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भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा

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धर्मयात्रा की इस कड़ी में हम आपको शामिल करवाने जा रहे हैं गुजरात की शान समझी जाने वाली भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा में। प्रतिवर्ष अहमदाबाद में आषाढ़ी सुदी ‍द्वितीया के दिन परंपरागत रूप से निकलने वाली इस रथयात्रा में लाखों श्रद्धालु हर्षोल्लास से भाग लेते हैं।

इस दिन जूना अहमदाबाद स्थित जगन्नाथ मंदिर से बहन सुभद्रा और भाई बलराम के साथ भगवान जगन्नाथ नगर भम्रण पर निकलते हैं।

फोटो गैलरी देखने के लिए यहाँ क्लिक करें।

तीन अलग-अलग रथों पर निकलने वाली इस रथयात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के साथ कई साधु-संत, महिला मंडल और अखाड़े भी शामिल होते हैं। करतबबाज विभिन्न कलाओं का प्रदर्शन कर भगवान जगन्नाथ के प्रति अपनी आस्था प्रकट करते हैं।

इस दिन शहर की छटा देखते ही बनती है। शहर की हर गली भक्ति रस में डूबी नजर आती है। राह से गुजरते समय जगह-जगह श्रद्धालु रथयात्रा का फूलों से स्वागत करते हैं और भगवान जगन्नाथ के दर्शन कर खुद को धन्य मानते हैं।

कहा जाता है कि सर्वप्रथम इस रथयात्रा के दर्शन मंदिर के गजराज करते हैं, फिर राज्य के सत्ताधिकारी सोने की झाडू से सफाई करते हैं, तत्पश्चात रथ प्रस्थान करता है। सुबह से निकलने वाली यह यात्रा शहर के विभिन्न क्षेत्रों से होती हुई दोपहर में सरसपुर क्षेत्र में विश्राम के लिए ठहरती है, जहाँ यात्रा में शामिल भक्तों को भोजन कराया जाता है। करीब एक लाख से भी अधिक भक्त यहाँ प्रसाद ग्रहण करते हैं।

  इस दिन मुस्लिम लोग भी मंदिर के महंत का स्वागत करते हैं। इस रथयात्रा में प्रसाद के रूप में भक्तों को जामुन और मूँग दिए जाते हैं। वहीं भगवान को नैवेद्य के रूप कद्दू, ग्वारफली की सब्जी और खिचड़ी चढ़ाई जाती है।      
भगवान जगन्नाथ मंदिर के इतिहास के बारे में कहा जाता है कि यह मंदिर करीब 443 वर्ष पुराना है। भक्तों का कहना है कि करीब 125 वर्ष पूर्व भगवान जगन्नाथ ने मंदिर के महंत श्री नरसिंहदासजी महाराज को सपने में आकर रथयात्रा निकालने का आदेश दिया, तभी से आज तक यह परंपरा कायम है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि जो भी इस रथयात्रा के दर्शन करता है या इस रथ को चलाता है, उसके जीवनरूपी रथ को स्वयं भगवान जगन्नाथ हाँकते हैं।

वैसे इस रथयात्रा को खींचने का अधिकार मल्लाह लोगों को ही दिया गया है। कहते हैं भरूच के मल्लाह लोगों ने ही सबसे पहले यात्रा निकालने हेतु अपना रथ प्रदान किया था। रथयात्रा को कौमी एकता का उत्सव भी माना जाता है। इस दिन मुस्लिम लोग भी मंदिर के महंत का स्वागत करते हैं। इस रथयात्रा में प्रसाद के रूप में भक्तों को जामुन और मूँग दिए जाते हैं। वहीं भगवान को नैवेद्य के रूप कद्दू, ग्वारफली की सब्जी और खिचड़ी चढ़ाई जाती है।

कैसे पहुँचें-
वायुमार्ग:- देश की सभी मेट्रो सिटी और बड़े शहरों से आप अहमदाबाद तक विमान सेवा से पहुँच सकते हैं।
रेल मार्ग:- अहमदाबाद देश के सभी प्रमुख रेल मार्गों से जुड़ा हुआ है।
सड़क मार्ग:- अहमदाबाद देश के प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों से जुड़ा होने के कारण आप किसी भी हिस्से से यहाँ सड़क मार्ग से आसानी से पहुँच सकते हैं।

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