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बनारस की हवा में 'जहर'..!

-वाराणसी से जयदीप कर्णिक

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हर हिन्दू की ख्वाहिश होती है कि वह अंतिम सांस बनारस में गंगा के तट पर ही ले, ताकि उसे मोक्ष की प्राप्ति हो... फिर यहां की खूबसूरत सुबह के तो कहने ही क्या। ...लेकिन इन दिनों बाबा विश्वनाथ की नगरी की हवा में चुनावी नारे घुले हुए हैं। भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी की उम्मीदवारी ने तो चुनावी चर्चा का रुख काशी की ओर ही मोड़ दिया है।

बनारस की हवा खराब : लोकसभा चुनाव में किसकी हवा खराब होगी और किसकी बनेगी, यह तो परिणाम के बाद ही पता चलेगा, लेकिन यहां की एक बात मन को काफी कचोटती है, वह है यहां का प्रदूषण। यहां हवा में प्रदूषण इतना है कि चौराहों पर खड़े पुलिस वाले मुंह पर मास्क लगाते हैं। दुपहिया चलाने वाले भी बिना मास्क लगाए घर से नहीं निकलते। दुख की बात तो यह ‍है कि चुनाव में इस बात की कोई चर्चा नहीं कर रहा है।

सड़कों से गड्‍ढे गायब : जिन सड़कों पर 20-25 दिन पहले तक बड़े-बड़े गड्‍ढे दिखाई देते थे, अब वहां रातोंरात चमचमाती सड़कें दिखाई दे रही हैं। लोग भी इसकी पुष्टि कर रहे हैं कि सड़कें हाल ही में बनी हैं। हालांकि यह स्थिति मुख्‍य मार्गों की है, अंदर की गलियां तो अब भी दुर्दशा का शिकार हैं। सवाल इस पर भी उठ रहे हैं कि आचार संहिता के रहते सड़क निर्माण कैसे हो रहा है? इस संबंध में कहा जा रहा है कि आचार संहिता से पहले ही इन सड़कों के निर्माण को मंजूरी मिल चुकी थी। चिंता इसलिए भी नहीं है क्यों यदि चुनाव आयोग ने आपत्ति ली तो नेताजी कह देंगे कि नेता हैं गलती तो हो ही जाती है...

विदेशियों का जमघट : चुनाव के चलते काशी में विदेशी भी काफी संख्या में दिखाई दे रहे हैं। दशाश्वमेध घाट हो या फिर अस्सी घाट, ये विदेशी आपको चुनावी चर्चा करते दिखाई दे जाएंगे, जबकि गर्मी के मौसम में विदेशी यहां कम ही आते हैं।

महंगे हुए होटल : बनारस के चुनावी दंगल के कारण होटल मालिकों की पौ-बारह हो गई है। यहां बड़ी संख्‍या में देशी-विदेशी लोग जुटे हैं। इस कारण सभी प्रमुख होटल भर चुके हैं। इतना ही नहीं इस स्थिति का फायदा उठाने के लिए होटल मालिकों ने दाम भी बढ़ा दिए हैं।

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