किया 1 से 2 लाख तक सफर, असेट वैल्यू भी 3 ट्रिलियन पार

Advertiesment
हमें फॉलो करें silver price

नृपेंद्र गुप्ता

, गुरुवार, 18 दिसंबर 2025 (14:50 IST)
Silver Story in 2025 : 2025 में जब शेयर बाजार ने निवेशकों को निराश किया, डॉलर के मुकाबले रुपए की कमजोरी ने भी सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए तब चांदी तक निवेशकों को मालामाल कर दिया। इस वर्ष चांदी पहली बार 1 लाख रुपए किलो हुई। इसके बाद इसने पलटकर नहीं देखा और वर्ष के आखिरी माह में यह 2 लाख पार हो गई। पहली बार चांदी की असेट वैल्यू 3 ट्रिलियन पार कर गई। अब असेट वैल्यू के हिसाब से गोल्ड 30 ट्रिलियन, एप्पल 3.5 ट्रिलियन, एनवीडिया 3.26 ट्रिलियन के बाद चांदी का ही नंबर आता है।
 
कैसी रही चांदी की चाल : सराफा बाजार में वर्ष की शुरुआत में चांदी 88,000 रुपए किलो थी। 1 अप्रैल को इसके दाम 1,01,200 हो गए। जुलाई की पहली तारीख को यह बढ़कर 1,05,000 हो गए। मात्र 4 माह में इसकी कीमत करीब 45,000 रुपए बढ़ी और यह 1,50,000 के आंकड़े को पार कर गई। 17 दिसंबर को 2 लाख के आंकड़े को पार को इतिहास रच दिया। इस तरह मात्र 1 साल में चांदी के दाम 1,15,000 रुपए प्रति किलो बढ़ गए।
 
चांदी में क्यों बढ़ी निवेशकों की दिलचस्पी : सोने की तुलना में चांदी सस्ती होने से छोटे निवेशकों के लिए यह अधिक सुलभ है। महंगाई, शेयर बाजार की अस्थिरता और वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण लोग चांदी को सेफ हेवन असेट मानकर खरीद रहे हैं। दुनिया भर में चांदी का उत्पादन सीमित है, जबकि मांग तेजी से बढ़ रही है। इससे कीमतें और आकर्षण दोनों बढ़े हैं। वैसे भारत में धार्मिक, सांस्कृतिक और पारंपरिक कारणों से चांदी के आभूषण, सिक्के और बर्तन की मांग बनी रहती है। शादी-ब्याह और त्योहारों के सीजन में मांग और बढ़ जाती है।
 
क्यों बढ़ी चांदी की इंडस्ट्रियल डिमांड : बाजार विशेषज्ञ योगेश बागौरा ने कहा कि फिजिकल में चांदी की शॉर्टेज की वजह से बाजार में इसकी इंडस्ट्रियल मांग चरम पर पहुंच गई है। जितनी डिमांड है उस हिसाब से माइनिंग नहीं हो रही है।

उन्होंने कहा कि चांदी में किसी भी धातु की तुलना में सबसे अधिक विद्युत चालकता, तापीय चालकता और परावर्तकता होती है, जिससे यह विभिन्न तकनीकों के लिए आवश्यक है। इलेक्ट्रॉनिक्स में सर्किट बोर्ड और विद्युत कनेक्शन से लेकर सौर ऊर्जा और चिकित्सा उपकरणों तक, चांदी के कई उपयोग आधुनिक उद्योगों में महत्वपूर्ण हैं।
 
क्यों बढ़े चांदी के दाम : घरेलू और वैश्विक स्तर पर चांदी की काफी मांग बनी हुई है। मांग और आपूर्ति में अंतर ने चांदी के दामों को अगले स्तर तक पहुंचा दिया है। फेड का इंटरेस्ट रेट घटाना भी इसके लिए अच्छा रहा। अमेरिका ने इस वर्ष चांदी को क्रिटिकल मिनरल की सूची में डालकर इसके खनन और निर्यात पर शिकंजा कसा है। रूस ने चांदी की सप्लाय कम की है। 2026 में चीन भी इस चमकीली धातु के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने की योजना बना रहा है। इस वजह से चांदी के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं।
 
रिस्ट्रिक्टेड कैटेगरी में चांदी : भारत सरकार ने चांदी को मार्च 2026 तक रिस्ट्रिक्टेड कैटेगरी में डाल दिया है। चांदी आयात करने के लिए विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) से लाइसेंस लेना अनिवार्य हो गया है। इस वजह से चांदी में मारामारी ज्यादा है। इस वजह से पिछले साल जहां 7700 टन चांदी आयात हुई थी। हालांकि इस वजय से भी चांदी का आयात कम हुआ है।
 
2026 में कैसा रहेगा चांदी का सफर : बागौरा ने कहा कि जल्द ही चांदी में मुनाफा वसूली की स्थिति भी बन सकती है। क्रूड के दाम कम हो रहे हैं। साथ ही युद्ध भी खत्म होने के कगार पर है। अगर चांदी में मुनाफा वसूली होती है तो यह जनवरी के अंत तक 1,75,000 तक आ सकती है। अगर इसमें इंडस्ट्रियल डिमांड बनी रहती है तो 2026 तक 225,000 से 2,40,000 तक के टारगेट आ सकते हैं।
 
वहीं बाजार विशेषज्ञ अजय नीमा ने बताया कि 2026 में भी चांदी की चाल तेज ही रहेगी। उन्होंने कहा कि नए वर्ष में अप्रैल मई तक चांदी 3 लाख के स्तर को भी पार कर सकती है। 
अस्वीकरण : यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है। किसी भी निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श जरूर लें।

Share this Story:

Follow Webdunia Hindi

अगला लेख

गूगल में नौकरी का लालच दिया और छात्रा से ठग लिए 1.13 लाख रुपए, वॉट्सऐप- टेलीग्राम से जमा करवाई राशि