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क्या आप भी सेक्सी हैं?

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नई सदी की शुरुआत में सब कुछ बदल गया है। प्रेम की भाषा और परिभाषाएँ भी बदल गई हैं। शब्दों के रूप बदल गए हैं। इस बदलाव में भाषा को बेलगाम जबान मिली है। भाषा और जबान पर आ टिका है कामुकता का भाव जिसे अभिव्यक्त करता है एकमात्र 'सेक्सी' शब्द।

आधुनिक भाषा शास्त्र में सेक्सी शब्द ऐसा रूप ले चुका है, जो किसी की तारीफ में भी यह कहा जा सकता हैं कि ''आप कितनी सेक्सी लग रही हैं''। सेक्सी शब्द खास कर 'डाट कॉम' दौर की युवा पीढ़ी की शब्दावली का अभिन्न हिस्सा बन गया है, जो उनकी मनोभावनाओं को बेहद आसानी से व्यक्त करने में सहायक होता है। सेक्सी शब्द 'ढाई अक्षर प्रेम के' का नए ढाई अक्षरीय रूप में पुनर्जन्म है, जो हमेशा कामुकता की ओर इशारा नहीं करता बल्कि माहौल व उस में समाई चीजों को एक खास रूप से पेश करता है।

आज पूरा का पूरा माहौल सेक्सी सुविधाओं व कृतियों से भरा हुआ है। कंप्यूटर सेक्सी है, टीवी पर न्यूजरीडर सेक्सी है, म्यूजिक सिस्टम सेक्सी है, बाथरूम सेक्सी है तो फ्रिज का लुक सेक्सी है। पोशाकें तो सेक्सी हैं ही। अब तो जूते, चप्पलें तक भी सेक्सी हो चले हैं।

मुद्दे की बात यह है कि सेक्सी शब्द ऐसा साफसुथरा किंतु शरारतपूर्ण शब्द बन चुका है, जो मन के किसी कोने में पैदा हुई यौन इच्छा से जुड़ी गुदगुदी को जगा देता है। देखने में सुंदर, साफसुथरे ऑफिस को 'सेक्सी ऑफिस' कह दिया जाता है। मेज के कोने पर रखा नए मॉडल का आकर्षक कंप्यूटर या लैपटॉप, कुर्सियों की नरम गुदगुदा देने वाली गद्दियाँ आदि सब कुछ सेक्सी होने में शुमार हो जाते हैं।

सड़कों पर मचती धूम
करीब 10-12 साल पहले देश की सड़कें सूनी नजर आती थीं। उन पर फिएट और एंबेसडर कारें और बहुत हुआ तो मारुति कारें दिखती थीं पर अब सड़कों पर 'सेक्सी कारों' की भरमार है। किसी का अगला हिस्सा सेक्सी है तो किसी का पिछला हिस्सा सेक्सी है। कामुकता पैसे की बैसाखियों पर सवार होकर ज्यादा इठलाती है। रईसों के लिए सफलता भी सेक्सी है और पैसा भी सेक्सी है। आज के परिवेश में पैसा और सफलता भी कामुकता पैदा करती है।

हाऊ सेक्सी
'प्यार' बाजार में मिलने लगा डब्बों में पैक हो कर रेडीमेड। प्रेम की भावना खुलेआम देशीविदेशी कार्ड कंपनियों द्वारा कभी कार्ड की शक्ल में, कभी गुब्बारों की शक्ल में। कभी छोटेबड़े टैडिबीयरों की शक्ल में दुकानें पर बिकने के लिए रखी जाने लगी है। मुँह से बोलने के लिए जबान ने सिर्फ एक ही शब्द चुना 'हाऊ सेक्सी'।

सौंदर्य अब फड़कता, दमकता रोकड़ा बन गया है जिसे कैश कार्ड की तरह भुनाया जा सकता है। सौंदर्य प्रतियोगिता में अब लोग अपनी बेटियों की नुमाइश शौक से करते हैं क्योंकि अगर इस से नोट कमाए जा सकते हैं तो क्या बुराई है। सौंदर्य को ताकत समझा जाने लगा है। हर छोटाबड़ा शहर अपनेअपने तंबू तान कर अपनी-अपनी नजरें सिंकाई का सामान इकट्ठा करता है और कहा जाता है 'काफी सेक्सी शो था।'

जिम्मेदार कौन
परफ्यूम की खुशबू में डूबा, महकता शरीर सेक्सी लगता है। आफ्टर शेव लोशन की महक पुरुष को ज्यादा सेक्सी बना देती है। विज्ञापन कंपनियां आलू के चिप्स से ले कर कमर के दर्द के मलहम तक सेक्सी अंदाज में पेश करने में पीछे नहीं रहती। ट्यूबलाइट हो या काफी का मग, चॉकलेट का डब्बा हो या पिज्जा का डब्बा, सब कुछ घूमफिर कर सेक्सी अंदाजों में डूब कर दर्शकों व ग्राहकों को अपनी ओर खींचता है।

माहौल पर हावी
सेक्स माहौल पर इतना हावी कब और कैसे हो गया, पता ही नहीं चला। 'वियागरा' का जिक्र छिड़ा नहीं कि व्यक्ति व्यग्र हो उठता है। हमारे रिक्शा, टेम्पो, ट्रक तक सेक्सी होने से अछूते नहीं रहते। इनका भी अपना एक अनोखा श्रृंगार रस है, जो हर राह चलते को उन्मादित कर ही देता है।

क्या सेक्सी शब्द को आकर्षण का पर्याय मानें? यह शब्द समाज के, व्यक्तित्व के खूबसूरत व शालीनरूप को प्रस्तुत करे तभी तक सुंदर लगता है अन्यथा जैसे ही वह अपना सम्मोहनकारी रूप त्याग कर उत्तेजकता व अश्लीलता के दायरे में कदम रखता है वैसे ही इसका गले से उतरना मुश्किल हो जाता है।

इस शब्द का इस्तेमाल सोच-समझकर करें। वक्त का व आसपास इकट्ठे लोगों का विशेष तौर पर ध्यान रखें। हमउम्र लोगों के बीच इस शब्द का इस्तेमाल खप जाता है। ऐसा न हो कि कभी गलत समय पर इस शब्द का उपयोग आप का सेक्सी होने का खुमार एक ही झटके में उतार दे।

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