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हक्कानी गुट का आईएसआई से संबंध से इनकार

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, सोमवार, 3 अक्टूबर 2011 (11:16 IST)
BBC
अफगानिस्तान में हक्कानी नेटवर्क के नेता ने काबुल में पिछले दिनों हुए हमले में हाथ होने से और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई से किसी तरह के संपर्क से इनकार किया है।

सिराज हक्कानी ने बीबीसी की फारसी सेवा को साक्षात्कार दिया है जिसमें बीबीसी की ओर से भेजे गए लिखित सवालों के जवाब ऑडियो के जरिए भेजा गया है।

सुरक्षा से जुड़े मसलों की वजह से आमने-सामने का साक्षात्कार नहीं हो सका जहाँ उनके जवाबों पर उनसे और सवाल किए जा सकते मगर बीबीसी इस ऑडियो को सिराज हक्कानी के ही जवाब मान रहा है।

सवाल एक मध्यस्थ के जरिए भेजे गए थे और उसी ने ऑडियो के ज़रिए जवाब पहुँचाया। सिराज हक्कानी इस गुट के संस्थापक जलालुद्दीन हक्कानी के बेटे हैं और संगठन के अभियान में उनकी अहम भूमिका है। इस साक्षात्कार की शुरुआत में सिराज हक्कानी ने कहा, 'बीबीसी के प्यारे दोस्तों आप सबको मेरा सलाम।'

आरोपों से इनकार : कुछ समय पहले काबुल में हुए हमले सहित कई प्रमुख हमलों के पीछे हक्कानी नेटवर्क का हाथ बताया गया था। इसमें ब्रिटिश काउंसिल और अमेरिकी दूतावास को निशाना बनाने से लेकर पूर्व राष्ट्रपति बुरहानुद्दीन रब्बानी की हत्या में हाथ होने तक के आरोप हैं।

अफगान और अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के साथ हक्कानी नेटवर्क के गहरे संबंध हैं। मगर सिराज हक्कानी ने इन सभी आरोपों से इनकार किया है।

उन्होंने कहा, 'हमने पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसियों और बाकियों से तब चर्चा की थी जब हम सोवियत लड़ाकुओं से लड़ रहे थे, मगर जब से अमेरीकियों का हमला हुआ है तब से हमारे बीच कोई संपर्क नहीं रहा है।'

वैसे हक्कानी ने बताया कि उनसे इस्लामी और गैर-इस्लामी दोनों तरह के देशों की खुफिया सेवाओं ने संपर्क किया है।

उनका कहना था, 'इन देशों में अमरीका भी शामिल है और वे हमसे कह रहे हैं कि हम जिहाद छोड़कर अफ़ग़ान सरकार में शामिल हो जाएँ।वे हमसे शांति वार्ता में शामिल होने के लिए कह रहे हैं।'

मगर हक्कानी ने ये नहीं बताया कि उनके गुट का इस प्रस्ताव पर जवाब क्या होगा। विरोधियों के लिए हक्कानी एक अपराधियों के परिवार की तरह हैं। उन पर कीमती रत्नों के अवैध व्यापार के लेकर धन के लिए अपहरण तक करने के आरोप हैं।

साथ ही अगर पिछले दिनों अफगानिस्तान में हुए हमलों में उनका हाथ है तो वे भावी शांति वार्ता की टेबल पर अपनी जगह सुनिश्चित करना चाहते हैं और शायद अपना हिस्सा भी।

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