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पीएचडी वालों को मिल सकता है एक और मौका!

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PhD
नई दिल्ली। उच्च शिक्षा संस्थानों में शिक्षक बनने की चाहत रखने वालों के लिए अच्छी खबर है।  खबरों के अनुसार यूजीसी की पहल पर मानव संसाधन विकास मंत्रालय पुराने पीएचडी धारकों को एक और मौका देने की तैयारी कर रहा है।
अभी तक डिग्री कॉलेजों व विश्वविद्यालयों में शिक्षक पद पाने के लिए नेट उत्तीर्ण अनिवार्य था, किंतु 2009 से पहले पीएचडी कर चुके या पंजीकरण करा चुके अभ्यर्थियों को इस अनिवार्यता से छूट मिलती थी, लेकिन 2012 में कोर्ट के फैसले में कहा गया था कि नेट या जेआरएफ परीक्षा उत्तीर्ण किए बिना किसी भी व्यक्ति को विवि या महविद्यालयों में पढ़ाने का अवसर नहीं दिया जा सकता।

अब विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ऐसे अभ्यर्थियों के समर्थन में सामने आया है और मानव संसाधन विकास मंत्रालय को 2009 से पहले पीएचडी में पंजीकरण कराने वाले अभ्यर्थियों को एक मौका देने का प्रस्ताव भेजा गया है। हालांकि इस प्रस्ताव पर मानव संसाधन विकास मं‍त्रालय विचार कर रहा है।

देश भर में ऐसे लोगों की संख्या दस लाख से अधिक है, जो पुराने नियमों के अनुसार महाविद्यालयों व विश्वविद्यालयों में शिक्षक बनने के लिए पात्र हैं। इसी कारण विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने ऐसे सभी अभ्यर्थियों को एक मौका देने का प्रस्ताव मंत्रालय के पास भेजा है। इस प्रस्ताव इन दस लाख लोगों के भविष्य के साथ खिलवाड़ न होने देने की बात भी साफ कही गई है।

कई लोग उम्र की अधिकता के कारण परीक्षा देने या अब पीएचडी करने वालों से प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम नहीं हो सकते हैं। ऐसी कई महिलाएं भी हैं जिन पर पिछले 6 वर्षों में घरेलू जिम्मेदारियों का भार आ गया है। इन्हें भी मौका मिलना चाहिए।

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