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भारत में भी डिजिटल ड्रग खतरे की घंटी, जानें कैसे युवा और बच्चे बन रहे शिकार?

हमें फॉलो करें भारत में भी डिजिटल ड्रग खतरे की घंटी, जानें कैसे युवा और बच्चे बन रहे शिकार?
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विकास सिंह

, मंगलवार, 19 जुलाई 2022 (15:40 IST)
साल 2010 में अमेरिका के ओक्लाहोमा शहर से चलने वाली डिजिटल ड्रग अब भारत में दस्तक दे चुकी है। हाल ही में गुजरात के अहमदाबाद जिले में 8 स्कूली बच्चों के इस म्यूजिकल नशे की चपेट में आने की खबर हैं। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो अस्पताल पहुंचे इन बच्चों के पेरेंट्स के मुताबिक इनके बच्चे साउथ कोरियन बैंड BTS के सदस्यों के खाने, कपड़े पहनने और यहां तक कि उन्हीं की तरह रहने की लत से जूझ रहे हैं। जिससे इन बच्चों के दैनिक दिनचर्या में काफी परिवर्तन आया है।
 
दुनिया के कई देशों में युवाओं और बच्चों को अपनी गिरफ्तर में लेने के बाद भारत में डिजिटल ड्रग के केस सामने आने के बाद पेरेंट्स की चिंता बढ़ गई है। ‘वेबदुनिया’ ने वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ सत्यकांत त्रिवेदी से डिजिटल ड्रग्स को लेकर बात की।
 
क्या है डिजिटल ड्रग्स?- ‘वेबदुनिया’ से बातचीत में डॉ सत्यकांत त्रिवेदी कहते हैं कि अहमदाबाद में 8 स्कूलों बच्चों में म्यूजिकल नशे के चपेट में आने की खबर बहुत ही चिंताजनक और खतरे की घंटी है। वह कहते हैं कि डिजिटल ड्रग्स वास्तविकता में बाइनोरल बीट्स हैं।

बाइनॉरल का शाब्दिक अर्थ है दो कान, बीट्स यानी ध्वनि अर्थात दो कानों से सुनी गई ध्वनि, इसमें दाएं और बाएं दोनों कानों में अलग-अलग साउंड फ्रिक्वेंसी के साथ सुनी जाती है। इसे सुनने पर दिमाग के कई भाग सक्रिय हो जाते हैं। जिससे हमारा दिमाग कई तरीके के न्यूरो ट्रांसमीटर श्रावित करता है नतीजन हम शांत, खोया हुआ सा, ध्यान में जाने जैसा महसूस करते हैं। यह हमें नशे की स्थिति में भी पहुंचा सकता है।
 
बाइनॉरल बीट्स कई प्रकार की होती हैं,जो अलग-अलग तरह की ध्वनि तरंगों से दिमाग के अलग-अलग हिस्से को सक्रिय या शांत करते हैं। मुख्य रूप से कोर्टिसोल, डोपामाइन, मेलटोनिन और सेरोटोनिन में बदलाव आता है।
कैसे विकसित होता है एडिक्शन?- बाइनॉरल बीट्स को सुनकर लोगों के में रिलैक्स फील  होता है.परिणामस्वरूप लोग इन बीट्स को बार-बार सुनते हैं और धीमे धीमे एडिक्शन डेवलप हो जाता है। 

क्यों है बड़ा खतरा?- डॉक्टर सत्यकांत त्रिवेदी कहते हैं कि यूट्यूब पर मौजूद वीडियोज अपने मुख्य टाइटल में फिजिकल ड्रग्स का नाम लिखकर उनकी तुलना बाइनॉरल बीट्स से करते हैं। इससे युवा दोनों ड्रग्स के असर को समझने के लिए प्रयोग भी शुरू कर सकते हैं।
 
डॉ सत्यकांत त्रिवेदी कहते हैं कि लत लगने के बाद म्यूजिक नहीं मिलने पर व्यवहार में आक्रामकता, बेचैनी, चिड़चिड़ापन एयर घबराहट जैसे लक्षण आते हैं। BTS समूह के लोगों के बालों को रखने का तरीका भी टीनएजर्स को काफी प्रभावित करता है।वे उनके तरीके से ही जीना पसंद करने लगते हैं।

कैसे किया जाता है इलाज?-डॉ सत्यकांत त्रिवेदी बताते हैं उपचार का तरीका समस्या की गम्भीरता पर निर्भर करता है। अधिकांश बच्चों में ADHD,Anxiety और अकेलापन की समस्या देखने को मिल सकती है। ऐसे में माता-पिता को बच्चों को पर्याप्त समय देने के साथ उनको धीरे-धीरेइस आदत से दूर करना होगा। 
 

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