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हंसे-हंसाएं, खुद को रचनात्मक बनाएं

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हास्य बोध से दूर व्यक्ति स्प्रिंग विहीन उस गाड़ी की तरह होता है, जो सड़क पर पड़े हर पत्थर से झटके खाती रहती है और साथ ही आवाज करती है।
 
- हेनरी वार्ड बीकर
 
हंसना आपकी पाचन क्रिया के लिए अच्छा है, यह आपके तनाव संबंधी हारमोन का स्तर घटाता है, आपकी प्रतिरक्षा शक्ति को बढ़ाता है और शरीर के भीतरी अवयवों की मालिश करता है। हंसना आपकी आध्यात्मिक सेहत के लिए अभी अच्छा है क्योंकि यह अपने आप में एक तरह का ध्यान भी है। क्या आपने कभी गौर किया है कि हंसते समय आप विचारों और चिंताओं से पूरी तरह मुक्त होते हैं।
 

 
इतना ही नहीं, अगर आप खुद पर हंसने की कला सीख लें तो यह आपके अहं को कम करने में भी मदद करता है। हंसते समय लोग आपसी भेदभाव को भूलकर परस्पर नजदीक आ जाते हैं। उस संदर्भ में हंसी एक ऐसी सामाजिक चिकनाई है जो न सिर्फ आपके होठों बल्कि आपके दिलों को भी खोलती है।

इस तरह यह परस्पर गठबंधन में एक उत्प्रेरक का काम करती है। साथ ही शक्ति को बढ़ाती भी है। यह सच है कि हंसी के बिना गुजरे चार दिन भी आदमी को कमजोर बनाने के लिए बहुत होते हैं। हंसी रचनात्मकता की पराकाष्ठा तक पहुंचने की कुंजी भी है। हंसी हमारे दिमाग को तमाम जुड़ावों से मुक्त करती है। इस कारण यह हमारे मस्तिष्क को लचीला बनाती है जिससे यह नए जुड़ाव बनाने में सक्षम हो जाता है।

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लेकिन निम्नलिखित तीन प्रकार के हास्य की कोई खास महत्ता नहीं होती-
 
जो हास्य दूसरों के उपहास से पैदा हो।
 
जो हास्य खुद के भोंडे प्रदर्शन से पैदा किया गया हो।
 
जो हास्य यौन संबंधों के वीभत्स चित्रण से उपजा हो।
 
इस तरह के हास्य के व्यक्ति को और निम्न कोटि का हास्य माना जाता है जो कुछ लोगों को नाराज भी कर सकता है। इसके अलावा बाकी हास्य स्वस्थ होता है। मुस्कान एक खूबसूरत सौंदर्य उत्पाद है जबकि हंसी ताकत का एक बेहतरीन टॉनिक है। (पवन चौधरी की पुस्तक से साभार)

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