श्राद्ध में कुत्ते को क्यों खिलाते हैं रोटी?
16 श्राद्ध पक्ष में कुत्ते के लिए प्रतिदिन अलग से भोजन निकालकर रखा जाता है। क्यों, जानें-
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श्राद्ध में पंचबलि कर्म करते हैं, जिसमें एक होता है श्वानबलि। इसका अर्थ है कुत्ते को भोजन कराना।
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कुत्ते को यम का दूत भी कहते हैं। यम को पितरों की जमात का प्रमुख माना जाता है।
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कुत्ते को भोजन देने से भैरव महाराज प्रसन्न होते हैं जिससे जातक पर आकस्मिक संकट नहीं आते हैं।
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कुत्ते को भी पितरों का एक रूप माना जाता है।
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कुत्ते को भोजन देने से शनि, राहु और केतु से संबंधित परेशानी नहीं रहती है।
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कुत्ते को प्रतिदिन भोजन देने से जहां दुश्मनों का भय मिट जाता है वहीं व्यक्ति निडर हो जाता है।
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कहते हैं कि कुत्ता भविष्य की घटनाओं और आत्माओं को देखने की क्षमता रखता है।
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कुत्ता घर के रोगी सदस्य की बीमारी अपने ऊपर ले लेता है या आने वाले रोग की सूचना 6 माह पहले ही दे देता है।
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यदि संतान की प्राप्ति नहीं हो रही हो तो काले या भूरे कुत्ते को पालने की सलाह दी जाती है।
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कुत्ता इंसान का वफादार साथी होता है, जो हर तरह के खतरे को पहले ही भांप लेता है।
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प्रस्तुत जानकारी मान्यताओं पर आधारित है।
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क्या विशेषता है अष्टमी के श्राद्ध की
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